इस बार पितृपक्ष तो अपने श्याम है से ही शुरु होंगे पहला पत्र आज 2 सितंबर 2020 को है जिसे नंदी मात्रा में श्राद्ध कहते हैं। इस साल 17 सितंबर को पितृ मोक्ष अमावस्या होगी।
हर वर्ष पितृपक्ष की समाप्ति के उपरांत नवरात्रों का प्रारंभ हो जाता है। अश्वनी कृष्ण अमावस्या के अगले दिन से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा । इस बार हमें शारदीय नवरात्रों का इंतजार 1 माह के लिए करना होगा क्योंकि इस बार अश्वनी मास में मलमास पड़ रहा है, जिसके कारण शरदीय नवरात्र 18 सितंबर से प्रारंभ नहीं होंगे। इसके लिए श्रद्धालुओं को पूरे 1 महीने का इंतजार करना पड़ेगा।
हम आपको बता दें कि इस बार शारदीय नवरात्र 17 अक्टूबर से शुरू होंगे। इसका कारण अधिक मास है। जो हर 3 साल में एक बार अर्थात हर तीसरी साल आता है।
नवरात्रि देरी से शुरू होने के कारण इस बार दीपावली 14 नवंबर को रहेगी, जबकि यह पिछले साल 27 अक्टूबर को थी।
विक्रम संवत 2077 के चलते इस वर्ष दो आश्विन माह होने से यह वर्ष 13 माह का रहेगा। अश्विन मास 3 सितंबर 2020 से प्रारंभ होकर 29 अक्टूबर 2020 तक रहेगा।
मल मास या किसी मलमास के 4 पक्षों के मध्य के दो पक्ष ही मलमास में गिने जाते हैं । पहला और चौथा शुद्ध मास में गिना जाता है। इसी कारण अश्वनी मास के बीच की अवधि वाली तिथि में 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक का समय अधिक मास वाला रहेगा। इस कारण 17 सितंबर को पितृ मोक्ष अमावस्या के बाद अगले दिन 18 सितंबर से नवरात्र आरंभ नहीं होंगे। बल्कि नवरात्र का शुभारंभ 17 अक्टूबर 2020 को होगा। जबकि पिछले वर्ष ये 29 सितंबर को प्रारंभ हो गए थे।
देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को है। माह के अंत में देवउठनी एकादशी के होने से नवंबर व दिसंबर दोनों ही महीनों में विवाह मुहूर्त की कमी रहेगी, क्योंकि 16 दिसंबर से 1 माह के लिए मलमास प्रारंभ हो जाएगा।

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