Founding the cube root if it is a perfect one..
1) Starting from the extreme right (unit), put a comma for each three digits.
2) Compare the last digit of the number with the following table..
cube 1=1;
cube 2=8 ;
cube 3=27 ;
cube 4=64 ;
cube 5=125 ;
cube6 =216 ;
cube 7=343 ;
cube 8 =512 ;
cube9= 729..
(Now its clear that if the given number has last disit 8, the perfect cuberoot will have its last digit or unit digit 2..if the given number ends with 2, then the perfect cube root will have 8 at its unit digit and so on..)
3) Now see the first group of numbers (as the number is divided into groups of three starting from the extreme right) and acertain which numbers cube is less than the LHS..that number will become the first digit of the cube root..
Ex. 2744
2,744 given number ends with 4 so as per the table the unit place of the cuberoot would be 4.
Now take the LHS where the one number left is 2.the cube which is less than 2 is cube of 1 which is 1 itself..
so the answer is 14.
Ex. 4913
4,913
Unit place = 7
LHS 1
Answer = 17
Ex. 74088
74,088
ans= 42
Ex. 226981
226,981
ans = 61
Ex. 704969
704,969
ans= 89
( As cube of 9 is 729 we cant take it..we take the cube of 8 which is 512 which is the cube less than 704..)
अब वैदिक गणित के निखिलम सूत्र से चंद सैकिंड में बड़ी से बड़ी संख्या का cube घन करें-------
उदाहरण : 29996³ = ?
हल : घन यानि किसी संख्या की 3 बार उसी से गुणा |
29996×29996×29996 = ?
आधार संख्या = 30000
अंतर = –4
पहला चरण :
29996+(–4×2)
= 29996–8= 29988
या
29988 / _ _/ _ _
पहले चरण की व्याख्या : सबसे पहले प्रश्न संख्या में अंतर के दोगुने को जोड़ें |
दूसरा चरण : पहले चरण में हमे संख्या 29988 प्राप्त हुई | और आधार संख्या से यह 12 कम है यानि –12 का अंतर है | और प्रश्न संख्या 29996 में आधार संख्या का अंतर –4 है|
दोनों अंतर यानि –12 व –4 की गुणा करके इसको आधार संख्या के पहले अंक 3 से गुणा कर देते हैं |
अतः हमे 0144 प्राप्त होता है | इसको संख्या 29988 के बाद दुसरे चरण में प्राप्त संख्या के तौर पर लिख देते हैं |
29988 / 3(–12×–4) / _ _
29988 / 0144 / _ _
इस प्रकार 2 चरणों में हमे 29988 व 0144 प्राप्त हुए | यहाँ आधार संख्या में 4 शून्य है इसलिए 144 के पहले 0 लगाकर इसे 4 अंकों की संख्या बना लेते हैं | और दुसरे चरण में प्राप्त संख्या के तौर पर लिख लेते हैं |
तीसरा चरण : इस चरण में प्रश्न संख्या व आधार संख्या के अंतर यानि यहाँ –4 का घन यानि –64 प्राप्त होता है| इसे समीकरण के अंत में लिख देते हैं |
29988 / 0144 / –0064
चौथा चरण : अब प्रथम चरण में प्राप्त संख्या 29988 की आधार संख्या के प्रथम अंक 3 के वर्ग यानि 9 से गुणा करें |
29988×9 / 0144 / –0064
या
269892 / 0144 / –0064
अब
2698920144×10000
= 26989201440000
26989201440000-0064
= 26989201439936
अतः
29996³ = 26989201439936
यही सही उत्तर है |
नोट : यह पूरी प्रक्रिया एक ही चरण में केवल चन्द सेकंड में पूरी की जा सकती है हमने सिर्फ समझाने के लिए 4 चरणों में पूरी की है| मन ही मन अभ्यास करने से हम बड़ी बड़ी गणना भी कुछ सेकंड्स में कर सकेगे अतः अभ्यास ज़रूरी है |
वैदिक गणित में ही संभव है इतनी बड़ी गणना , कैलकुलेटर में तो इतने अंक आयेंगे भी नही ! जानने के लिए पढ़िए पूरी पोस्ट -:
वैदिक गणित निखिलम् घन सूत्र ही कर सकता है इतनी बड़ी संख्या का घन | इतनी बड़ी संख्या का घन साधारण गुणा से करना इतना आसान नही होगा | लेकिन यदि एक बार आपने वैदिक गणित निखिलम् सूत्र को जान लिया तो आप बिना कैलकुलेटर के ही इस 5 अंकों की ही नही 10 अंकों की संख्या का घन भी आसानी से कर पाएंगे | जो कि साधारण कैलकुलेटर से भी संभव नही है| वैदिक गणित निखिलम् घन सूत्र का प्रयोग करके नीचे दी गयी 5 अंकों की संख्या का घन Cube ज्ञात करेंगे |
उदाहरण : 29996³ = ?
घन यानि किसी संख्या की 3 बार उसी से गुणा |
29996×29996×29996 = ?
आधार संख्या = 30000
अंतर = -4
पहला चरण : 29996+(-4×2) = 29996-8= 29988
या
29988 / _ _/ _ _
पहले चरण की व्याख्या :
पहले चरण की व्याख्या : सबसे पहले प्रश्न संख्या में अंतर के दोगुने को जोड़ें |
दूसरा चरण : पहले चरण में हमे संख्या 29988 प्राप्त हुई | और आधार संख्या से यह 12 कम है यानि -12 का अंतर है
| और प्रश्न संख्या 29996 में आधार संख्या का अंतर -4 है |
दोनों अंतर यानि -12 व -4 की गुणा करके इसको आधार संख्या के पहले अंक 3 से गुणा कर देते हैं |
अतः हमे 0144 प्राप्त होता है | इसको संख्या 29988 के बाद दुसरे चरण में प्राप्त संख्या के तौर पर लिख देते हैं |
29988 / 3(-12×-4) / _ _
29988 / 0144 / _ _
इस प्रकार 2 चरणों में हमे 29988 व 0144 प्राप्त हुए | यहाँ आधार संख्या में 4 शून्य है इसलिए 144 के पहले 0 लगाकर
इसे 4 अंकों की संख्या बना लेते हैं | और दुसरे चरण में प्राप्त संख्या के तौर पर लिख लेते हैं |
तीसरा चरण : इस चरण में प्रश्न संख्या व आधार संख्या के अंतर यानि यहाँ -4 का घन यानि -64 प्राप्त होता है| इसे
समीकरण के अंत में लिख देते हैं |
29988 / 0144 / -0064
चौथा चरण : अब प्रथम चरण में प्राप्त संख्या 29988 की आधार संख्या के प्रथम अंक 3 के वर्ग यानि 9 से गुणा करें |
29988×9 / 0144 / -0064
या
269892 / 0144 / -0064
अब प्रथम 2 चरणों में प्राप्त संख्या हुई 269892 / 0144 यानि 2698920144 इसे मूल आधार संख्या 10000 से गुणा करें |
(वैसे तो यहाँ आधार संख्या 30000 है परन्तु मूल आधार संख्या 10 की घात ही होती है इसलिए यहाँ 10000 मूल आधार संख्या है)
2698920144×10000 = 26989201440000
इसमें से 0064 को घटा दें क्योंकि यह एक ऋणात्मक संख्या है |
26989201440000-0064 = 26989201439936
यही सही उत्तर है |
अतः
29996³ = 26989201439936
यही सही उत्तर है | कैलक्यूलेटर में तो इतने अंक आएंगे नहीं कंप्यूटर में try करें या कॉपी पैन लेकर शुरू हो जाएं और देखें कितने पेज भरते हैं।
नोट : यह पूरी प्रक्रिया एक ही चरण में केवल चन्द सेकंड में पूरी की जा सकती है हमने सिर्फ समझाने के लिए 4 चरणों में
पूरी की है| मन ही मन अभ्यास करने से हम बड़ी बड़ी गणना भी कुछ सेकंड्स में कर सकेगे अतः अभ्यास ज़रूरी है| अगर आप वैदिक गणित की ताकत को मानते हो तो कमेंट में या फ़ोन करके ज़रूर बताएं।
वैदिक गणित के इस सूत्र को पढ़ें और जानें कैसे किसी संख्या का वर्ग (Square) इतनी जल्दी से किया जा सकता है? ये रहा सूत्र ..............
1025² = ?
हल : 1025×1025 = ?
आधार संख्या = 1000
आधार संख्या से अंतर = 25
पहला चरण :
अतः 1025 आधार संख्या 1000 से 25 अधिक है इसलिए 25 का वर्ग उत्तर के अंतिम अंक के तौर पर लिखें | क्योंकि यहाँ आधार संख्या में 3 शून्य हैं इसलिए उत्तर के अंतिम 3 अंक ही लिखने हैं यानि 25×25=625 यहाँ 625 में 3 ही अंक हैं अतः उत्तर के अंतिम 3 अंक 625 हुए |
1025-1000 = 25
25² = 625
अतः
उत्तर के अंतिम 3 अंक लिखें
__ / 625
दूसरा चरण : अब 1025 में अंतर यानि 25 को जोड़ दें | (1025+25 = 1050) यही उत्तर के प्रथम 4 अंक हैं |
यही उत्तर के पहले 3 अंक हैं
1050 / 625
अभीष्ट अंख्या = 1050625
अतः
1025² = 1050625 उत्तर
नोट : यह पूरी प्रक्रिया एक ही चरण में केवल 2 सेकंड में पूरी की जा सकती है हमने सिर्फ समझाने के लिए 2 चरणों में पूरी की है| मन ही मन अभ्यास करने से हम बड़ी बड़ी गणना भी कुछ सेकंड्स में कर सकेगे अतः अभ्यास ज़रूरी है |
#वास्तविक_नव_वर्ष
*न तो जनवरी साल का पहला मास है और न ही 1 जनवरी पहला दिन....*
अगर आप भी आज तक जनवरी को पहला महीना मानते आए है, तो इस लेख को पढ़कर कृपया पुनः विचार करिए।
*तथ्य नं:-1*
हिन्दी में सात को सप्त, आठ को अष्ट कहा जाता है, इसे अग्रेज़ी में sept(सेप्ट) तथा oct(ओक्ट) कहा जाता है...
ऐसे ही *nov=9 और dec=10*
इसके अनुसार तो
सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर क्रम से 7वाँ, 8वाँ, 9वाँ और 10वाँ महीना होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है
ये क्रम से 9वाँ,10वाँ,11वां और12वाँ महीना है।
*तथ्य नं:-2*
*1752(calendar act 1751, England देखे) के पहले दिसंबर दसवाँ महीना ही हुआ करता था।* और नव वर्ष 25 मार्च को मनाया जाता था।
http://www.adsb.co.uk/date_and_time/calendar_reform_1752/
इसका एक प्रमाण और है ..
जरा विचार करिए कि 25 दिसंबर यानि क्रिसमस को X-mas क्यों कहा जाता है????
इसका उत्तर ये है की "X" रोमन लिपि में दस का प्रतीक है और mas यानि मास अर्थात महीना। चूंकि दिसंबर दसवां महीना हुआ करता था,इसलिए *25 दिसंबर दसवां महीना यानि X-mas* से प्रचलित हो गया।
*तथ्य नं:-3*
भारत इंग्लैंड समेत विश्व के अनेक देशों मे *वित्त-वर्ष अप्रैल मे शुरू होकर अगले मार्च तक होता है,*
भारतीय नववर्ष(संवत) भी मार्च-अप्रैल मे ही मनाया जाता है।
इन सब बातों से ये निष्कर्ष निकलता है की प्राचीन काल में अंग्रेज़ भारतीयों के प्रभाव में थे इस कारण सब कुछ भारतीयों जैसा ही करते थे।
इसका एक अन्य प्रमाण देखिए-
दिन की शुरुआत सूर्योदय से होती है तो फिर अंग्रेज अपनी तारीख या दिन 12 बजे रात को क्यों बदल देते है?
दरअसल भारत में नया दिन सुबह से गिना जाता है, सूर्योदय से करीब एक-डेढ़ घंटे पहले के समय को ब्रह्म-मुहूर्त्त की बेला कही जाती है और यहाँ से नए दिन की शुरुआत होती है.. यानि की करीब 5-5.30 के आस-पास और इस समय इंग्लैंड की घङी मे रात के 12 बज रहे होते है।
*तथ्य नं:-4*
भारत सरकार ने वर्ष 1957 मे *राष्ट्रीय क्लेंडर के रूप मे शक संवत को स्वीकार किया था जिसका नव वर्ष भी 21/22 मार्च ही होता है।*
https://en.m.wikipedia.org/wiki/Indian_national_calendar
हालाँकि लेखक शक संवत से भी ज्यादा अच्छा विक्रमी संवत को मानता है क्योंकि यह भारत के गौरवमयी इतिहास और भारतीय काल गणना के ज्यादा अनुकूल है।
उल्लेखनिय है विक्रमी संवत अंग्रेजी कलेंडर से लगभग 57 वर्ष आगे है।
अगर आप भी इस लेख को पढ़ने के बाद भारतीय इतिहास और वैदिक ज्ञान पर पहले से ज्यादा गौरवान्वित महसूस कर रहे है, तो इसे ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाए।
(वास्तविक लेख को इस लिंक पर जाकर लाइक शेयर अवश्य करिएगा https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=762347947447332&id=307266719622126)
यही लेख अंग्रेजी में यहां उपलब्ध है-https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=321012508506380&id=238249886782643
नोट:- हमारा *नवसवंत्सर(विक्रमी संवत्) 2076 चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा*(यानी 6 अप्रैल 2019) से शुरू हो रहा है।यह आर्य समाज का स्थापना दिवस भी है।
अपने मित्रो परिजनो को शुभकामनाएँ देना न भुले।वो भी रात 12 बजे नहीं बल्कि प्रातः सुर्य उदय के साथ।
यह लेख मेरे प्रेरणास्त्रोत और आर्य समाज के संस्थापक *स्वामी दयानंद सरस्वती जी को समर्पित है* जिन्होंने जीवन भर सत्य को अपनाने और असत्य को छोङने छुङवाने की नीति अपनाई।
🚩🔥🌹
*#जनवरी_नहीं_अप्रैल*
#NotJanuaryButApril
वैदिक गणित का ये सूत्र सीखकर आपको कभी कैलक्यूलेटर की आवश्यकता नही पड़ेगी: आचार्य दीपक शर्मा
उदाहरण 2024×2004 = ?
प्रथम चरण : क्योंकि ये दोनों संख्याएँ 2000 के करीब हैं इसलिए हम 2000 को आधार संख्या मानकर इस सवाल को हल करेंगे |
2024+24
2004+4
_________________
---/096
आधार संख्या 2000 से अंतर क्रमशः 24 व 4
24×4=96 (उत्तर के अंतिम 3 अंक क्योंकि आधार संख्या में 3 शून्य हैं इसलिए उत्तर के अंतिम 3 अंक लिखें | 96 में 2 ही अंक हैं इसलिए इस प्रकार लिखें 096)
---/096 .................................................(1)
दूसरा चरण :
2024 + 24
2004 + 4
________________________________
2028 /096 ..................(2)
अब इस प्रकार दुसरे चरण में प्राप्त संख्या 2028 को आधार संख्या (2000) के प्रथम अंक यानि 2 से गुणा कर देते हैं (2028×2=4056) यही उत्तर के प्रथम 4 अंक होंगे |
अतः अभीष्ट संख्या = 2024×2004 = 4056096 उत्तर
इन उदाहरणों को समझकर आपको इसकी पूरी प्रक्रिया समझ आ गयी होगी अतः आप अन्य संख्याओं की गुणा करने का भी अभ्यास करते रहें |
नोट -: दोस्तो वैदिक गणित के साथ साथ हमारा संस्थान वैदिक भारत वैदिक ज्योतिष(Vedic Astrology) की सेवा भी शुरू कर रहा है। ज्योतिष जो पूर्णतः वैदिक गणना पर आधारित होगी। जो भाई बहन अपने जीवन की किसी भी समस्या से परेशान हैं वो निसंकोच संस्थान के नंबर पर बात करके आचार्य जी से बात कर सकता है। कुंडली पूर्णतः वैदिक ज्योतिष पर आधारित होगी।
वैदिक गणित का ये सूत्र सीखकर आपको कभी कैलक्यूलेटर की आवश्यकता नही पड़ेगी: आचार्य दीपक शर्मा
उदाहरण 2024×2004 = ?
प्रथम चरण : क्योंकि ये दोनों संख्याएँ 2000 के करीब हैं इसलिए हम 2000 को आधार संख्या मानकर इस सवाल को हल करेंगे |
2024+24
2004+4
_________________
---/096
आधार संख्या 2000 से अंतर क्रमशः 24 व 4
24×4=96 (उत्तर के अंतिम 3 अंक क्योंकि आधार संख्या में 3 शून्य हैं इसलिए उत्तर के अंतिम 3 अंक लिखें | 96 में 2 ही अंक हैं इसलिए इस प्रकार लिखें 096)
---/096 .................................................(1)
दूसरा चरण :
2024 + 24
2004 + 4
________________________________
2028 /096 ..................(2)
अब इस प्रकार दुसरे चरण में प्राप्त संख्या 2028 को आधार संख्या (2000) के प्रथम अंक यानि 2 से गुणा कर देते हैं (2028×2=4056) यही उत्तर के प्रथम 4 अंक होंगे |
अतः अभीष्ट संख्या = 2024×2004 = 4056096 उत्तर
इन उदाहरणों को समझकर आपको इसकी पूरी प्रक्रिया समझ आ गयी होगी अतः आप अन्य संख्याओं की गुणा करने का भी अभ्यास करते रहें |
वैदिक गणित निखिलम् सूत्र द्वारा अब गुणा व वर्ग ही नही, भागफल व शेषफल भी पलक झपकते ही निकलेगा | जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया ?
भाग की प्रक्रिया को अति सरल व रोचक बनाता है वैदिक गणित निखिलम् सूत्र Divide ! जानने के लिए पढ़िए पूरी पोस्ट |
अब भाग Divide करने का साधारण तरीका नही, प्रयोग करें वैदिक गणित निखिलम् सूत्र | ये है दुनिया की सबसे तेज़ परिणाम देने गणितीय वाली विधि | अभी सीखिए ये सूत्र !
वैदिक गणित निखिलम् सूत्र Divide भाग करने में भी आपकी मदद करता है | अब तक आपने वैदिक गणित निखिलम् सूत्र को ज्यादातर गुणा या फिर वर्ग करने के लिए hi प्रयोग किया होगा | लेकिन इस पोस्ट में हम एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट कर देंगे की जिस प्रकार यह सूत्र सबसे फ़ास्ट गुणन व वर्ग करने में कारगर है, उसी प्रकारवैदिक गणित निखिलम् सूत्र Divide भाग करने में भी उतना ही कारगर सिद्ध होता है | भाग मे भी यह इतनी तेज़ी से परिणाम देता है | तो इस उदाहरण द्वारा देखते हैं कि कैसे काम करता है ये खास वैदिक सूत्र :
निखिलम् सूत्र द्वारा भाग करना :
उदाहरण : 729 ÷ 97 = ?
हल : 729 ÷ 97
आधार संख्या = 100
अंतर = 3
भाजक संख्या 97 व आधार संख्या 100 का अंतर = 3 यहाँ भाजक (97) आधार संख्या से 3 कम है |
अब भाज्य संख्या (729) को खड़ी लकीर (/)द्वारा 2 भागों में बाँट लेते हैं (7 / 29) | पहला भाग भागफल के लिए तथा दूसरा भाग शेषफल के लिए होगा | फिर अंतिम हिस्से की संख्या यानि शेषफल वाले हिस्से की संख्या (यहाँ 29) के नीचे अंतर (यहाँ 3) व पहले हिस्से यानि भागफल वाले हिस्से (यहाँ 7) की गुणा करने पर आई संख्या लिखें |
3 (अंतर) × 7 (प्रश्न संख्या का भागफल वाला हिस्सा) = 21 , इस 21 को शेषफल वाले भाग में मौजुद संख्या 29 के
नीचे लिखें व दोनों को जोड़ दें | जैसा कि नीचे दिखाया गया है –
7 / 29
+. 21
__________________
50
इस प्रकार हमे 50 प्राप्त होता है | यहाँ 50 भाजक संख्या 97 से छोटा है इसलिए यहाँ पर भाग की प्रक्रिया बंद कर देंगे|
यहाँ एक ही चरण में भाग की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो गयी | और हमे सटीक परिणाम पलक झपकते ही प्राप्त हो गया |
अतः भागफल = 7
शेषफल = 50
दोस्तों देखा आपने कितना सरल तरीका, यदि ये सूत्र आपके समझ में आ गया तो इस प्रकार के भाग के सवालों को आप
बिना देर किये एकदम से उत्तर निकाल देंगे | और आपका इतनी जल्दी उत्तर सुनकर सामने वाला आपके तेज़ दिमाग का
कायल हो जायेगा | तो आज ही इन सूत्रों का अभ्यास करना शुरु कर दें |
वैदिक गणित के सभी सूत्र आसान है बस आपने इनको कभी सीखा नही है और न ही किसी विद्यालय या विश्व विद्यालय में
ये आपको सिखाया जाता | इसलिए आपको ये थोड़े कठिन मालूम पड़ते हैं | मेरी आशा है कि आप जब रोज़-रोज़ इन सूत्रों केसम्पर्क में रहेंगे तो आपको वैदिक गणित की तमाम विधियाँ एक बच्चों का खेल लगने लगेंगी |
धन्यवाद !
वैदिक गणित निखिलम् सूत्र द्वारा अब गुणा व वर्ग ही नही, भागफल व शेषफल भी पलक झपकते ही निकलेगा | जानिए क्या है पूरी प्रक्रिया ?
भाग की प्रक्रिया को अति सरल व रोचक बनाता है वैदिक गणित निखिलम् सूत्र Divide ! जानने के लिए पढ़िए पूरी पोस्ट |
अब भाग Divide करने का साधारण तरीका नही, प्रयोग करें वैदिक गणित निखिलम् सूत्र | ये है दुनिया की सबसे तेज़ परिणाम देने गणितीय वाली विधि | अभी सीखिए ये सूत्र !
वैदिक गणित निखिलम् सूत्र Divide भाग करने में भी आपकी मदद करता है | अब तक आपने वैदिक गणित निखिलम् सूत्र को ज्यादातर गुणा या फिर वर्ग करने के लिए hi प्रयोग किया होगा | लेकिन इस पोस्ट में हम एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट कर देंगे की जिस प्रकार यह सूत्र सबसे फ़ास्ट गुणन व वर्ग करने में कारगर है, उसी प्रकारवैदिक गणित निखिलम् सूत्र Divide भाग करने में भी उतना ही कारगर सिद्ध होता है | भाग मे भी यह इतनी तेज़ी से परिणाम देता है | तो इस उदाहरण द्वारा देखते हैं कि कैसे काम करता है ये खास वैदिक सूत्र :
निखिलम् सूत्र द्वारा भाग करना :
उदाहरण : 729 ÷ 97 = ?
हल : 729 ÷ 97
आधार संख्या = 100
अंतर = 3
भाजक संख्या 97 व आधार संख्या 100 का अंतर = 3 यहाँ भाजक (97) आधार संख्या से 3 कम है |
अब भाज्य संख्या (729) को खड़ी लकीर (/)द्वारा 2 भागों में बाँट लेते हैं (7 / 29) | पहला भाग भागफल के लिए तथा दूसरा भाग शेषफल के लिए होगा | फिर अंतिम हिस्से की संख्या यानि शेषफल वाले हिस्से की संख्या (यहाँ 29) के नीचे अंतर (यहाँ 3) व पहले हिस्से यानि भागफल वाले हिस्से (यहाँ 7) की गुणा करने पर आई संख्या लिखें |
3 (अंतर) × 7 (प्रश्न संख्या का भागफल वाला हिस्सा) = 21 , इस 21 को शेषफल वाले भाग में मौजुद संख्या 29 के
नीचे लिखें व दोनों को जोड़ दें | जैसा कि नीचे दिखाया गया है –
7 / 29
+. 21
__________________
50
इस प्रकार हमे 50 प्राप्त होता है | यहाँ 50 भाजक संख्या 97 से छोटा है इसलिए यहाँ पर भाग की प्रक्रिया बंद कर देंगे|
यहाँ एक ही चरण में भाग की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो गयी | और हमे सटीक परिणाम पलक झपकते ही प्राप्त हो गया |
अतः भागफल = 7
शेषफल = 50
दोस्तों देखा आपने कितना सरल तरीका, यदि ये सूत्र आपके समझ में आ गया तो इस प्रकार के भाग के सवालों को आप
बिना देर किये एकदम से उत्तर निकाल देंगे | और आपका इतनी जल्दी उत्तर सुनकर सामने वाला आपके तेज़ दिमाग का
कायल हो जायेगा | तो आज ही इन सूत्रों का अभ्यास करना शुरु कर दें |
वैदिक गणित के सभी सूत्र आसान है बस आपने इनको कभी सीखा नही है और न ही किसी विद्यालय या विश्व विद्यालय में
ये आपको सिखाया जाता | इसलिए आपको ये थोड़े कठिन मालूम पड़ते हैं | मेरी आशा है कि आप जब रोज़-रोज़ इन सूत्रों केसम्पर्क में रहेंगे तो आपको वैदिक गणित की तमाम विधियाँ एक बच्चों का खेल लगने लगेंगी |
धन्यवाद !
वैदिक गणित (गुणा)
सुत्र निखिलम्
उदाहरण : 998*999 = ?
हल : 998 और 999 में आधार संख्या =1000
अतः
पहला चरण :
998 -2
999 -1 (क्योंकि 1000-998 =2 तथा 1000-999=1 )
________
/ 002 (2 व 1 की गुणा = 2 )
अतः अंतिम 3 अंक =002
दूसरा चरण :
998 -2
999 -1
__________
997 / 002 (क्योंकि 998-1 या 999-2 = 997)
और प्रथम 3 अंक = 997
इस प्रकार 998 व 999 की गुणा = 997002
नोट : इस उदाहरण में आधार संख्या 1000 है इसलिए पहले चरण में हमने अंतिम 3 अंक लिखे यानि 002
वर्ग निकालने के लिए एक उपसुत्र है
'अन्त्ययोर्दशकेपि'
'अन्त्ययोर्दशकेपि' का 'प्रयोग में' अर्थ है: 'अंत में आने वाले का योग 10 हो' या 10ⁿ हो। जहां n प्राकृत संख्या है।
अर्थात् 10ⁿ का अर्थ हुआ कि संख्या 10 हो, या 100,1000, या 10000 या ..... कुछ भी हो।
यहां हम इस सूत्र का उपयोग करेंगे:-
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
(अंतिम अंकों की गुणा में 'आधार' में जितने शून्य (0) होते हैं, दाएं तरफ उसका दोगुना अंक लिखना होगा। 1×9=09, 11×89=0979, 998×003=003996)
जैसे-
56×54, (6+4=10)
* 56x54 में 'पूर्व' 5 है और 'अंतिम अंक' 6 और 4 है।
102×108 (2+8=10)
* 102×108 में 'पूर्व' 10 है और 'अंतिम अंक' 2 और 8 है।
157×143 (57+43=100)
* 157×143 में 'पूर्व' 1 है और 'अंतिम अंक' 57 और 43 है।
651×649 (51+49=100)
* 651× 649 में 'पूर्व' 6 है और 'अंतिम अंक' 51 और 49 है।
1998×1992 (8+2=10)
* 1998×1992 में 'पूर्व' 199 है और 'अंतिम अंक' 8 और 2 है।
1998×1002 (998+002=1000)
1998×1002 में 'पूर्व' 1 है और 'अंतिम अंक' 998 और 002 है।
अब आप समझ गए होंगे कि उपरोक्त गुना में दोनों संख्याओं के 'पूर्व' अंक समान है और 'अंतिम' अंकों का योग 10 या 10ⁿ है। इसलिए उपरोक्त नियम इस संख्याओं पर काम करेगा।
यहां हम इस सूत्र का उपयोग करेंगे:-
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
1998×1992 की गुणा करने पर विचार करें।
संख्या को 199(8)×199(2) प्रकार लिखने पर हम पाते हैं कि यहाँ पूर्व' अंक 199 तथा
'अंतिम' है 8 और 2 हैं । जिनका जोड़ =10 है। अतः यहां हम अंतिम अंको की गुणा करेंगे । जो 8×2 =16 होगा।
यहां हमें याद रखना होगा कि आधार 10 है अतः गुणनफल में शून्य की दुगने अंक लिखने होंगे । यहां 0 एक है इसलिए गुणनफल 2 अंकों में लिया जाएगा। यदि पूरा नहीं होता है तो उसमें 0 लगाकर पूरा करेंगे।
सूत्र
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
1998×1992
= 199(8)×199(2)
= 199×(199+1)\8×2
= 199×200 \8×2
= 39800\16
=3980016.
1998×1002 की गुणा करने पर विचार करें।
1998×1002 संख्या को हम 1(998)×1(002) प्रकार लिखने पर हम पाते हैं कि यहाँ पूर्व' अंक 1 तथा
'अंतिम' अंक है 998 और 002 हैं । जिनका जोड़ =1000 है। अतः यहां हम अंतिम अंको की गुणा करेंगे । जो 998×002 =1996 होगा।
(किन्तु यहां पर आधार 1000 है । अर्थात जहां सुनने की संख्या 3 है अतः अंकों की संख्या 3 × 2 = 6 होगी। इसलिए /अंतिम के गुणनफल से 6 अंक होने चाहिए यदि ऐसा नहीं होता है तो 0 की सहायता से 6अंक पूरा करगें। इस तरह हम 1996 को 001996 लिखेंगे।)
सूत्र
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
1998×1002
= 1(998)×1(002)
=1×(1+1)\998×002
=1×2\001996
= 2\003996
=2001996.
कुछ और उदाहरण:
उदाहरण (1)
64×66
=6×(5+1)\4×6
=6×6\4×6
=36\24
=3624
43×47
=4×(4+1)\3×7
=4×5\3×7
=20\21
=2021
219×211
=21×(21+1)\9×1
=21×22\9×1
=462\09
=46209
125×125
12(5)×12(5)
=12×(12+1)\5×5
=12×13\5×5
=156\25
=15625.
यह आसान है यदि आपको नही लगता है तो --- गुणा के 'उर्ध्वतिर्यक' सूत्र का प्रयोग करें। 16 सूत्रों के साथ में हमने उर्ध्वतिर्यक का एक उदाहरण दिया है उसे समझने का प्रयास करें।
वर्ग निकालने के लिए एक उपसुत्र है
'अन्त्ययोर्दशकेपि'
'अन्त्ययोर्दशकेपि' का 'प्रयोग में' अर्थ है: 'अंत में आने वाले का योग 10 हो' या 10ⁿ हो। जहां n प्राकृत संख्या है।
अर्थात् 10ⁿ का अर्थ हुआ कि संख्या 10 हो, या 100,1000, या 10000 या ..... कुछ भी हो।
यहां हम इस सूत्र का उपयोग करेंगे:-
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
(अंतिम अंकों की गुणा में 'आधार' में जितने शून्य (0) होते हैं, दाएं तरफ उसका दोगुना अंक लिखना होगा। 1×9=09, 11×89=0979, 998×003=003996)
जैसे-
56×54, (6+4=10)
* 56x54 में 'पूर्व' 5 है और 'अंतिम अंक' 6 और 4 है।
102×108 (2+8=10)
* 102×108 में 'पूर्व' 10 है और 'अंतिम अंक' 2 और 8 है।
157×143 (57+43=100)
* 157×143 में 'पूर्व' 1 है और 'अंतिम अंक' 57 और 43 है।
651×649 (51+49=100)
* 651× 649 में 'पूर्व' 6 है और 'अंतिम अंक' 51 और 49 है।
1998×1992 (8+2=10)
* 1998×1992 में 'पूर्व' 199 है और 'अंतिम अंक' 8 और 2 है।
1998×1002 (998+002=1000)
1998×1002 में 'पूर्व' 1 है और 'अंतिम अंक' 998 और 002 है।
अब आप समझ गए होंगे कि उपरोक्त गुना में दोनों संख्याओं के 'पूर्व' अंक समान है और 'अंतिम' अंकों का योग 10 या 10ⁿ है। इसलिए उपरोक्त नियम इस संख्याओं पर काम करेगा।
यहां हम इस सूत्र का उपयोग करेंगे:-
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
1998×1992 की गुणा करने पर विचार करें।
संख्या को 199(8)×199(2) प्रकार लिखने पर हम पाते हैं कि यहाँ पूर्व' अंक 199 तथा
'अंतिम' है 8 और 2 हैं । जिनका जोड़ =10 है। अतः यहां हम अंतिम अंको की गुणा करेंगे । जो 8×2 =16 होगा।
यहां हमें याद रखना होगा कि आधार 10 है अतः गुणनफल में शून्य की दुगने अंक लिखने होंगे । यहां 0 एक है इसलिए गुणनफल 2 अंकों में लिया जाएगा। यदि पूरा नहीं होता है तो उसमें 0 लगाकर पूरा करेंगे।
सूत्र
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
1998×1992
= 199(8)×199(2)
= 199×(199+1)\8×2
= 199×200 \8×2
= 39800\16
=3980016.
1998×1002 की गुणा करने पर विचार करें।
1998×1002 संख्या को हम 1(998)×1(002) प्रकार लिखने पर हम पाते हैं कि यहाँ पूर्व' अंक 1 तथा
'अंतिम' अंक है 998 और 002 हैं । जिनका जोड़ =1000 है। अतः यहां हम अंतिम अंको की गुणा करेंगे । जो 998×002 =1996 होगा।
(किन्तु यहां पर आधार 1000 है । अर्थात जहां सुनने की संख्या 3 है अतः अंकों की संख्या 3 × 2 = 6 होगी। इसलिए /अंतिम के गुणनफल से 6 अंक होने चाहिए यदि ऐसा नहीं होता है तो 0 की सहायता से 6अंक पूरा करगें। इस तरह हम 1996 को 001996 लिखेंगे।)
सूत्र
'पूर्व अंक' × 'एकाधिकपूर्व अंक' \ अंतिम अंकों की गुणा ।
1998×1002
= 1(998)×1(002)
=1×(1+1)\998×002
=1×2\001996
= 2\003996
=2001996.
कुछ और उदाहरण:
उदाहरण (1)
64×66
=6×(5+1)\4×6
=6×6\4×6
=36\24
=3624
43×47
=4×(4+1)\3×7
=4×5\3×7
=20\21
=2021
219×211
=21×(21+1)\9×1
=21×22\9×1
=462\09
=46209
125×125
12(5)×12(5)
=12×(12+1)\5×5
=12×13\5×5
=156\25
=15625.
यह आसान है यदि आपको नही लगता है तो --- गुणा के 'उर्ध्वतिर्यक' सूत्र का प्रयोग करें। 16 सूत्रों के साथ में हमने उर्ध्वतिर्यक का एक उदाहरण दिया है उसे समझने का प्रयास करें।
वैदिक गणित
(एकाधिकेन पूर्वेण + अन्त्ययोर्दशकेऽपि से)
गुणा और वर्ग:-
अन्त्ययोर्दशकेऽपि के सहायता से संख्याओं का वर्ग और गुणा करना।
एकाधिकेन पूर्वेण से वर्ग:
इस सूत्र के प्रयोग से 5 से अंत होने वाली संख्याओं का वर्ग किया जा सकता है।
जैसे: 35, 45, 65, 135, 125, 115 आदि का वर्ग.
35 का वर्ग
35 में 'पूर्व' अंक है 3 और 3 का एकाधिक (3+1= 4) होता है 4 इसलिए
35²
=3x(3+1)\25
= 3x4\25
=1225
125 का वर्ग
125 में 'पूर्व' अंक है 12 और 12 का एकाधिक (12 +1 =13) होता है 13
इसलिए
125²
=12x(12+1)\25
=12x13\25
=156\25
=15625
कुछ और उदाहरण-
उदाहरण (1)
65²
=6x(6+1)\25
=6x7\25
=42\25
=4225.
उदाहरण (2)
535²
=53x(53+1)\25
=53x54\25
=2862\25
=286225
उदाहरण (3)
1995²
=199x(199+1)\25
=199x200\25
=39800\25
=3980025
नोट :- किसी भी 5 से अंत होने वाली संख्या के वर्ग पर विचार कीजिये :
25² =25x25
यह हम देखते हैं कि इसमें दोनों के 'पूर्व' अंक एक ही हैं और 'अंतिम' अंक 5 और 5 हैं अर्थात अंतिम' अंको का योग 10 है।
इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि यह नियम वैसी सभी संख्याओं पर भी लागू होता है । जिनमें अंतिम अंको का योग 10 हो।
संख्या |सबसे छोटी|सबसे बड़ी|संख्याओं की कुल संख्या।
1 अंक 1 9 9
2 अंक 10 99 90
3 अंक 100 999 900
4 अंक 1000 9999 9000
5 अंक 10,000 9 9999 90000
Number smallest number greatest number total number in all
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