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लेखक
जितेंद्र सिंह तोमर
(DNYS)
एक नेचरोपैथ होने के कारण मैं आपको बताना चाहूंगा कि आप बुखार को हल्के में ना लें । अगर वह बार-बार आता है तो बिल्कुल भी हल्के में ना लें । ऐसा कई कारणों से हो सकता है ।
नेचुरोपैथी एकदम अर्थात इंस्टेंट इलाज प्रदान नहीं करती ।
नेचुरोपैथी, में विद्वानों का मानना है कि कोई भी रोग एकदम से नहीं आता। वह धीरे-धीरे आता है तो उसका इलाज भी धीरे-धीरे ही होता है अर्थात वह शरीर से धीरे-धीरे ही जाता है, इसलिए हम आपसे कहेंगे कि आप शरीर की शक्ति के अनुसार अन्य पद्धतियां भी अपना सकते हैं।
बुखार क्या है और कैसे आता है?
शरीर का तापमान जब सामान्य तापमान से अधिक हो जाता है तो उस स्थिति को बुखार कहते हैं। शरीर का सामान्य तापमान को आमतौर पर औसतन 98.6° F (फारेनहाइट) या 37° C (सेल्सियस) के स्वीकार किया जाता है। वास्तव में शरीर का सामान्य तापमान 97.7° F से 99.5° F तथा में 36.5°C से 37.5°C के मध्य होता है। तापमान के इससे अधिक होने की स्थिति को बुखार कहा जाता है। जब शरीर का तापमान 99.5 डिग्री फारेनहाइट या से 37.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होगा तो उस स्थिति को बुखार माना जाएगा अन्यथा नहीं।
कभी-कभी कुछ लोग 99 डिग्री फारेनहाइट पर बुखार या फीवर जैसा अनुभव करते हैं जिसमें उन्हें हरारत या सुस्ती या बदन टूटने जैसी स्थिति महसूस होती है । जो साधारणतया आराम करने के बाद स्वयं ही ठीक हो जाती है। इस स्थिति में इलाज की आवश्यकता नहीं होती यही स्थिति अचानक से भी भीगने या बहुत अधिक काम करने पर होती है।
जब हमारे शरीर में मौजूद सैनिक यानी एंटीबॉडीज बाहर से आए हुए एंटीजन यानी वायरस या बैक्टीरिया या इंफेक्शन से लड़ने में फेल हो जाते हैं । तब शरीर के पास इन्हें काबू करने का एकमात्र तरीका शरीर का तापमान बढ़ाना रह जाता है।
आपको बता दें कि जब शरीर का तापमान बढ़ता है तो शरीर में मौजूद हार्मोन और एंजाइम्स की क्रियाविधि धीमी पड़ जाती है और बड़े हुए तापमान पर बाहर से आए हुए एंटीजन का बढ़ना मुश्किल हो जाता है। यदि एंटीजन का बढ़ना रुक जाएगा या धीमा हो जाए तो बुखार भी सामान्य स्तर पर आ जाता है। यदि यह इंक्शन शरीर में बना रहता है जो शरीर का तापमान 104 और 105 डिग्री फॉरेनहाइट तक हो जाता है कितने तापमान पर कभी-कभी वह बेहोश भी हो जाता है इस स्थिति से बचने के लिए घर के लोगों को तापमान नीचे लाने के लिए रोगी के सिर पर ठंडी पट्टी रखने की सलाह दी जाती है।
इस स्थिति में डॉक्टर पहले बुखार कम करने की दवा देते हैं फिर इंफेक्शन की जांच करा कर उस इंफेक्शन विशेष से संबंधित एंटीबायोटिक्स या एंटीवायरल दवाइयां देते हैं।
बुखार कैसे नापे?
बुखार को क्लीनिकल थर्मामीटर के द्वारा नापा जाता है। यह पहले पारे का बना हुआ होता था जिसे हम पारा थर्मामीटर के नाम से जानते थे। आजकल डिजिटल थर्मामीटर आने लगे हैं जो काफी अच्छी तरह से बुखार की स्थिति को जांच लेते हैं। जहां पारा थर्मामीटर गिरने से टूट जाता था वही डिजिटल थर्मामीटर गिरने के बाद भी सुरक्षित रहता है।
15 बरस या उससे अधिक उम्र के लोगों को थर्मामीटर जीभ के नीचे एक या 2 मिनट के लिए लगाया जाता है । जीभ के नीचे से शरीर का उचित तापमान प्राप्त हो जाता है।
वही इससे या 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के बगल में थर्मामीटर लगा कर तापमान लिया जाता है क्योंकि अगर बच्चे दांत जोर से दबा दें और थर्मामीटर टूट जाए और उसका पारा जो जहरीला होता है, को निगल जाएगा। इसलिए बच्चों के बगल में थर्मामीटर लगाया जाता है।
एक शख्स के थर्मामीटर से दूसरे का तापमान नहीं चेक किया जाता। यदि चेक किया जाता है तो उसके स्प्रिट या सनराइजर से डिसइनफेक्टिंड कर लिया जाता है अर्थात साफ कर लिया जाता है ऐसे हर बार करना चाहिए।
बुखार होने पर गीली पट्टी की जरूरत कब होती है और किस तरह पट्टी रखनी चाहिए?
जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि शरीर का तापमान जब 103 डिग्री से अधिक हो जाता है जिससे शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम ठीक से कार्य नहीं कर पाते और शरीर का ताप कम रखने के लिए तो हमें सिर पर पट्टी रखनी होती है।
कभी-कभी अधिक तापमान के कारण सिर काफी गर्म हो जाता है। इस स्थिति में एंजॉय में और हार्मोन पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते और बुखार दिमाग को नुकसान पहुंचा देता है इससे बचने के लिए डॉक्टर पट्टी रखने की सलाह देते हैं।
यदि शरीर का ताप 103 के आसपास है तो मरीज को ज्यादा परेशानी नहीं होती तो उसके सिर पर सादे पानी की पट्टी में रखी जाती है एक पति को 1 से 2 मिनट तक रखने के उपरांत उसे बदल दिया जाता है या फिर उसे पुणे गिला करके माथे पर रख दिया जाता है 10 से 15 मिनट में सामान्य हो जाता है।
यदि बुखार 104 तक पहुंच चुका हूं तो मरीज को ठंड नहीं लग रही हो तो बड़े चोली से उसके शरीर को पहुंचा जा सकता है तथा सिर पर पट्टी रखी जा सकती है।

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