मधु या शहद (Honey हनी)
मधुमक्खियों द्वारा पौधों के पुष्पों के मकरन्दकोशों से स्रावित रस से तैयार किया गया एक मीठा, चिपचिपाहट वाला अर्ध तरल पदार्थ मधु या शहद (Honey हनी) कहलाता है। इसे वे अपने आहार के रूप में अपने मौनगृहों में संग्रहित करती हैं।
शहद एक प्राकृतिक स्वास्थ्यवर्धक आहार है जिसे हम त्वचा को सुंदर बनाने और मोटापा कम करने के लिए प्रयोग करते है। शहद का प्रयोग औषधि रूप में भी होता है।
मधु या शहद का विशिष्ट संगठन या संयोजन उसे बनाने वाली मधुमक्खियों व क्षेत्र विशेष में उपलब्ध पुष्पों पर निर्भर करता है।
मौन पालन या मधुमक्खी पालन
बड़े स्तर पर शहद व मोम के लिए मधुमक्खियों का पालन करना मधुमक्खी पालन या मौन पालन कहलाता है।
भारत में मधुमक्खी पालन में देशी और विदेशी दोनों प्रकार की मधुमक्खियों का उपयोग किया जाता है।
भारत में देसी नस्ल जैसे एपिस शरण इंडिका, एपिस दारसेट, एपिस फॉलोरी आदि का तथा विदेशी नस्लों में एपिस लीफांस का उपयोग किया जाता हैै, जो मुख्यतः इटली में पाई जाती है और इसकी शहद उत्पादन क्षमता बहुत अधिक होती हैै।
मधु या शहद का स्वाद फूलों की किस्म पर निर्भर करता है।
शहद का मीठापन
शहद में जो मीठापन मुख्यतः ग्लूकोज और एकल शर्करा फ्रुक्टोज के कारण होता है।
शहद एक जीवाणु-रोधी
शहद में ग्लूकोज व अन्य कई शर्कराएं खनिज विटामिन और एमिनो अम्ल आदि होतेे हैं । इसके कई पौष्टिक तत्व घाव को ठीक करने और ऊतकों के बढ़ने के उपचार में मदद करते हैं। प्राचीन काल से ही शहद को एक जीवाणु-रोधी के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है। यह एक हाइपरस्मॉटिक एजेंट है जो घाव से तरल पदार्थ को निकाल कर उसकी शीघ्र भरपाई में भी सहायता करता है। जब इसको सीधे घाव पर लगाया जाता है तो यह सीलैंट की तरह कार्य कर घाव को संक्रमण से बचाता है। जिससे उस जगह के हनिकारक जीवाणु भी मर जाते हैं और बाहर के जीवाणु अंदर प्रवेश नहीं कर पाते।
मधु शर्कराओं (कार्बोहाईड्रेटस) एवं अन्य यौगिकों का मिश्रण होता है।
इनवर्टेड शुगर सीरप:– ग्लूकोज और फ्रक्टोस के मिश्रण को इनवर्टेड शुगर सीरप कहा जाता है। इसमें 48% फ्रक्टोज़, 47% ग्लूकोज़ एवं 5% सकरोज़ होते हैं।)। मधु या शहद के कार्बोहाईड्रेट में माल्टोज़, सक्रोज़ एवं अन्य जटिल कार्बोहाईड्रेट भी होते हैं।
मधु या शहद में विटामिन एवं खनिज बहुत कम मात्रा में होते हैं। अतः शहद विटामिन या खनिजों का विशेष स्रोत नहीं है।
इसमें अति लघु मात्रा में कुछ अन्य बहु उपयोगी यौगिक भी होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स का कार्य करते हैं। साथ ही शहद में क्राइसिन, पाइनोबैंकसिन, विटामिन सी, कैटालेज़, एवं पाइनोसेंब्रिन भी होते हैं। मधु में लौह, तांबा और मैंगनीज सूक्ष्म मात्रा में होते है।
शहद और फैट (वजन)
शहद वजन कम करने के काम भी आता है।अगर आप अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान हो चुके हैं और जिम जाने का समय नहीं है तो शहद का प्रयोग कर के आप बिल्कुल स्लिम-ट्रिम बन सकते हैं।
मधु या शहद का घनत्व
मधु का घनत्व जल के घनत्व से 36% गुना घना है । अतः शहद का घनत्व लगभग 1.36 कि.ग्रा./लीटर है।
मधु या शहद की जांच
मधु में कॉर्न सीरप या इक्षु शर्करा मिश्रण की मिलावट की जांच आइसोटोप रेशो मास स्पेक्ट्रोमेट्री द्वारा की जा सकती है। इस विधि द्वारा 7% तक की निम्न मात्रा का मिश्रण भी जांचा जा सकता है।
मधु या शहद के प्रकार
मधु या शहद के कई प्रकार होते हैं। इन प्रकारों का वर्गीकरण प्रायः मधुमक्खियों द्वारा एकत्रित किये जाने वाले प्रमुख मधुरस स्रोतों के आधार पर किया जाता है।
उदाहरणार्थ अल्फा-अल्फा मधु, बरसीम मधु, छिछड़ी या शैन मधु, लीची मधु आदि। इसके अलावा शहद के संसाधन और शोधन की प्रक्रिया के आधार पर किया जा सकता है।
निष्कासित मधु
छने हुए मधु को निष्कासित मधु या छना हुआ शहद भी कहते हैं। यह मधु निष्कासन, मशीन द्वारा किया जाता है। यही मधु, शहद का शुद्धतम प्रकार होता है। यह मौनगृहों से पाली गई मधुमक्खियों जैसे एपिस मैलीफरा और एपिस सिराना से प्राप्त होता है।
निष्कासित मधु निम्न प्रकार का हो सकता है।
तरल मधु
वह मधु जी एकदम सरल हो, तरल मधु कहलाता है , यह मधु या शहद दृश्य रवों (क्रिस्टल) से मुक्त तथा तरल रूप में होता है। इसकी तरलता के कारण भी इसे तरल मधुुु कहते हैं।
रवेदार मधु
वह मधु जो क्रिस्टल अर्थात रवों के रूप में पाया जाता है, रवेदार या क्रिस्टलीकृत मधु कहलाता है। इसमें मधु पूर्ण रूप से रवेदार या ठोस बन सकता है।
शहद का यह क्रिस्टलीकरण, प्राकृतिक रूप से या किसी अन्य क्रियाओं द्वारा भी संभव हो सकता है।
निचोड़ने से प्राप्त शहद
जंगलों, चट्टानों, पुरानी इमारतों आदि में प्राकृतिक रूप से बने छत्तों से शहद प्राप्त करने के लिए मधुमक्खियों के छत्ते को निर्दयता पूर्वक तोड़ा जाता है उसके उपरांत उनके छत्ते को निर्दयी ढंग से निचोड़ा जाता है। जिसमें मधुमक्खियां तो मरती ही मरती हैं और उनके अंडे और लार्वे भी निचुड़ जाते हैं। इस प्रकार निचोड़ने से प्राप्त शहद न केवल अशुद्ध होता है परन्तु जल्दी ही खराब भी हो जाता है। यह शहद जंगली मौन (एपिस डौरसेटा) या भारतीय मौन (एपिस सिराना) आदि जातियों से प्राप्त किया जाता हैै।
कोष्ठ मधु
कोष्ठ या कॉम्ब मधु छत्तों के कोष्ठों में होता है जहां पर यह संग्रह किया जाता है। कौम्ब मधु भिन्न प्रकार का होता हैः
खण्ड कौम्ब मधु
यह भिन्न माप के वर्गाकार या आयाताकार मोमी छत्तों के खण्डों में पैदा किया जाता है।
व्यक्तिगत खम्ड कौम्ब मधु
इसे छोटे-छोटे मोमी छत्तों के खण्डों में पैदा किया जाता है। प्रत्येक खण्ड साधारण खण्ड के माप का एक चौथाई भाग होता है।
अम्बार कौम्ब मधु
यह मधु छिछली निष्कासन की जानी वाली फ्रेमों से, जिनमें पतली सुपर छत्ताधार लगी होती है, से पैदा किया जाता है। ये छत्ते जब पूरी तरह मधु से भर जाते हैं तथा कोष्ठक सील कर दिये जाते हैं तो इसे मौन गृह से निकाल कर ऐसे ही पैक कर बेच दिया जाता है।
काट कौम्ब मधु
इसमें अम्बार कौम्ब मधु को भिन्न माप के टुकड़ों में काटा जाता है, इसके किनारों को निष्कासित किया जाता है तथा व्यक्तिगत टुकड़ों को पोलीथीन के थैलों में लपेटा जाता हैं।
चंक मधु
इसमें कट कौम्ब मधु को एक डिब्बे में, जिसमें तरल निष्कासित मधु भरा होता है, पैक कर दिया जाता है।
भौतिक गुण
शहद के भौतिक गुण इसकी शुद्धता और मानकता ज्ञात करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।
आद्रताग्राही गुण
शहद का एक भौतिक गुण इसका आद्रता ग्राही होना है जिसके कारण यह हवा से नमी सोख लेता है। जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक नमी होती है वहां मधु के खराब होने की संभावना अधिक होती है।
शहद की आर्द्रता सोखने की गुणवत्ता इसमें उपस्थित शर्करा की सान्ध्रता तथा नमी पर निर्भर करती है। शहद की आपेक्षिक आर्द्रता सन्तुलन में होती है। मधु को नमी सोखने तथा खराब होने से बचाने के लिए ठीक प्रकार से संग्रहण करना चाहिए।
गाढ़ापन
शहद एक गाढ़ा द्रव्य है। गर्म करने से इसका गाढ़ापन कम हो जाता है। गाढ़ेपन का माप इसके बहाव/प्रवाह को दर्शाता है।
वास्तव में शहद का गाढ़ापन प्रोटीन मात्रा पर भी निर्भर करता है जो अन्ततः मधुरस स्रोत पर निर्भर करता है। जिस मधु में प्रोटीन की अधिक मात्रा होती है वह अधिक गाढ़ा होता है।
सुगन्ध और रंग
मधु का रंग तथा गन्ध एकत्र किए गए पुष्पन स्रोत पर निर्भर करती है । अतः यह मधुरस की मूल रचना पर निर्भर करता है। भिन्न-भिन्न फूलों से प्राप्त मधुरस का रंग तथा गन्ध भिन्न-भिन्न होती है और भिन्न मधु का रंग हल्के से गहरे अम्बर (तृणमणि) का तथा गन्ध मध्यम सुखद होती है।
| मधु स्रोत | रंग[1] |
|---|---|
| कपास | सफेद |
| सफेदा | सफेद |
| रबड़, सरसों, लीची | सुनहरा या हल्का पीला |
| बरसीम, जामुन | अम्बर (तृणमणि) |
| कर्वी तथा तामारिंगड मिश्रित | गहरा |
| शीशम | गहरा अम्बर |
आपेक्षिक गुरुत्व या विशिष्ट घनत्व तथा अपर्वतनांक
शुद्धमधु का विशिष्ट घनत्व 1.35 से 1.44 होना चाहिए। अपवर्तन मापी (रिफ़्रैक्टरमीटर) प्रयोग करके मधु में नमी/आर्द्रता को मापा जा सकता है। इन दोनो गुणों (नमी/आर्द्रता व विशिष्ट घनत्व) को मापने से शहद में नमी की मात्रा का पता चलता है।
औषधीय गुण
शहद को जीवाणु निवारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में शहद के उत्पादन में काम करने वाली मधुमक्खियां एन्जाइम ग्लूकोज ऑक्सीडेज को शहद (नेक्टर) में बदल देती हैं। जब शहद को घाव पर लगाया जाता है तो यह एंजाइम हवा की ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही बैक्टीरीसाइड हाइड्रोजन पराक्साइड बनता है।
मनुका (मेडिहनी) औषधीय मधु है जो जीवाणु-रोधी हैं।
वर्ष 2007 में हेल्थ कनाडा और यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने पहली बार इस मेडिसिनल हनी को घाव और जलने में प्रयोग की अनुशंसा की है।
शहद के प्रयोग से सूजन और दर्द भी दूर हो जाते हैं। घावों या सूजन से आने वाली दुर्गंध भी दूर होती है। शहद की पट्टी बांधने से मरे हुए ऊतकों की कोशिकाओं के स्थान पर जल्द ही नई कोशिकाएं पनप आती हैं। इस प्रकार यदि शहद का सही प्रकार से प्रयोग किया जाए तो, घाव तो भरते ही हैं और उनके निशान भी नहीं रहते।
अहार-रूप में उपयोग
मधु एक ऊष्मा व ऊर्जा दायक आहार है। दूध के साथ मिलने पर यह सम्पूर्ण आहार बन जाता है। इसमें मुख्यतः अवकारक शर्कराएं, प्रोटीन, विटामिन तथा लवण उपस्थित सभी आयु के लोगों के लिए श्रेष्ठ आहार माना जाते हैं। और रक्त में हीमोग्लोबिन निर्माण में सहायक होता है। एक किलोग्राम शहद से लगभग 5500 कैलोरी ऊर्जा मिलती है।
विभिन्न धर्मों में
शहद को प्राचीन काल से ही विभिन्न धर्मों में उच्च मान्यता मिली हुई है। प्राचीन हिन्दुधर्म ग्रन्थ, ऋगवेद में भी शहद तथा मधुमक्खियों के बारे में बहुत से सन्दर्भ मिलते हैं। शहद हिन्दू धर्म के बहुत से धार्मिक कृत्यों तथा समारोहों में प्रयोग होता है।
प्राचीन यूनानी सभ्यता में भी शहद को बहुत मूल्यवान आहार तथा भगवान की देन माना जाता था। यूनानी देवताओं को अमरत्व प्राप्ति का कारण उनके द्वारा किया गया ऐम्ब्रोसिआ के सेवन को बताया गया है। जिसमें शहद एक प्रमुख भाग होता था।
अरस्तु की पुस्तक नेचुरल हिस्टरी में भी शहद पर बहुत सी जानकारी उपलब्ध हैं। उसका विश्वास था कि शहद में जीवन वृद्धि तथा शरीर हृष्ट-पुष्ट रखने के लिए आसाधारण गुण होते हैं।
इस्लाम के पवित्र ग्रन्थ कुरान के सूरा-16 अन-नह्ल के अनुसार शहद सभी बीमारियों को निदान करता है।
यहूदी धर्म में भी शहद को आहार या हनी बनाने में प्रयोग किया जाता है।
संसार के लगभग सभी धर्मो ने शहद की अनूठी गुणवत्ता की प्रशंसा की है।
परंतु जैन धर्म में मधु सेवन को अनैतिक माना जाता हैं। जैन ग्रन्थ, पुरुषार्थ सिद्धयुपाय में लिखा है।
लोक में मधु का एक छोटा सा खंड भी बहुधा की हिंसा का स्वरुप होता है। जो मूढ बुद्धि रखने वाला मधु का सेवन करता है वह अत्यंत हिंसक होता है। —पुरुषार्थ सिद्धयुपाय (69)
ऐसे करें शहद की जांच
* रंग और गाढ़ापन
शहद का रंग और गाढ़ापन इस बात का द्योतक है कि मधुमक्खियों ने कौन से फूलों से पराग जमा करके इसे तैयार किया है। ज्यादातर शहद सरसों के फूलों से तैयार किया जाता है । इस लिए इसका रंग हल्का पीला होता है जब जामुन के फूलों से तैयार किया जाता है तो उसका रंग हल्का भूरा होता है।
जामुन और नीम के फूलों के परागों को एकत्रित कर जो शहद बनाता हैं तो वह ज्यादा गाढ़ा होता है। जबकि सरसों के फूलों का शहद पतला होता है।
* शहद का जमना
असली शहद सर्दियों में जम कर कृष्टलीकृत हो जाएगा । परंतु हल्की सी धूप लगने पर पुनः पिघल सकता है। इसमें मिलावट है तो इसमें कृष्टल बने ही रहेंगे।
* कपड़ों पर दाग नहीं लगाता
असली शहद कपड़ों पर दाग नहीं डालता अतः असली शहद कपड़ों पर नहीं चिपकता। मिलावटी कपड़ों पर दाग के रूप में जम जाएगा
* कुत्ता नहीं खाता
असली शहद में कुत्ता नहीं खाता। यदि इसमें चीनी की मिलावट है, तो वह उसे खा सकता है।
* पानी में घुलनशीलता की जांच
असली शहद पानी में नहीं खुलता मिलती है । वह नीचे तली में बैठ जाता है।
* अग्नि परीक्षा
असली शहद को यदि रुई में लपेटकर बत्ती बना ले तो वह आसानी से जलने लगता है। शुद्ध शहद का उपयोग दीपक में तेल की जगह रोशनी करने के लिए भी किया जा सकता है।
* कागज पर जांच
शुद्ध शहद कागज पर दाग नहीं छोड़ता यदि शुद्ध शहद को कागज पर डाला जाए तो उस पर कोई निशान नहीं बनेगा ।
यदि यह अशुद्ध है तो कागज पर दाग छोड़ जाता है, जो नीचे तक आ जाता है।
* चूना परीक्षण
यदि शुद्ध शहद को चूने के साथ रगड़ा जाए तो वह गर्मी उत्पन्न करता है जबकि अशुद्ध शहद ऐसा नहीं करता।
* मक्खी के पंखों पर नहीं चिपकता
शुद्ध शहद मक्खी के पंखों पर नहीं चिपकता यदि वह इसमें गिर जाती है, तो उस से निकल कर आसानी से उड़ सकती है।
Post a Comment
Post a Comment