गिनतियों में वैदिक ज्ञान

 📜😇 एक ईश्वर 

2. दो (२)

दो लिंग : नर और नारी ।

दो पक्ष : शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष।

दो पूजा : वैदिकी और तांत्रिकी (पुराणोक्त)।

दो अयन : उत्तरायन और दक्षिणायन।

3. तीन (३)

त्रिदेव - ब्रह्मा-सर्जक, विष्णु-पालक, शिव-संहारक।

तीन देवियाँ : महा सरस्वती, महा लक्ष्मी, महा गौरी।

तीन लोक : पृथ्वी, आकाश, पाताल।

तीन गुण : सत्वगुण, रजोगुण, तमोगुण।

तीन स्थिति : ठोस, द्रव, वायु।

तीन स्तर : प्रारंभ, मध्य, अंत।

तीन पड़ाव : बचपन, जवानी, बुढ़ापा।

तीन रचनाएँ : देव, दानव, मानव।

तीन अवस्था : जागृत, मृत, बेहोशी।

तीन नाड़ी : इडा, पिंगला, सुषुम्ना।

तीन संध्या : प्रात:, मध्याह्न, सायं।

तीन शक्ति : इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति, क्रियाशक्ति।

तीन लोक - स्वर्ग्लोग, मृत्युलोक, पाताललोक।

ताप त्रय - दाहिक, दैविक, भौतिक। 

4. चार (४)

चार आश्रम - ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, और संन्यास।

चार युग (चतुर्युग) : सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग, कलयुग।  - सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग।

चार धाम - पूर्व में जगन्नाथ, पश्चिम में द्वारिका, उत्तर में केदारनाथ और दक्षिण में रामेश्वरम। 

चार पुरुषार्थ - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।

चार अन्तरेंद्रिय - मन, बुद्धि, चित और अहंकार। 

चार मुनि : सनत, सनातन, सनंद, सनत कुमार।

चार वर्ण : ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।

चार निति : साम, दाम, दंड, भेद।

चार वेद : सामवेद, ॠग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद।

चार स्त्री : माता, पत्नी, बहन, पुत्री।

चार समय : सुबह, शाम, दिन, रात।

चार अप्सरा : उर्वशी, रंभा, मेनका, तिलोत्तमा।

चार गुरु : माता, पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक गुरु।

चार प्राणी : जलचर, थलचर, नभचर, उभयचर।

चार जीव : अण्डज, पिंडज, स्वेदज, उद्भिज।

चार वाणी : ओम्कार्, अकार्, उकार, मकार्।

चार भोज्य : खाद्य, पेय, लेह्य, चोष्य।

चार वाद्य : तत्, सुषिर, अवनद्व, घन।

*🕹चार पीठ🕹*
१-शारदा पीठ *(द्वारिका)*
२-ज्योतिष पीठ *(जोशीमठ बद्रिधाम*) 
३-गोवर्धन पीठ *(जगन्नाथपुरी),*
४-शृंगेरीपीठ❗

5. पाँच (५)

पांच ज्ञानेन्द्रियाँ - नेत्र, कान, नासिका, जीभ, त्वचा।

पांच कामेंद्रियाँ - मुख, हाथ, पैर, गुदा, उपस्थ। 

पांच तत्व - पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश।

पांच सम्रदाय - वैष्णव, शैव, शाक्त, गाणपत्य, सौर।

पांच पुष्प - चम्पा, आम, शमी, कमल, कनेर।

पञ्चकन्या - अहल्या, द्रौपदी, कुंती, तारा, मंदोदरी।

पंचोपचार पूजा - गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेध अर्पण करना। 

पञ्च रत्न - सोना, हीरा, मोती, माणिक्य, नीलम।

पञ्चपल्लव - बट, गुलर, पीपल, आम, पाकड़, पांच वृक्षों के पत्ते पञ्चपल्लव कहे जाते हैं. पूजा के समय में प्रयोग होते हैं। 

पञ्चगव्य - गो दूध, गो मूत्र, गोबर, गाय घी, गाय दही, पांच पदार्थों से पूजा से पूर्व इन से स्नान और पान आतंरिक और बाह्म शुद्धी हेतु किया जाता है।

(मधुपर्क - घी, शहद और दही का मिश्रण ही मधुपर्क है।)

पंचामृत - दूध, दही, घी, मधु, शक्कर के मिश्रण से तैयार होता है। पूजा अभिषेक में इस का प्रयोग किया जाता है।

(पंचामृत पान करने से क्या लाभ है। दूध-बौद्धिक और मानसिक शक्ति, दही-विजय प्राप्ति, घी-विद्या प्राप्ति, मधु-आयु, शक्कर-शत्रुनाश और पाँचों के समिश्रम से भक्ति प्राप्त होती है।)

पंच केदार 
श्री केदारनाथ, श्री मध्यमेश्वर, श्री तुंगनाथ, श्री रुद्रनाथ, श्री कल्पेश्वर।

पंचनाथ 
उत्तर में श्री बद्रीनाथ (श्री बद्री का आश्रम उत्तराखंड)। दक्षिण में श्री रंगनाथ (श्रीरंगम मद्रास प्रदेश)। पूर्व में श्री जगन्नाथ  (श्री नींलांचल पुरी)। पश्चिमी श्री द्वारका नाथ (श्री द्वारिका सौराष्ट्र)। मध्य में श्री गोवर्धन नाथ (श्री नाथद्वारा राजस्थान)।

पंच काशी 
वाराणसी  (काशी), गुप्तकाशी, उत्तरकाशी, दक्षिण काशी (तेन्काशी), और शिवकाशी।

पंच सरोवर 
बिंदु सरोवर सिद्धपुर, नारायण सरोवर कच्छ, पंपा सरोवर मैसूर राज्य, पुष्कर सरोवर राजस्थान और मानसरोवर तिब्बत।

पाँच देवता : गणेश, दुर्गा, विष्णु, शंकर, सुर्य।

पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ : आँख, नाक, कान, जीभ, त्वचा।

पाँच कर्म : रस, रुप, गंध, स्पर्श, ध्वनि।

पाँच  उंगलियां : अँगूठा, तर्जनी, मध्यमा, अनामिका, कनिष्ठा।

पाँच पूजा उपचार : गंध, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद्य।

पाँच अमृत : दूध, दही, घी, शहद, शक्कर।

पाँच प्रेत : भूत, पिशाच, वैताल, कुष्मांड, ब्रह्मराक्षस।

पाँच स्वाद : मीठा, चर्खा, खट्टा, खारा, कड़वा।

पाँच वायु : प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान।

पाँच वटवृक्ष : सिद्धवट (उज्जैन), अक्षयवट (Prayagraj), बोधिवट (बोधगया), वंशीवट (वृंदावन), साक्षीवट (गया)।

पाँच पत्ते : आम, पीपल, बरगद, गुलर, अशोक।

पाँच कन्या : अहिल्या, तारा, मंदोदरी, कुंती, द्रौपदी।

6. छ: (६)

षटविकार - काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मात्सर्य। 
षट रस - मधुर, अम्ल, तिक्त, कटु, लावन, कषाय। 
वेद के छ: अंग - शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, छ्न्द, नीरूक्त। 

छ: ज्ञान के अंग : शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्द, ज्योतिष।

गृहस्थ के नित्य छ: कर्म - देव पूजन, अतिथि सत्कार, तुलसी पूजा, गौयास, सूर्य अर्द्ध, दीपदान 

मुख्य छ: सरोवर - राजस्थान में पुष्कर, कुरुक्षेत्र में ब्रह्मसरोवर, निमिषारण्य में चक्तीर्थ, कुरुक्षेत्र महाभारत युद्धस्थली में ज्योतिसार, पंजाब में अमृतसर और गोवर्धन में मानसी गंगा। 

छ: ॠतु : शीत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, बसंत, शिशिर।

छ: कर्म : देवपूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम, तप, दान।

छ: दोष : काम, क्रोध, मद (घमंड), लोभ (लालच),  मोह, आलस्य।

7. सात (७)

सप्तसागर - क्षारोद, इक्षुरसोद, सुरोद, घृतोद, क्षोरोद, दधिमण्डोद, शुद्धोद।

सप्तद्विप - जम्बू, प्लक्ष, शालमलि, कुश, कौंच शाक, पुष्कर।

सात प्रकार का दान - अन्न, सम्पत्ति, बुद्धि, श्रम, रक्त, जीव, कन्यादान।

सप्त ऋषि - गौतम, भारद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वशिश्ठ, कश्यप, अत्रि।

सप्तपुरि - काशी, कांची, माया, (हरिद्वार), अयोध्या, द्वारिका, मथुरा अवन्तिका (उज्जैन)।

प्रमुख सात वन - काम्यक, अदिति, व्यास, फ़लकी, सूर्य, मधु, पुण्यशीत।

सप्त पुण्यनदियां - गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, नर्मदा, सिन्ध, कावेरी।

सात पर्वत - हिमालय, निषध, विन्ध्य, माल्यवान, पारियात्र, गंधमादन, हेमकूट।

सप्त बदरी 
श्री बद्री नारायण, आदिबदरी (ध्यान बदरी), बुद्ध बदरी, भविष्य बदरी, योग बदरी, आदिबदरी, नरसिंह बदरी।

सप्त सरस्वती 
सुप्रभा पुष्कर, कंचनाक्षी नैमिष, विशाला गया, मनोरमा उत्तर कौशल, ओघवती कुरुक्षेत्र, सुरेणु हरिद्वार और विमलोदका हिमालय।

सप्त गंगा
भागीरथी, वृद्ध गंगा, कालिंदी, सरस्वती, कावेरी, नर्मदा और वेणी।

सप्त क्षेत्र 
कुरुक्षेत्र पंजाब, हरिहरक्षेत्र सोनपुर, प्रभासक्षेत्र वेरावल, रेणुकाक्षेत्र उत्तर प्रदेश मथुरा के पास, भृगुक्षेत्र भरूच, पुरुषोत्तमक्षेत्र जगन्नाथपुरी और शूकरक्षेत्र सोरों।

सात छंद : 
गायत्री, उष्णिक, अनुष्टुप, वृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप, जगती।

सात स्वर : 
सा, रे, ग, म, प, ध, नि।

सात सुर : 
षडज्, ॠषभ्, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद।

सात चक्र : 
सहस्त्रार, आज्ञा, विशुद्ध, अनाहत, मणिपुर, स्वाधिष्ठान, मुलाधार।

सात वार : 
रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।

सात मिट्टी : 
गौशाला, घुड़साल, हाथीसाल, राजद्वार, बाम्बी की मिट्टी, नदी संगम, तालाब।

सात महाद्वीप : 
जम्बुद्वीप (एशिया), प्लक्षद्वीप, शाल्मलीद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप, पुष्करद्वीप।

सात ॠषि : 
वशिष्ठ, विश्वामित्र, कण्व, भारद्वाज, अत्रि, वामदेव, शौनक।

सात ॠषि : 
वशिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र, भारद्वाज।

सात धातु (शारीरिक) : 
रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।
सात रंग : बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।

सात पाताल : 
अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल।

सात पुरी : 
मथुरा, हरिद्वार, काशी, अयोध्या, उज्जैन, द्वारका, काञ्ची।

सात धान्य : 
उड़द, गेहूँ, चना, चांवल, जौ, मूँग, बाजरा।

8. आठ (८)

अष्टगंध - 
ओचंदन, अगर, देवदारु, केसर, कपूर्र, जटामासी, गोरोचन, शैलज, आदि का मिश्रन यन्त्र लेखन में प्रयोग किया जात है।

अष्टांग अर्ध्य - 
जल, दूध, कुश, दही, अक्षत, तिल, जौ, पीली सरसों इन आठ वस्तुओं को मिला कर सूर्य अर्ध दिया जाता है. 

आठ मातृका : 
ब्राह्मी, वैष्णवी, माहेश्वरी, कौमारी, ऐन्द्री, वाराही, नारसिंही, चामुंडा।

आठ लक्ष्मी : 
आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी, विद्यालक्ष्मी।

आठ वसु : 
अप (अह:/अयज), ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्युष, प्रभास।

आठ सिद्धि : 
अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व।

आठ धातु : 
सोना, चांदी, ताम्बा, सीसा जस्ता, टिन, लोहा, पारा।

आठ वसु
वासु:, धरध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

9. नव (९)

नौ धातुएं - 
सोना चांदी, तांबा, पीतल, कांसा, सीसा, जस्ता, रांगा और लोहा।

नवधा भक्ति - 
श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, बंदन, सख्य, दास्य, आत्मनिवदन।

नौ भूभाग - 
भारत, इलावर्त, किंपुरुष, भद्र, केतुमाल, हरि, हिरण्य, रम्य, कुश।

नवदुर्गा - 
शैलपुत्री, ब्रह्मचरिणी, चन्द्रघंटा, कुष्मांडा, सकन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।

नौ कुमारी - 
कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्यानी, रोहिनी, काली, चंडीका, शांभवी, दुर्गा, सुभद्रा, इन नौ कुमारियों की पूजा दुर्गा पूजन के समय नौ कन्या के रूप में होती है।

नो अरण्य
दंडकारण्य, सेंधवारण्य, पुष्करारण्य, नैमिषारण्य, कुरु-जांगल अरण्य, उत्प्लावर्तकारण्य, जम्बूमार्ग, हिम्वदारण्य और अर्बदारण्य।

नवग्रह : 
सुर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु।

नवरत्न : 
हीरा, पन्ना, मोती, माणिक, मूंगा, पुखराज, नीलम, गोमेद, लहसुनिया।

नवनिधि : 
पद्मनिधि, महापद्मनिधि, नीलनिधि, मुकुंदनिधि, नंदनिधि, मकरनिधि, कच्छपनिधि, शंखनिधि, खर्व/मिश्र निधि।

10. दस (१०)

दस महाविद्या : 
काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, कमला।

दस दिशाएँ : 
पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आग्नेय, नैॠत्य, वायव्य, ईशान, ऊपर, नीचे।

दस दिक्पाल : 
इन्द्र, अग्नि, यमराज, नैॠिति, वरुण, वायुदेव, कुबेर, ईशान, ब्रह्मा, अनंत।

दस अवतार (विष्णुजी) : 
मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध, कल्कि।

दस सति : 
सावित्री, अनुसुइया, मंदोदरी, तुलसी, द्रौपदी, गांधारी, सीता, दमयन्ती, सुलक्षणा, अरुंधती।

एकादश रुद्र
रुद्र: ,हरबहुरुप, त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

 *🍁बारह मास🍁*
१-चैत्र , २-वैशाख , ३-ज्येष्ठ ,४-अषाढ , ५-श्रावण , ६-भाद्रपद , ७-अश्विन , ८-कार्तिक ,९-मार्गशीर्ष , १०-पौष , ११-माघ , १२-फागुन❗

*⌛ बारह राशी ⌛*
१-मेष , २-वृषभ , ३-मिथुन , ४-कर्क , ५-सिंह , ६-कन्या , ७-तुला , ८-वृश्चिक , ८-धनु , १०-मकर , ११-कुंभ , १२मीन❗

*🙏बारह ज्योतिर्लिंग🙏*
१-सोमनाथ ,२-मल्लिकार्जुन ,३-महाकाल , ४-ओमकारेश्वर , ५-बैजनाथ , ६-रामेश्वरम ,७-विश्वनाथ , ८-त्र्यंबकेश्वर , ९-केदारनाथ , १०-घुष्नेश्वर, ११-भीमाशंकर ,१२-नागेश्वर!

12 प्रकार के आदित्य :-
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँशभाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु।

चतुर्दश (14) प्रयाग
प्रयागराज गंगा यमुना सरस्वती संगम, देवप्रयाग अलकनंदा भागीरथी, रुद्रप्रयाग आलकनंदा मंदाकिनी, कर्णप्रयाग पिंडरगंगा अलकनंदा, नंदप्रयाग अलकनंदा नंदा, विष्णु प्रयाग विष्णु गंगा अलकनंदा, सूर्यप्रयाग अलसतरंगिणी मंदाकिनी, इंद्रप्रयाग भागीरथी व्यासगंगा ( इसे व्यास घाट भी कहते हैं । वृत्रासुर के भय से यहां इंद्र ने शंकर जी की उपासना की थी।), सोनप्रयाग सोम नदी मंदाकिनी, भास्कर प्रयाग भटवारी, हरिप्रयाग हरी गंगा भागीरथी, गुप्त प्रयाग नील गंगा भागीरथी, श्यामप्रयाग श्याम गंगा भागीरथी, केशव प्रयाग अलकनंदा सरस्वती।

*💥पंद्रह तिथियाँ💥*
१-प्रतिपदा ,२-द्वितीय ,३-तृतीय ,४-चतुर्थी , ५-पंचमी , ६-षष्ठी , ७-सप्तमी , ८-अष्टमी , ९-नवमी ,१०-दशमी , ११-एकादशी , १२-द्वादशी , १३-त्रयोदशी , १४-चतुर्दशी , १५-पूर्णिमा, अमावास्या❗

षोडशोपचार पूजा - 
आहावान, आसन, पाघ, अर्ध्य, आचमन, स्नान, वस्त्र यज्ञोपवीत, सुगंध, अक्षत, पुष्प, धुप, दीप, नैवेद, ताम्बूल, पुष्पांजली, (प्रदक्षिना) आदि भगवान् के सोलह कला पूर्ण शरीर का निर्माण करना ही सोहल उपचार की पूजा का विधान है।

 *🕹स्मृतियां🕹*
१-मनु , २-विष्णु , ३-अत्री , ४-हारीत ,५-याज्ञवल्क्य ,७-उशना , ७-अंगीरा , ८-यम , ९-आपस्तम्ब , १०-सर्वत ,१०-कात्यायन , १२-ब्रहस्पति , १३-पराशर , १४-व्यास , १५-शांख्य , १६-लिखित , १७-दक्ष , १८-शातातप , १९-वशिष्ठ❗

*उक्त जानकारी शास्त्रोक्त 📚 आधार पर... हैं ।*
आइए कुछ और समूह को जाने

हवन हेतु उपयुक्त लकडी - शमी, ढाक, बट, पीपल, गूलर, जड, बेल, आम, चंदन कपूर्र, चीड, साल, देवदारू, और खैर के वृक्षों की लकडी हवन के लिये उत्तम है।

हवन सामग्री मिश्रण - एक भाग चावल, चावल से दो गुना घी, चावल से तीन गुना जौ, चावल से चार गुना तिल, और शक्कर इच्छानुसार का मिश्रण ही उत्तम समग्री बताई गई है।




अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।

33 करोड़ नहीं 33 कोटि देवी देवता हैं हिंदू धर्म में ;

कोटि = प्रकार । 
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते हैं ।

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता है।

हिंदू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उड़ाई गयी की हिन्दूओं  के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिंदू  धर्म में :-



8 प्रकार हैं :-
वासु:, धरध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार हैं :- 
रुद्र: ,हरबहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
                       एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार ।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी 

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है ।
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाएं ।

यह बहुत ही अच्छी जानकारी है इसे अधिक से अधिक लोगों में बाँटिये और इस कार्य के माध्यम से पुण्य के भागीदार बनिये ।

👉 एक हिंदू होने के नाते जानना आवश्यक है ।

🙏अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाए
📜अपने भारत की संस्कृति 
को पहचानें।
ज्यादा से ज्यादा
लोगों तक पहुचायें। 

खासकर अपने बच्चों को बताएं
क्योंकि ये बात उन्हें कोई दूसरा व्यक्ति नहीं बताएगा...

 

         ⌛🕹⌛🕹⌛🕹⌛🕹⌛🕹
*अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने !*
*ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचाये.!*
*खासकर अपने बच्चो को बताए क्यों कि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...*

         📜😇  एक ईश्वर 

             *⌛दो पक्ष⌛*
१-कृष्ण पक्ष ,    २-शुक्ल पक्ष❗

        *🙏तीन ऋण🙏*
१-देवऋण , २-पितृऋण, ३-ऋषिऋण❗

         *🏉चार युग🏉*
१-सतयुग ,  २-त्रेतायुग ,
३-द्वापरयुग ,  ४-कलियुग❗

        *🌷चार धाम🌷*
१-द्वारिका , २-बद्रीनाथ ,
३-जगन्नाथपुरी , ४-रामेश्वरमधाम❗

       *🕹चार पीठ🕹*
१-शारदा पीठ *(द्वारिका)*
२-ज्योतिष पीठ *(जोशीमठ बद्रिधाम*) 
३-गोवर्धन पीठ *(जगन्नाथपुरी),*
४-शृंगेरीपीठ❗

          *⌛चार वेद⌛*
१-ऋग्वेद , २-अथर्वेद ,३-यजुर्वेद , ४-सामवेद!

            *🍁चार आश्रम🍁*
१-ब्रह्मचर्य , २-गृहस्थ , ३-वानप्रस्थ , ४-संन्यास❗

           *🏉चार अंतःकरण🏉*
१-मन , २-बुद्धि , ३-चित्त , ४-अहंकार❗

          *🍁पञ्च गव्य🍁*
१-गाय का घी , २-दूध , 
दही ,३-गोमूत्र , ४-गोबर❗

         *🙏पञ्च देव🙏*
१-गणेश , २-विष्णु , ३-शिव , ४-देवी ,५-सूर्य!

          *🕹पंच तत्त्व🕹*
१-पृथ्वी ,२-जल , ३-अग्नि , ४-वायु , ५-आकाश❗

        *⌛छह दर्शन⌛*
१-वैशेषिक , २-न्याय ,३-ऋषांख्य , ४-योग , ५-पूर्व मिसांसा , ६-दक्षिण मिसांसा❗

       *🌷  सप्त ऋषि🌷*
१-विश्वामित्र ,२-जमदाग्नि ,३-भरद्वाज , ४-गौतम , ५-अत्री , ६-वशिष्ठ और कश्यप❗

          *🍁सप्त पुरी🍁*
१-अयोध्यापुरी ,२-मथुरापुरी ,
३-मायापुरी *(हरिद्वार)*, ४-काशीपुरी ,
५-कांचीपुरी *(शिन कांची-विष्णु कांची),*
६-अवंतिकापुरी और 
७-द्वारिकापुरी❗

          *⌛आठ योग⌛*
१-यम , २-नियम , ३-आसन ,४-प्राणायाम , ५-प्रत्याहार , ६-धारणा , ७-ध्यान, एवं ८-समािध❗

          *🙏आठ लक्ष्मी🙏*
१-आग्घ , २-विद्या , ३-सौभाग्य ,४-अमृत , ५-काम , ६-सत्य , ७-भोग ,एवं ८-योग लक्ष्मी❗

             *🌹नव दुर्गा 🌹*
१-शैल पुत्री , २-ब्रह्मचारिणी ,३-चंद्रघंटा , ४-कुष्मांडा , ५-स्कंदमाता , ६-कात्यायिनी ,७-कालरात्रि, ८-महागौरी एवं ९-सिद्धिदात्री❗

       *🍫 दस दिशाएं🍫*
१,पूर्व , २-पश्चिम , ३-उत्तर , ४-दक्षिण ,५-ईशान , ६-नैऋत्य , ७-वायव्य , ८-अग्नि 
९-आकाश, एवं १०-पाताल,❗

               *🏉मुख्य ११ अवतार🏉*
 १-मत्स्य , २-कश्यप , ३-वराह , ४-नरसिंह , ५-वामन , ६-परशुराम ,७-श्री राम , ८-कृष्ण , -बलराम , १०-बुद्ध , एवं ११-कल्कि❗

        

       

          

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