समुद्र मंथन *॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥* "श्रीमद्भागवतमहापुराण" एक बार ऋषि दुर्वासा वन में भ्रमण करने को निकले। अचानक उन्हें एक बहुत तेज व अनोखी सुगंध का अनुभव हुआ। वो सुगंध इतनी अच्छी थी कि दुर्वासा स्वयं को रोक नहीं पाए एवं सुगंध की दिशा में बढ़ने लग…
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