पांचांत अर्थात 5 से अन्त होने वाली संख्याओं का वर्ग
(एकाधिकेन पूर्वेण + अन्त्ययोर्दशकेऽपि से)
गुणा और वर्ग
अन्त्ययोर्दशकेऽपि के सहायता से संख्याओं का वर्ग और गुणा करना।
एकाधिकेन पूर्वेण से वर्ग:
इस सूत्र के प्रयोग से 5 से अंत होने वाली संख्याओं का वर्ग बहुत ही आसानी से किया जा सकता है।
जैसे: 5, 15, 25, 35, 45, 65, 105, 135, 125, 115, 125 आदि का वर्ग.
5 का वर्ग
05 में 'पूर्व' अंक है 0 और •0 का एकाधिक 1 होता है। इसलिए
05²
=0/5²
= 0ו0/5²
=0×1/25
=0/25
=25
Q. 15 का वर्ग
05 में 'पूर्व' अंक है 1 और •1 का एकाधिक 2 होता है। इसलिए
15²
=1/5²
= 1ו1/5²
=1×2/25
=2/25
=225
Q. 25²
25²
=2/5²
= 2ו2/5²
=2×3/25
=6/25
=625
35 में 'पूर्व' अंक है 3 और 3 का एकाधिक होता है 4। इसलिए
35²
= 3ו3/5²
=3x4/25
=1225
125 का वर्ग
125 में 'पूर्व' अंक है 12 और 12 का एकाधिक होता है 13. इसलिए 125^2 =12x13\25 =156\25 =15625
कुछ और उदाहरण--
1995^2 =199x200\25 =39800\25 =3980025
325^2 =32x33\25 =1056\25 =105625
535^2 =53x54\25 =2862\25
95^2 =9x10\25 =90\25 =9025.
35^2 =3x4\25 =12\25 =1225.
अब किसी भी एक 5 से अंत होने वाली संख्या के वर्ग पर विचार कीजिये :
25^2 =25x25 --इसमें दोनों के 'पूर्व' अंक एक ही हैं और 'अंतिम' अंक 5 और 5 हैं अर्थात अंतिम' अंक का योग 10 है.
इस प्रकार यह नियम वैसे सभी संख्याओं पर भी लागू होता है जिनमें अंतिम अंको का योग 10 हो. इसके लिए एक उपसुत्र है -----------
'अन्त्ययोर्दशकेपि' का 'प्रयोग में' अर्थ है: अंतिम वाले का योग 10 हो या 10^n हो. n प्राकृत संख्या है.
अर्थात् 10 हो, या 100,1000, या 10000 या ..... हो.
जैसे- 56x54, 102x108,157x143 651x649 ,1998x1992,1998x1002 इत्यादि में, क्रमशः 6+4=10; 2+8=10; 57+43=100; 51+49=100; 8+2=10; 998+002=1000 है.
अब इनमें एक और बात पर ध्यान दीजिये, 1998x1992 में 'पूर्व' 199 है और 'अंतिम' में 8 और 2 है, जबकि 1998x1002 में 'पूर्व' 1 है और 'अंतिम' में 998 और 002 है.
1998x1992 के गुणा पर विचार करें
दोनों के 'पूर्व' एक समान है और 'अंतिम' (जो कि 8 और 2 है ) का योग 10 है. इसलिए उपरोक्त नियम इस पर काम कर जायेगा.
'पूर्व' को, 'पूर्व' के एकाधिक (एक-अधिक) से गुणा करेंगे. यहाँ पूर्व' है 1 और 199 का एकाधिक है 200 इसलिए 199x200=39800.
'अंतिम' है 8 और 2 (जिसका जोड़ =10). 8x2 करेंगे. और इससे मिलेगा 8x2=16.
इस तरह से 1998x1992= 39800\16 =3980016.
1998x1002 के गुणा पर विचार करें
'पूर्व' है 1 और 'अंतिम' में है 998 और 002.
1 को 1 के एकाधिक से गुणा करने पर, 1x2=2 मिलता है.
अंतिम है 998और 002 (जिसका जोड़ है 1000). 998x002 =998x2 =(2000-4) =1996, किन्तु आधार 1000 है इसलिए अंतिम के गुणनफल से 6-अंक मिलना चाहिए यदि ऐसा नहीं होता है तो 0 की सहायता से 6-अंक पूरा करेंगे. इस तरह से 001996 मिला.
अतः 1998x1002 =2\003996 =2001996.
कुछ और उदाहरण:
54x56 =5x6\4x6 =30\24 =3024
43x47 =4x5\3x7 =20\21 =2021
119x111 =11x12\9x1 =132\09 =13209
125x125 =12x13\5x5 =156\25 =15625.
यह आसान है यदि आपको नही लगता है तो --- गुणा के 'उर्ध्वतिर्यक' सूत्र का प्रयोग करें. 16 सूत्रों के साथ में हमने उर्ध्वतिर्यक का एक उदाहरण दिया है उसे समझने का प्रयास करें. यदि नहीं समझ पा रहे हों तो आप comment करके बतायें. आप हमारे facebook page पर भी सवाल कर सकते हैं साथ ही उस पर आपको 11 से गुणा करने की आसान विधि मिल जायेगी.
मानस पाण्डेयः - जनवरी 24, 2018
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6 टिप्पणियां:
Unknown27 जून 2018 को 9:04 pm
294×206
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उत्तर
मानस पाण्डेयः 23 जुलाई 2018 को 5:21 pm
294x206 = [2x(2 ka ekadhik)]\(94x6) = (2x3)\(94x6) = 6\(600-36) =6\(564) = 6\0564 =60564. kyoki aadhar 100 hai isliye 'antim' me 4-digit honga.
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Unknown17 जुलाई 2019 को 8:01 pm
13×17
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मानस पाण्डेयः 18 जुलाई 2019 को 12:23 pm
नमस्कार ,
13x17 =
'पूर्व' =1, एकाधिक =2.इस प्रकार 1x2/3x7 =2/21. =221.
अतः 13x17 =221.
इसी तरह से 11x19 = 1x2/1x9 =2/09. ----ध्यान दें कि 1x9=9 आता है जबकि हमें दो अंक चाहिए अतः 09 लिखेंगे।
तब 11x19 =209 होगा।
'आधार' में जितने शून्य (0) हो, दाएं तरफ उसका दोगुना अंक चाहिए। इन दोनों में गुणा में आधार 10 था अतः दो अंकों की आवश्यकता थी.
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बुधवार, 24 जनवरी 2018
(एकाधिकेन पूर्वेण + अन्त्ययोर्दशकेऽपि से) गुणा और वर्ग
अन्त्ययोर्दशकेऽपि के सहायता से संख्याओं का वर्ग और गुणा करना.
एकाधिकेन पूर्वेण से वर्ग: इस सूत्र के प्रयोग से 5 से अंत होने वाली संख्याओं का वर्ग किया जा सकता है.
जैसे: 35, 45, 65, 135, 125, 115 आदि का वर्ग.
35 का वर्ग
35 में 'पूर्व' अंक है 3 और 3 का एकाधिक होता है 4. इसलिए 35^2 =3x4\25 =1225
125 का वर्ग
125 में 'पूर्व' अंक है 12 और 12 का एकाधिक होता है 13. इसलिए 125^2 =12x13\25 =156\25 =15625
कुछ और उदाहरण--
1995^2 =199x200\25 =39800\25 =3980025
325^2 =32x33\25 =1056\25 =105625
535^2 =53x54\25 =2862\25
95^2 =9x10\25 =90\25 =9025.
35^2 =3x4\25 =12\25 =1225.
अब किसी भी एक 5 से अंत होने वाली संख्या के वर्ग पर विचार कीजिये :
25^2 =25x25 --इसमें दोनों के 'पूर्व' अंक एक ही हैं और 'अंतिम' अंक 5 और 5 हैं अर्थात अंतिम' अंक का योग 10 है.
इस प्रकार यह नियम वैसे सभी संख्याओं पर भी लागू होता है जिनमें अंतिम अंको का योग 10 हो. इसके लिए एक उपसुत्र है -----------
'अन्त्ययोर्दशकेपि' का 'प्रयोग में' अर्थ है: अंतिम वाले का योग 10 हो या 10^n हो. n प्राकृत संख्या है.
अर्थात् 10 हो, या 100,1000, या 10000 या ..... हो.
जैसे- 56x54, 102x108,157x143 651x649 ,1998x1992,1998x1002 इत्यादि में, क्रमशः 6+4=10; 2+8=10; 57+43=100; 51+49=100; 8+2=10; 998+002=1000 है.
अब इनमें एक और बात पर ध्यान दीजिये, 1998x1992 में 'पूर्व' 199 है और 'अंतिम' में 8 और 2 है, जबकि 1998x1002 में 'पूर्व' 1 है और 'अंतिम' में 998 और 002 है.
1998x1992 के गुणा पर विचार करें
दोनों के 'पूर्व' एक समान है और 'अंतिम' (जो कि 8 और 2 है ) का योग 10 है. इसलिए उपरोक्त नियम इस पर काम कर जायेगा.
'पूर्व' को, 'पूर्व' के एकाधिक (एक-अधिक) से गुणा करेंगे. यहाँ पूर्व' है 1 और 199 का एकाधिक है 200 इसलिए 199x200=39800.
'अंतिम' है 8 और 2 (जिसका जोड़ =10). 8x2 करेंगे. और इससे मिलेगा 8x2=16.
इस तरह से 1998x1992= 39800\16 =3980016.
1998x1002 के गुणा पर विचार करें
'पूर्व' है 1 और 'अंतिम' में है 998 और 002.
1 को 1 के एकाधिक से गुणा करने पर, 1x2=2 मिलता है.
अंतिम है 998और 002 (जिसका जोड़ है 1000). 998x002 =998x2 =(2000-4) =1996, किन्तु आधार 1000 है इसलिए अंतिम के गुणनफल से 6-अंक मिलना चाहिए यदि ऐसा नहीं होता है तो 0 की सहायता से 6-अंक पूरा करेंगे. इस तरह से 001996 मिला.
अतः 1998x1002 =2\003996 =2001996.
कुछ और उदाहरण:
54x56 =5x6\4x6 =30\24 =3024
43x47 =4x5\3x7 =20\21 =2021
119x111 =11x12\9x1 =132\09 =13209
125x125 =12x13\5x5 =156\25 =15625.
यह आसान है यदि आपको नही लगता है तो --- गुणा के 'उर्ध्वतिर्यक' सूत्र का प्रयोग करें. 16 सूत्रों के साथ में हमने उर्ध्वतिर्यक का एक उदाहरण दिया है उसे समझने का प्रयास करें. यदि नहीं समझ पा रहे हों तो आप comment करके बतायें. आप हमारे facebook page पर भी सवाल कर सकते हैं साथ ही उस पर आपको 11 से गुणा करने की आसान विधि मिल जायेगी.
मानस पाण्डेयः - जनवरी 24, 2018
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Unknown27 जून 2018 को 9:04 pm
294×206
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मानस पाण्डेयः 23 जुलाई 2018 को 5:21 pm
294x206 = [2x(2 ka ekadhik)]\(94x6) = (2x3)\(94x6) = 6\(600-36) =6\(564) = 6\0564 =60564. kyoki aadhar 100 hai isliye 'antim' me 4-digit honga.
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Unknown17 जुलाई 2019 को 8:01 pm
13×17
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मानस पाण्डेयः 18 जुलाई 2019 को 12:23 pm
नमस्कार ,
13x17 =
'पूर्व' =1, एकाधिक =2.इस प्रकार 1x2/3x7 =2/21. =221.
अतः 13x17 =221.
इसी तरह से 11x19 = 1x2/1x9 =2/09. ----ध्यान दें कि 1x9=9 आता है जबकि हमें दो अंक चाहिए अतः 09 लिखेंगे।
तब 11x19 =209 होगा।
'आधार' में जितने शून्य (0) हो, दाएं तरफ उसका दोगुना अंक चाहिए। इन दोनों में गुणा में आधार 10 था अतः दो अंकों की आवश्यकता थी.
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शुक्रवार, 17 अगस्त 2018
निखिलं नवतः चरमं दशतः' सूत्र का अर्थ और गुणा(multiplication) करने में इसका प्रयोग, उदाहरण सहित।
A . गुणा करने में.
गुणा करने के और भी सूत्र हैं. इस (निखिलं नवतः चरमं दशतः) सूत्र के प्रयोग से केवल आधार (10,100,1000,10000,..अथवा उपाधार)के निकट के संख्याओं का गुणन किया जाता है.
जैसे :- 98 x 99, 94 x 86 ,93x75, 102 x 97 , 103 x 107 , -- ये सभी संख्याओं के जोड़े(pairs) 100 के निकट हैं.
आइये अब हम निखिलं विधि से गुणा करना सीखते हैं.
98 x 99 =
इस में 98 और 99 क्रमशः 100 से 2 और 1 कम हैं इसलिए इनके सामने -02 और -01 लिखा गया है.
-02 x -01 = 02 उत्तर/गुणनफल के दाएं तरफ लिखा गया है.
98-01 या 99-02 या 100-(01+02) =97 .उत्तर/गुणनफल के बाएं तरफ लिखा गया है.
और इस तरह से 98x99 = 9702.
94 x 86=
94 और 86 क्रमशः 100 से 6 और 14 कम हैं इसलिए इनके सामने -06 और -14 लिखा गया.
दाएं तरफ : -14 x -6= +84.
बाएं तरफ : 86-06 या 94-14 = 80.
अतः 94x86= 8084.
93 x 75 =
93 और 75 क्रमशः 7 और 25 अंतर रखते हैं आधार (100) से.
दाएं तरफ : -7 x -25 =175= 175 (क्योकि आधार में दो शून्य हैं इसलिए केवल दो ही अंक दाएं तरफ आ सकते हैं).
बाएं तरफ : 75-7 = 68. और 68 + 1 = 69.
इस तरह 93x75=6975.
102 x 97 =
102 आधार से 2 अधिक है, 97 आधार से 3 कम है इसलिए इनके सामने क्रमशः +2 और -3 लिखा गया.
दाएं तरफ : +2 x -3 = -06 (-6 नहीं,क्योंकि आधार 100 में दो शून्य हैं).
बाएं तरफ : 97+2 या 102-3 = 99.
दाएं ओर ऋणात्मक (negative) आने के कारण दाएं की संख्या का पूरक(06 का पूरक = 94) लिखा गया और बाएं की संख्या से 1 कम कर दिया गया.
इस तरह से 102 x 97 = 9894.
ऊपर के उदाहरणों से आप समझ गए होंगे कि --
दाएं तरफ में अंको की संख्या दो ही हो सकते हैं. यदि आधार 10 होता तो एक संख्या और यदि आधार 1000 होता तो तीन संख्या होते.
यदि दाएं तरफ अधिक अंक आ जाते हैं तो उस अंक को बाएं तरफ जोड़ दिया जाता है.
यदि दाएं तरफ ऋणात्मक आ जाये तो उसका पूरक लिखते हैं और बाएं तरफ एक घटा लिया जाता है.
103 x 107 =
103 और 107 आधार से क्रमशः 3 और 7 अधिक है इसलिए उनके सामने +03 और +07 लिखा गया है.
दाएं तरफ :+3 x +7 = 21.
बाएं तरफ : 103+7=110.
इस तरह से 103 x 107 =11021.
107 x 96 = 103/-28 = 102/72 =10272.
85 x 87 = 72/(-15 x -13)
यहाँ 15 x 13 के लिए भी 'निखिलं' से ही --दोनों आधार 10 से क्रमशः 5 और 3 अधिक हैं.
इसलिए (15+3 या 13+5=18) / (5 x 3=15 =15) अर्थात 18/15 = 195.
इस तरह से --- 72/(-15 x -13) = 72/ (195) =72/195 = 73 / 95.
अतः 85x87 = 7395.
85 x 87 या इस तरह के अन्य संख्याएँ जो किसी आधार संख्या के निकट हैं तो ---- इनका आधार से विचलन (कमी या अधिकता) तीन प्रकार का हो सकता है
1. एक (या दोनों) संख्या 10 से नीचे जैसे:- 94 x 86 में, 98 x 99 में.
इस स्थिति में दोनों संख्या का गुणा आसान है. जैसे 94 x 86 में 6 x 14= 84.अतः इसके लिए सामान्य गुणा से दायाँ पक्ष प्राप्त करें.
2. दोनों संख्या 10-20 के बीच के हों. जैसे :- 85 x 87 में -13 और -15 है.
इस स्थिति में एक बीजगणितीय सूत्र का प्रयोग करेंगे-- (10 + a )(10 + b) =(10+a)10 + (10+a)b = (10+a+b)10 + a.b
15 x 13 = (15 + 3)10 + 5x3 = 195.
17 x 18 = (17 + 8)10 + 7x8 = 250 + 56 = 306.
12 x 13 = (13 + 2)10 + 3x2 = 156.
3. एक या दोनों 20 से अधिक हों. जैसे 76 x 69 में.
इस स्थिति में 'ऊर्ध्वतिर्यग्भ्यां' सूत्र का प्रयोग करेंगे. 'ऊर्ध्वाधर और तिर्यक' का नियम इस पर लगाया जाता है.
24 x 31 = 2x3 / (2x1+ 4x3) / 4x1 = (दाएं से बाएं) 6 / 14 / 4 = (6+1) /4/4 =744.
कुछ और उदाहरण
1111x1002= 1111+2 /111x2 =1113/222 =1113222.
123 x 82 =123-18/23x(-18) =105/-414 = 104/586 =104586.
15x16 =15+6/6x5 =21/30 =21+3/0 =240.
123x114 =123+14/23x14 =137/322.
125x78 =125-22/25x(-22) =103/-550 =98/-50 =9750.
124x81 =124-19/24x(-19) =105/-456 =101/-56 =100/44 =10
अब निम्नलिखित संख्याओं के गुणनफल ज्ञात कीजिये ----
1. 65 x 103 (हल देखने के लिए details पर click करें )
Details
=103-35 / -35 x +03 =68/ -105 =67 /-05 =66 /95 =6695
2. 98 x 89
Details
3. 995 x 992
Details
=995-008/ -005 x -008 =987/040 =987040
4. 78 x 55
Details
5. 999999x999898
Details
=999999-000102/(-000001)x(-000102) =999897/000102 =999897000102
अब आते हैं 'उप-आधार' के निकट के संख्याओं का इस विधि से गुणन पर.
10,20,30,40,50 ...ये सब 10 के गुणज(multiple) हैं.
10,20,50 ये सब 100 के गुणनखंड(factor) हैं.
200, 100 का गुणज भी है और 1000 का गुणनखंड भी है.
ऊपर ये जो गुणज और गुणनखंड हैं वह अपने संगत आधार संख्या से बने उप -आधार हैं.
52 x 53=
यहाँ पर दोनों संख्या 50 के निकट हैं. इसे दो तरह से बना सकते हैं --
50 को 10 का गुणज(10x5) मानते हुए.
52 और 53, 50 से क्रमशः +2 और +3 विचलन पर हैं.
इसलिए दायाँ पक्ष होगा -- +2 x +3 =6 (06 नहीं ).
बायाँ पक्ष होगा -- 52 +3 या 53+2 या 50+(2+3) =55.किन्तु 50 आधार 10 का पाँच गुणा है इसलिए 55x 5 =275
अतः गुणनफल = 275/6 =2756.
50 को 100 का गुणनखंड (100/2=50) मानते हुए.
52 और 53, 50 से क्रमशः +02 और +03 विचलन पर हैं.
इसलिए दायाँ पक्ष -- +02 x +03 = 06 (केवल 6 नहीं )
बायाँ पक्ष -- 55. किन्तु 50, आधार 100 का आधा (1/2) है.इसलिए 55/2 = 27 + 1/2
याद कीजिये की जब कभी दाएं तरफ ऋणात्मक आता था तब बाएं से 1 निकलकर दाएं जाता था 1x 100 (=100) बनकर. (यदि आधार 100 हो तो ).
इसी तरह 1/2 (पूर्ण संख्या न होने के कारण) 1/2 x 100 (=50) बनकर दाएं जायेगा.
अतः गुणनफल = (27 + 1/2)/06 = 27/(50 +06 ) =27 /56 =2756.
49 x 55 =
उपाधार = 50 (=100/2).
उपाधार से विचलन -1 और +5.
दायाँ पक्ष-- -1 x +5 = -05 (केवल -5 नहीं).
बायाँ पक्ष -- 49+5 या 55 -1 =54. किन्तु उपाधार 50, आधार 100 का आधा (1/2) है.इसलिए 54/2 =27.
अतः गुणनफल =27/ -05 =26/95.
49 x 54 =
उपाधार = 50 (=100/2).
विचलन -1 और +4
दायाँ पक्ष -- -1 x 4 = -04.
बायाँ पक्ष -- 49+4 या 54-1 =53. किन्तु आधा करने पर, 26 + 1/2. अतः गुणनफल = (26+ 1/2)/ -04 =26/(50-04) =26/46. =2646.
ध्यान दीजिये यहाँ पर 04 का पूरक लिखने की आवश्यकता नहीं पड़ी (जैसा कि पिछले में) क्योंकि 1/2 ने ही इसे ऋणात्मक से धनात्मक बना दिया.
541x502= 541+02/41x2 =543/82 =271582.(नीचे देखें)
अगर हमने इसे 100 के गुणज के रूप में मानें तो दायाँ पक्ष ठीक है और बायाँ पक्ष को 5 गुना करना होगा. इसलिए 2715 /82 =271582 .
अगर इसे 1000 के उपगुणज मानें तो दायाँ पक्ष 082 होगा और बायाँ पक्ष को दो से भाग देना होगा.इसलिए 271 +1/2 /082 =271/500+82 =271/582 =271582.
इस सूत्र की सहायता से सभी संख्याओं का गुणा नहीं किया जा सकता है किन्तु कुछ संख्याओं के साथ अवश्य ही किया जा सकता है. कुछ अन्य उदाहरण देखें -----
103 x 204 =103x (100+104) =103x100 +103x104 =10300 +10712 =21012.
9998 x 10002 =9998+2/ -0002x0002 =10000/-0004 =9999/9996 =99959984. (ध्यान दीजिये -0004 का पूरक सीधे सूत्र से लिखेंगे.)
अतः आप अब इस सूत्र से परिचित हो चुके हैं और निखिलं विधि से गुणा करना भी सीख चुके हैं. अपने विवेक से आप अनेक स्थानों में इस विधि का प्रयोग कर सकते हैं.
आप comment कर अपने विचार/ सुझाव साझा कर सकते हैं.बहुत जल्द ही आपको अगला पोस्ट मिल जायेगा। जुड़े रहने के लिए अथवा सूत्र से संबंधित प्रश्न पूछने के लिए facebook page पर जाएँ।
निखिलं सूत्र से भाग करने के लिए यहाँ click करें.
पाठकों को धन्यवाद
मानस पाण्डेयः - अगस्त 17, 2018
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14 टिप्पणियां:
Unknown10 सितंबर 2018 को 9:44 pm
इस टिप्पणी को ब्लॉग के किसी एडमिन ने हटा दिया है.
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Unknown27 जुलाई 2019 को 3:12 pm
94×92
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Unknown19 सितंबर 2019 को 9:20 am
1002*1003*1101
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Unknown23 अक्तूबर 2019 को 2:21 pm
18*9
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Ask vishnoi19 नवंबर 2019 को 8:00 pm
124÷89
406÷9
298÷96
1358÷113
1234÷112
306÷8
इनके सभी को निखीलम विधी द्वारा करके समझाइए
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Unknown20 दिसंबर 2019 को 12:13 pm
14×11
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Unknown18 फ़रवरी 2020 को 2:19 pm
14×7
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Unknown27 फ़रवरी 2020 को 11:43 am
13*17=?
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उत्तर
मानस पाण्डेयः 3 मार्च 2020 को 5:49 pm
13*17
चूंकि 3+7=10 होता है और दोनों का पूर्व अंक एक समान है।अतः यह सूत्र लगाया जा सकता है।
1*(1 का एकाधिक)/ 3*7
= 1*2 / 21
= 2/21
=221
(ध्यान दें कि ये 👉 '/' भाग को निरूपित नहीं करता है )
जवाब दें
Unknown22 जुलाई 2020 को 11:11 am
102×98 निखीलम विधि से हल
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उत्तर
Nilesh7 अगस्त 2020 को 6:34 pm
102(+2)
98 (-2)
100/-4
100-1/100-4
99/96
Ans-9996
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Nilesh7 अगस्त 2020 को 6:36 pm
1004×988=?
Please answer in detail
जवाब दें
उत्तर
मानस पाण्डेयः 10 अगस्त 2020 को 5:29 pm
1004 (+4)
988 (-12)
-------------------
992 / -48
= 991 / (1000-48)
= 991 / 952
= 991952 ✔️
ध्यान दें कि 1000-48 आप निखिलम् सूत्र के प्रयोग से ही मन में ही निकाल सकते हैं। 952.
जवाब दें
gss16 अगस्त 2020 को 11:43 pm
49 x 55 =
• उपाधार = 50 (=100/2).
• उपाधार से विचलन -1 और +5.
• दायाँ पक्ष-- -1 x +5 = -05 (केवल -5 नहीं).
• बायाँ पक्ष -- 49+5 या 55 -1 =54. किन्तु उपाधार 50, आधार 100 का आधा (1/2) है.इसलिए 54/2 =27.
• अतः गुणनफल =27/ -05 =26/95.
श्री मान् जी हमें =27/-05=26/95 कैसे निकला थोड़ा विस्तारपूर्वक बताने का कष्ट करेगें sangwangautam@gmail.com
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शुक्रवार, 20 जुलाई 2018
वैदिक गणित का दूसरा सूत्र : 'निखिलं सूत्र'
निखिलं नवतश्चरमं दशतः
वैदिक गणित का यह दूसरा सूत्र है.
इस सूत्र का अर्थ स्पष्ट है (निखिलं नवतः चरमं दशतः) सभी को 9 से ,अंत वाले को 10 से.
इस सूत्र का आधारभूत(basic) प्रयोग है :- किसी संख्या का पूरक(complement) ज्ञात करने में. बाद में इस पूरक का ही बड़ा उपयोग है जैसे - गुणा और भाग करने में और रेखांक (vinculum )ज्ञात करने में.
95 का पूरक होगा : 100-95 =05. 73 का पूरक होगा: 100-73=27. 123 का पूरक होगा : 1000-123=877. 459 का पूरक होगा:1000-459=541.
545351326 का पूरक होगा: 1000000000-545351326 = 454648674.
उपरोक्त (निखिलं) सूत्र के प्रयोग से बहुत ही सरलता से पूरक ज्ञात किया जाता है:--
बाएं से दाएं (left to right ) के ओर किसी संख्या के प्रत्येक अंक को 9 से और अंतिम वाले अंक को 10 से घटाते हैं, और इस तरह उस संख्या का पूरक मिल जाता है. (यह काम मन में किया जाता है आपको कागज कलम की आवश्यकता नहीं .)
जैसे :- 53 का पूरक = 47 .
545351326 का पूरक = 454648674
अब आते हैं पूरक के उपयोग पर और निखिलं सूत्र के उपयोग पर :----
A . गुणा करने में.
B . भाग करने में.
C . रेखांक (vinculum) ज्ञात करने में.
मानस पाण्डेयः - जुलाई 20, 2018
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सोमवार, 16 अप्रैल 2018
आंकिक योग DIGITAL SUM
वैदिक आंकिक योग (vedic digital sum or digital root)
आंकिक योग क्या है?
शाब्दिक अर्थ पर जाएँ तो आंकिक योग का मतलब है--- 'अंको का योग' .
किसी संख्या के अंकों का योग उस संख्या का आंकिक योग कहलाता है. यह आंकिक योग केवल एक ही अंक का हो सकता है और यदि यह एक से अधिक अंक का हो तो उन अंकों को फिर से जोड़कर एक अंक का बना लिया जाता है.(75 का आंकिक योग 7+5= 12, किन्तु दो अंक हैं इसलिए 1+2=3.)
इसे मूलांक अथवा बीजांक भी कहा जाता है. (मूल=बीज= Root)
**हम यहाँ पर 'बीजांक' शब्द का प्रयोग करेंगे.
उदाहरण: 531 का बीजांक होगा 5+3+1 = 9.
172654 का बीजांक होगा --- 1+7+2+6+5+4 = 25 और 25 से 2+5 = 7.
83564239 का बीजांक होगा --- 8+3+5+6+4+2+3+9 = 40 ; 4+0 = 4.
54321 का बीजांक होगा --- 5+4+3+2+1 = 15 ; 1+5 =6.
बीजांक ज्ञात करते समय '9' को 0 के समतुल्य माना जाता है. क्यों?
(क) 9+5 =14 और फिर, 1+4 =5. (ख) 9+6 =15; 1+5 =6.
(ग) 9+2 =11; 1+1 =2. (घ) 9+3 =12; 1+2 =3. (ङ) 9+8 =17; 1+7 =8.
(च) 9x5 =45; 4+5 =9. (छ) 9x6 =54; 5+4 =9. (ज) 9x7 =63; 6+3=9.
हम जानते हैं कि 9 से विभाज्य सभी संख्याओं के अंकों को योग भी 9 से विभाज्य होता है.
अब हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं की इन सभी उदाहरणों में यदि 9 के स्थान पर 0 होता तो भी बीजांक में कोई बदलाव नहीं आता.
[[[*घटाव संक्रिया में भी बीजांक ज्ञात करते समय 9 को 0 मान सकते हैं किन्तु बीजांकों के घटाव के समय ॠणात्मक आने की स्थिति में उसको 9 में जोड़ दें.
जैसे: 5409-3236 = 2173 बीजांक के रूप में; 0-5 =-5 होगा लेकिन ये ऐसी स्थिति में -5+9 = 4 होगा.अतः 4=4.
**भाग संक्रिया (division) में बीजांक का प्रयोग गलत हो जाता है.
जैसे: 106/2 = 53. लेकिन इन सबका बीजांक लिखने पर 7/2 = 8 जोकि गलत हो जाता है.]]]
इस तरह से 9 को 0 मान लिया जाता है.
इसका एक और कारण यह हो सकता है कि --किसी संख्या को 9 से भाग देने पर उतना ही शेषफल हो सकता है जितना कि उस संख्या का बीजांक हो.अब यदि किसी संख्या को 9 से भाग दे रहे हैं तो उसका शेषफल 9 न होकर 0 ही होगा.
बीजांक ज्ञात करने का सही तरीका
56932554147 का बीजांक ज्ञात करना है.
[5+6=11,1+1=2]; [2+9=2+0=2]; [2+3=5]; [5+2=7]; [7+5=12,1+2=3]; [3+5=8]; [8+4=12,1+2=3]; [3+1=4]; [4+4=8]; [8+7=15, 1+5=6].
यह जितना कठिन दिख रहा है उतना है नहीं, एक बार जरूर प्रयास करें समझने का. और यदि फिर भी यह अच्छा न लगे तो सभी अंको को जोड़कर फिर बीजांक ज्ञात करें.
अतः इस संख्या का बीजांक 6 है.
दूसरा तरीका --- 9 के योग को हटा लें.
यहाँ पर 9 को 0 माना गया है और अन्य अंकों के युग्म जो 9 का योग बनाते हैं(एकसमान रंग वाले) को भी 0 बना दिया गया और इस तरह से केवल 5 और 1 बची.
5+1=6 है दी गयी संख्या का बीजांक.
बीजांक के उपयोग
जैसा की हमने पहले भी बताया कि जोड़,घटाव, और गुणा, इन तीनों संक्रियाओं में बीजांक के द्वारा हम परिणाम की सत्यता की जाँच कर सकते हैं.
जैसे: 56x53 =2968 बीजांक द्वारा-- वाम पक्ष(LHS) =2x8 =16, 1+6=7. और दायाँ पक्ष(RHS) =7.
82x65 =4810; LHS=1 x 2 =2. RHS=4. यहाँ पर दोनों पक्ष एकसमान नहीं हैं इसलिए यह स्पष्ट रूप में कहा जा सकता है कि गुणा गलत है.
(लेकिन यदि यहाँ LHS=RHS बीजांक होता तो यह संभव है की गुणा सही है)
**यदि 56x53 =2698 लिखा हो तो भी बीजांक विधि से यह सत्य प्रतीत होगा किन्तु यह सत्य नहीं है, इसलिए यहाँ सावधानी की आवश्यकता होती है.
यहाँ ज्यादा उदाहरण नहीं दिया जा रहा है . सिर्फ इतना ध्यान रखें कि--
दो या दो से अधिक संख्याओं का जोड़, घटाव या गुणा के परिणाम का बीजांक उतना ही होगा जितना कि उन दो या दो से अधिक संख्याओं के बीजांकों का योग, अंतर या गुणनफल हो.
बहुत से बहु विकल्पीय प्रश्नों के उत्तर का अनुमान लगाने में यह बीजांक बहुत उपयोगी हो सकता है. (हालांकि इसकी अपनी सीमाएं हैं.)
आशा है आप यह सब समझ गए होंगे. यदि कोई परेशानी हो इस विषय से सम्बंधित तो आप comment कर बताएं. आप हमारे facebook पेज fb.me/vedicmathsinhindi पर भी सम्बंधित प्रतिक्रिया दे सकते हैं.
मानस पाण्डेयः - अप्रैल 16, 2018
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बुधवार, 28 फ़रवरी 2018
वैदिक गणित के प्रयोग से विभाज्यता का जाँच करना
(वेष्टनम् + एकाधिकेन पुर्वेण) से विभाज्यता जाँच करना
[ Number theory से ------ पूर्णांक (integer)a पूर्णांक b को विभाजित करती है या पूर्णांक b,पूर्णांक a से विभाज्य है ऐसा तब कहा जाता है जब कोई अन्य पूर्णांक q प्राप्त किया जा सके जिसके लिए b=a.q हो.
इसे a|b से निरुपित करते हैं. जिसका मतलब: a ,b को विभाजित करती है.( a divides b).
जैसे: 20 =5.q हो सकता है यदि q=4 हो. साथ ही 20 =(-5).q हो सकता है यदि q= -4 हो.
इस उदाहरण में देख सकते है कि 20 5से विभाज्य है साथ ही -5 से भी विभाज्य है.
*कोई संख्या -a से विभाज्य है तो वह a से भी विभाज्य होगी;
** 0 किसी भी पूर्णांक से विभाज्य है (शुन्य को छोड़कर). a|0 कोई भी पूर्णांक a किन्तु a का मान 0 न हो.]
विभाज्यता या विभाजनीयता (divisibility) के बारे में आप सामान्य रूप से किसी संख्या की 2से, या 3, 4, 5, 6, 8, 9,10, 11,18,22से विभाज्यता है या नहीं ,यह जानते होंगे.
वैदिक विधि की शुरुआत करने से पहले हम इन सामान्य नियमों को देख लेते हैं----
2 से विभाज्यता
सभी सम संख्याएं(even numbers) अर्थात् जिन संख्याओं के अंतिम अंक 0,2,4,6 या 8 हो वे सभी 2 से पूर्णतः विभाज्य(divisible) होती हैं.
3 से विभाज्यता
किसी संख्या के अंकों का योग यदि 3 से विभाज्य हो तो वह संख्या 3 से विभाज्य होगी.
जैसे-123456 का आंकिक योग है = 1+2+3+4+5+6 = 21 इसलिए स्पष्ट है कि 123456, 3 से विभाज्य है.9865632095845 का आंकिक योग है=7.
4 से विभाज्यता
जिन संख्याओं के अंतिम दो अंक 4 से विभाज्य हो वे सभी संख्याएँ 4 से विभाज्य होती हैं. साथ ही यदि किसी संख्या के अंतिम दो अंक 00 हो तो वह भी 4 से विभाज्य होती है.
जैसे - 104, 144, 583456, 12900, 1000, 240000 इत्यादि 4 से विभाज्य हैं.
5 से विभाज्यता
जिन संख्याओं के अंत में 5 या 0 हो वे सभी 5 से विभाज्य होती हैं.
6 से विभाज्यता
6=2x3 इसलिए यदि कोई संख्या 2 और 3 , दोनों से विभाज्य हो तो वह 6 से भी विभाज्य होगी. अर्थात 3 से विभाज्य प्रत्येक सम संख्या, 6 से भी विभाज्य होगी.
8 से विभाज्यता
जिन संख्याओं के अंतिम तीन अंक 8 से विभाज्य हो वे संख्याएँ 8 से विभाज्य होती हैं. साथ ही जिनके अंतिम तीन अंक 000 हों वह भी विभाज्य होती है.
जैसे-- 108768, 768 8 से विभाज्य है इसलिए 108768 8 से विभाज्य है.
140000 8 से विभाज्य है.
9 से विभाज्यता
यदि किसी संख्या के अंको का योग 9 से विभाज्य हो तो वह संख्या 9 से विभाज्य होगी.
जैसे- 7894125 का आंकिक योग =7+8+9+4+1+2+5 =36 है इसलिए यह 9 से विभाज्य है.
10 से विभाज्यता
किसी संख्या के अंत में 0 हो तो वह 10 से विभाज्य होगी.
11 से विभाज्यता
यदि किसी संख्या के सम एवं विषम स्थानों पर स्थित अंकों का योग क्रमशः एक दुसरे के बराबर हो या फिर उनका अंतर 11 से विभाज्य हो तो वह संख्या 11 से विभाज्य होगी.
156987542107 में s1 =1+6+8+5+2+0 =22; s2 =5+9+7+4+1+7 =33 देख सकते है कि 33-22 =11 है जो कि 11 से विभाज्य है.
***यदि आप वैदिक आंकिक योग का प्रयोग करते हैं तो यह अंतर 0 या 2,4,6,8 में से कोई आने पर वह संख्या 11 से विभाज्य होगी.
[वैदिक आंकिक योग से s1 = 4 और s2 = 6; इसलिए अंतर 2 होगा.]
12 से विभाज्यता
वह संख्या जो 4 और 3 दोनों से विभाज्य है, 12 से विभाज्य होगी.
जैसे - 1561356 के अंतिम दो अंक 56, 4 से विभाज्य है.साथ ही दिए हुए संख्या का आंकिक योग=9, 3 से विभाज्य है. इसलिए संख्या 12 से विभाज्य है.
15 से विभाज्यता
3 और 5 दोनों से विभाज्य संख्या, 15 से भी विभाज्य होगी.
16 से विभाज्यता
अंतिम चार अंक यदि 16 से विभाज्य हो तो संख्या भी 16 से विभाज्य होगी.
18 से विभाज्यता
9 से विभाज्य प्रत्येक सम संख्या 18 से विभाज्य होगी.
22 से विभाज्यता
11 से विभाज्य प्रत्येक सम संख्या 22 से विभाज्य होगी.
अब वैदिक विधि पर आते हैं
यहाँ पर एक नया पद(term) आएगा आश्लेषक (osculator).इसलिए पहले इसके बारे में जान लेते हैं--
वैदिक सूत्र वेष्टनम् के प्रयोग से विभाज्यता की जाँच की जाती है तथा जिस प्रक्रिया से यह जाँच होता है उसे तकनीकी भाषा में आश्लेषण (या वेष्टन, osculation) कहते हैं.
जिस संख्या की सहायता से आश्लेषण किया जाता है उसे आश्लेषक कहते हैं.
आश्लेषक दो प्रकार के होते हैं- 1.धनात्मक आश्लेषक 2. ऋणात्मक आश्लेषक.
सिर्फ 1,3,7,9 से अंत होने वाली संख्याओं से विभाज्यता की जाँच, इस विधि द्वारा की जा सकती है.
किसी सम संख्या या 5 से अंत होने वाली संख्या के लिए आश्लेषक नहीं होता है.
हम धनात्मक आश्लेषक के लिए 'p' और ऋणात्मक आश्लेषक के लिए 'n' , चिन्हों का प्रयोग करेंगे.
आश्लेषक(osculator) कैसे ज्ञात करते हैं?
धनात्मक आश्लेषक (p) : 9 से अंत होने वाली संख्याओं का धनात्मक आश्लेषक होता है, जैसे 19, 29, 39, 49, 59, ...139, 149,...आदि के आश्लेषक. और इसे एकाधिकेन पूर्वेण से ज्ञात करते हैं.
19 के लिए p = ? 19 में पूर्व है 1. और 1 का एकाधिक होगा 2. इसलिए 19 का आश्लेषक है p=2.
49 के लिए p = 4 का एकाधिक =5. [एकाधिक = एक अधिक ]
69 के लिए p = 6 का एकाधिक =7.
179 के लिए p = 18.
ऋणात्मक आश्लेषक (n) : 1 से अंत होने वाली संख्याओं का ऋणात्मक आश्लेषक होता है, जैसे 11,21,31,41,51,....81,..,191,...आदि के आश्लेषक. इसमें पूर्व अंक को बिना किसी बदलाव के आश्लेषक मान लेते हैं.
21 का n = 2; 31 का n =3; 41 का n = 4; 141 का n =14;
कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:-
3 से अंत होने वाली संख्या में क्रमशः 7 और 3 गुणा कर दें तो 1 और 9 से अंत होने वाली संख्या मिल जाएगी.
7 से अंत होने वाली संख्या में क्रमशः 3 और 7 गुणा कर दें तो 1 और 9 से अंत होने वाली संख्या मिल जाएगी.
साथ ही 1 और 9 से भी अंत होने वाली संख्याओं में क्रमशः 9 और 1 से गुणा कर दें तो 9 और 1 से अंत होने वाली संख्या मिल जाएगी.
इन तीनो बिन्दुओं से पता चलता है कि 1,3,7,या 9 किसी भी अंक से अंत करने वाले संख्या का p और n दोनों होगा.
अगर X का दोनों आश्लेषक p और n हैं तो p+n=X होगा.
दोनों आश्लेषकों में जो छोटा होगा हम उसी का प्रयोग करेंगे. अगर X का एक आश्लेषक पता है तो दूसरा X में से घटा कर निकाल सकते हैं.
उदाहरण:- 7 का आश्लेषक क्या होगा?
हल:- 7x7=49,इसलिए 7 का p=(4 का एकाधिक) =5 होगा.
और दूसरा 7x3=21,इसलिए 7 का n=2 होगा.
यहाँ स्पष्ट है कि p+n=7.
उदाहरण:- 29 का आश्लेषक क्या होगा?
हल:- 29 का p = 3 [और n=X -p= 29-3=26.]
उदाहरण:- 37 का आश्लेषक क्या होगा?
हल:- 37x3=111 इसलिए n=11 होगा.
आश्लेषण(osculation) कैसे होता है ?
p के द्वारा -- abcde का p से आश्लेषण करेंगे तो होगा: abcd + e.p
n के द्वारा -- abcde का n से आश्लेषण करेंगे तो होगा: abcd - e.n
इसे एक उदाहरण से समझते हैं.
उदाहरण: 63, 7 से विभाज्य है या नहीं ?
हल: 7 का p =5;
63 का आश्लेषण : 6+ 3x(p) =6+3x5 =21
21 का आश्लेषण :2+1x5 =2+5=7.
हम देख रहे हैं की आश्लेषण करने के बाद 21 आया जो की 7 भाज्य है और फिर 21 का भी आश्लेषण कर देने पर 7 ही आ गया. इसलिए 63 7 से विभाज्य है.
निम्नलिखित संख्याओं की 7 से विभाज्यता जांचते हैं
(धनात्मक आश्लेषक p=5) :---
(1). 1435 : 143+ 5x5 =168; 168 : 16+8x5 =56 (56 7 से विभाज्य है, इसलिए हां, 1435 7 से विभाज्य है.)
(2). 55277838 : 5527783+8x5 = 5527823
5527823 : 552782+3x5 =552797
552797 : 55279+7x5 =55314
55314 : 5531+4x5 =5551
5551 : 555+1x5 =560
560 : 56+0x5 =56 देख सकते हैं की 56 आया जो की 7 से भाज्य है.
(ऋणात्मक आश्लेषक n=2) :---
(1). 1435 : 143-5x2 =133; 133 : 13-3x2 =7. (अतः 1435, 7 से विभाज्य है)
(2). 55277838 : 5527783-8x2 =5527767
5527767 : 552776-7x2 =552762
552762 : 55276-2x2 =55272
55272 : 5527-2x2 =5523
5523 : 552-3x2 =546
546 : 54-6x2 =42 देख सकते हैं की 42 7 से भाज्य है.अतः दी गई संख्या भी 7 से भाज्य है.
हो सकता है कि आपको इससे आसान 7 से भाग देना ही लग रहा हो लेकिन जब बात 29 की आये तो .......... . चलिए अब देखते हैं की कोई संख्या 29 से विभाज्य है या नहीं.
उदाहरण:- 22567821, 29 से विभाज्य है या नहीं?
हल:- 29 का p = 3
क्रमवार आश्लेषण होगा: 22567821, 2256785, 225693, 22578, 2281, 231, 26 स्पष्ट है कि 26, 29 से विभाज्य नहीं है.अतः दी गई संख्या भी 29 से विभाज्य नहीं है.
उदाहरण:- 6952135, 31से विभाज्य है या नहीं?
हल:- 31 का n =3
क्रमवार आश्लेषण होगा: 6952135, 695198, 69495, 6936, 675, 52
स्पष्ट है की 52, 21 से विभाज्य नहीं है. दी गई संख्या भी 31 विभाज्य नहीं है.
अगर आप इसे समझ गए है तो फिर आश्लेषण की और आसान विधि है उसे देखिये -----------
आश्लेषण की आसान विधि
हमने पहले 55277838 की 7 से विभाज्यता जाँच करने के लिए धनात्मक आश्लेषक p=5 का प्रयोग किया था. (ऊपर में देख लीजिये)
अब नए तरह से....
सबसे दायें के 8 को 5 से गुणा कर उसमें बाएं का 3 जोड़ दीजिये.5x8+3=43.
अब 43 का आश्लेषण कर उसमें (3 के बाएं का) 8 जोड़ दीजिये.(4+5x3)+8= 5x3+4+8= 27.
27 का आश्लेषण कर, (8 के बाएं का) 7 उसमें जोड़ दीजिये.7x5+2+7=44.
44 का आश्लेषण कर, 7 जोड़ दीजिए.5x4+4+7= 31.
31 का आश्लेषण कर, 2 जोड़ दीजिये.1x5+3+2= 10.
10 का आश्लेषण कर,5 जोड़ दीजिये.0x5+1+5= 06.
6 या 06 का आश्लेषण कर ,5 जोड़ दीजिये.6x5+0+5= 35.
अब कोई भी अंक नहीं बचा है जोड़ने के लिए इसलिए हम रूक जाते हैं.अंततः हमें 35 मिला जो की 7 से विभाज्य है, अतः दी गई संख्या भी 7 से विभाज्य है.
यह एक लाइन में ही बन सकता है ...........इस प्रकार...
नए तरह से ....(ऋणात्मक आश्लेषक द्वारा)---
n=2 का प्रयोग करें तो थोड़ा जटिल कार्य होगा इसलिए हम n= -2 का प्रयोग करेंगे.
8 को -2 से गुणा कर 3 जोड़ देंगे 8x(-2) +3 = -13.
-13 का -2 से आश्लेषण कर, 8 जोड़ दीजिये. [(-1)+ (-3)x(-2)] + 8=13.
13 का -2 से आश्लेषण कर,7 जोड़ दीजिये. 3x(-2)+1+7=2.
2 या 02 का -2 से आश्लेषण कर,7 जोड़ दीजिये. 2x(-2)+0+7= 3.
3 का -2 से आश्लेषण कर, 2 जोड़ दीजिये.3x(-2)+0+2= -4.
-4 का -2 से आश्लेषण कर, 5 जोड़ दीजिये. (-4)x(-2)+0+5= 13.
13 का -2 से आश्लेषण कर, 5 जोड़ दीजिये 3x(-2)+1+5=0.
0 आया जो कि 7 से विभाज्य है अतः दी गई संख्या भी 7 से विभाज्य है.
एक लाइन में--
4 के ऊपर रेखा का मतलब -4 है और इसे रेखांक 4 कहते हैं.इसी तरह 2 और 13 भी रेखांक हैं जो क्रमशः -2 और -13 बताते हैं.
हमने कम से कम शब्दों में यह जानकारी आप तक पहुँचाने का प्रयास किया है. हमें आशा है कि आपको सब समझ में आ गया होगा और अब आप इस विधि का प्रयोग करेंगे.
*यदि आपको समझने में कोई परेशानी हो या हमारे लेखन में आप कोई कमी देखते हैं तो कृपया comment कर बतायें. आप हमारे facebook page पर भी अपनी प्रतिक्रिया दे सकते है.
--------0000000-------
We will discuss the following techniques in this chapter:
(a) Squaring of numbers ending with 5.
(b) Squaring of numbers between 50-60.
(c) Multiplication of numbers with a series of 9’s
(d) Multiplication of numbers with a series of 1’s
(e) Multiplication of numbers with similar digits in the multiplier.
(f) Subtraction using the rule ‘All from 9 and the last from 10’
(a) Squaring of numbers ending with ‘5
(Q) Find the square of ab
a b
× a b
a(a+1) /b×b
(Q) Find the square of 65
6 5
× 6 5
6 (6+1)/ 5 × 5
42 / 25
इस नियम को हम एकाधिकेन नियम के नाम से भी जानते हैं आई एम एकाधिकेन पूर्वेण के द्वारा ऐसे ज्ञात करते हैं।
a b
× a b
a(•a) / b×b
(Q) Find the square of 65
2 5
× 2 5
2 (•2) / 5 × 5
2×3 / 25
6/25
Example
(1)
_______
↓ ↓
5 + 1 + 7 + 29
↑_______↑
= 12 + 30
= 42
(2)
________
↓ ↓
26 + 3 + 4 + 37
↑_______↑
= 30 + 30
= 60
(3)
__________
↓ ↓
13 + 21 + 7 + 27
↑_______↑
= 20 + 48
= 68
(4)
________
↓ ↓
28 + 23 + 24 + 13
= 20 + 8 + 20 + 3 + 20 + 4 + 10 + 3
= 20 + 20 + 20 + 10 + 8 + 3 + 4 + 3
= 70 + 18
= 88
= 60
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सोमवार, 22 जनवरी 2018
एकाधिकेन पूर्वेण: भिन्नों को दशमलव में बदलने के लिए (2)
भाग-2 (part-2)
यह पोस्ट है एकाधिकेन पूर्वेण >भिन्नों के दशमलव प्रसार >भाग-2. अगर आपने भाग-1 नहीं पढ़ा है तो पहले उसे ही पढ़िए.
C. उन भिन्नों का दशमलव प्रसार जिनके हर(Denominator) का अंतिम अंक 7 हो
जैसे:- 1/17, 1/27, 1/37, 1/127, 324/327, 1/19997
1/137 = ?
हर(Deno.) में पूर्व अंक है 13 जिसका एकाधिक होगा 4 इसलिए सहायक भिन्न होगा: 0.1/14
आवश्यक बात : 'हर' का अंतिम अंक है 7, जो कि 9 से दो कम है इसलिए प्रत्येक बार (अगला) भाज्य के लिए RQ + 2Q या फिर ,7 10 से 3 कम है इसलिए RQ''' या R(3Q)
नोट:- 'अगला भाज्य' के लिए दोनों तरीके से कार्य करके दिखाया गया है.
0. लिखने के बाद 1 को 14 से भाग देने पर, Q=0 और R=1. (इसे लिखेंगे 10)
अगला भाज्य होगा 10; [RQ + 2Q = 10x1+2x0 या RQ'''=1(3x0)=10=10 ]
10 को 14 से भाग देने पर, Q = 0 और R =10. (इसे लिखेंगे 100)
अगला भाज्य होगा 10(3x0) =100=100; इसे 14 से भाग देने पर, Q=7 और R=2 (इसे लिखेंगे 27)
अगला भाज्य होगा 2(3x7)=2(21)=10x2 +21 = 41 [याद कीजिये, RQ=10R+Q] 41 को 14 से भाग देने पर, Q=2 और R=13 (इसे लिखेंगे 132)
अगला भाज्य होगा 132 + 2x2 =136 [RQ+2Q]; इसे 14 से भाग देने पर, Q=9 और R=10 (इसे लिखेंगे 109)
अगला भाज्य होगा =127 [RQ'''] इसे 14 से भाग देने पर, Q=9 और R=1 (इसे लिखेंगे 19)
अगला भाज्य होगा =37 .......
इस तरह से 1/137 = 0.00729927....
अब एक बात पर ध्यान दीजिये कि यदि 'हर' 17 या 27 या 37 या ... अर्थात पूर्व का अंक छोटा हो तो हर को 7 से गुणा करके हर का अंतिम अंक 9 बनाया जा सकता है लेकिन अंश(numerator) में भी 7 से गुणा करना पड़ेगा.
जैसे - 1/17 = 7/119 या 1/27 = 7/189. हाँ पर इस तरह से 1/27=7/189 का पूर्व 18 बन जायेगा और उसका एकाधिक 19, मतलब कि 19 से प्रत्येक बार आपको भाग देना पड़ेगा (मुश्किल नहीं है). और जब 'हर' का अंतिम अंक 9 हो तब तो आपको पता ही है कि कितना आसान है दशमलव प्रसार करना. (यदि नहीं पता है तो भाग 1 देखिये).
D.उन भिन्नों का दशमलव प्रसार जिनके 'हर'(Deno.) का अंतिम अंक 6 हो.
जैसे:- 1/16, 25/26, 16585/19996 इत्यादि.
1/16 को हम लिख सकते हैं 3/48 और जब अंतिम अंक 8 हो तो दशमलव प्रसार कैसे करें यह भाग-1 में बताया गया है.
इसी तरह से छोटे-छोटे हरों वाले भिन्न जिनके हरों के अंतिम अंक 6 हो उनमें 3 से गुणा कर उन्हें 8 से अंत होने वाले हरों ,वाले भिन्नों में बदला जा सकता है.
55/56 का दशमलव प्रसार करना है :
सहायक भिन्न होगा: 5.5/6
0. लिखने के बाद 55 में 6 से भाग देने पर Q=9 और R= 1 (इसे लिखेंगे 19 ).
अगला भाज्य होगा:46 [19 + 3x9 =46] या [19''''= 1(4x9) = 1x10+36 =46] और 46 को 6 से भाग देने पर Q=8 और R= -2 (इसे लिखेंगे -28)
अगला भाज्य होगा: 12 [कैसे?] इसे 6 से भाग देने पर, Q=2 और R=0 ( इसे लिखेंगे 02)
फिर अगला भाज्य होगा: 8 [कैसे ?] इसे 6 से भाग देने पर, Q=1 और R=2 (इसे लिखेंगे 21)
अगला भाज्य होगा: 24; 6 से भाग देने पर, Q=4 और R=0 (इसे लिखेंगे 04)
---------------------------------------
--------------
जितने अंक चाहिए उतना भाग देते रहें.
इस तरह से 55/56 = 0.19 -28 02 21 04 .....होगा.
E. उन भिन्नों के दशमलव प्रसार जिनके 'हर' का अंतिम अंक 5 या 4,3,2,1 हो.
नोट:- यहाँ पर जो भी बताया जायेगा वह अधुरा होगा और जिसका शेष भाग आवर्ती दशमलव भिन्न वाले पोस्ट में लिखा जायेगा.
5 से अंत हो:
जैसे- 24/25, 163/165, 1895/1331.
ऐसे भिन्नों के हरों में 5 से भाग देने पर हर के अंत में 1 या 3 या 5 या 7 या 9 आ जायेगा.
अंश में 5 से भाग दे कर आसानी से 1,3,7,या 9 वाले हरों से भिन्न में बदल सकते हैं
और यदि फिर से 5 आ गया है तो एक और बार 5 से भाग दे दीजिये. (ऐसा न हो कि आप 125 से भाग देने का प्रयास कर रहे हों एकाधिकेन पूर्वेण से, इसके लिए तो आप अंश और हर में 8 से गुणा कर दें; इसी तरह के और भी उदाहरण हो सकते हैं जहाँ आपको 'एकाधिकेन' की आवश्यकता भी नहीं )
9 और 7 के लिए तो पता है ही आपको; 1 और 3 तीन के लिए अभी बताएँगे.
1 से अंत हो:
जैसे- 1/21, 1/121, 59/61, 19999/20001 इत्यादि
इन भिन्नों के हरों में 9 से गुणा कर उसे 9 वाले, हरों वाले भिन्न में बदला जा सकता है.
एक आवश्यक बात: भिन्न के हर को 9 से गुणा कर 9 से अंत होने वाले भिन्न में बदलना हमेशा अच्छा नहीं है क्योंकि 'हर' बहुत ही बड़ा हो सकता है जिससे कठिनाई बढ़ जाएगी, इसके लिए एकाधिकेन पूर्वेण सूत्र के बिना ही हल करने का एक आसान नियम है. इस नियम पर हम आवर्ती दशमलव भिन्न में चर्चा करेंगे.
संक्षेप में नियम:------------------------------
यदि भिन्न 19/21 हो तो सहायक भिन्न होगा: 19-1/20 => 18/20=> 1.8/2;
RQ से अगला भाज्य R(9-Q) मिलेगा. इसका मतलब Q के 9 के पूरक को वास्तविक Q बनाना है.
जैसे RQ = 18 हो तो अगला भाज्य होगा: 11=11; 25 हो तो 24=24
2से अंत हो:
जैसे- 1/12, 21/32, 169/172 इत्यादि
इस तरह के भिन्नों के हरों के 4 से गुणा कर 8 से अंत होने वाले हरों में बदल सकते हैं.
सीधे-सीधे बनाने के लिए भी नियम है जो अभी संक्षेप में बताया जा रहा है.
सहायक भिन्न वही होगा जैसे 1-से अंत वाले में होता है.
संक्षेप में:--- यदि अगला भाज्य RQ=18 हो वास्तविक भाज्य R(9-2Q) = 17 होगा.
3 से और 4 से अंत हो:
इनमे भी सहायक भिन्न वैसा ही होगा जैसा ऊपर के दोनों में बताया गया.
3 वाले में: RQ से R(9-3Q) और 4 वाले में: RQ से R(9-4Q) .
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