मांँ चंद्रघंटा का भोग
मांँ चंद्रघंटा की पूजा में अक्षत, पुष्प, गंध, सिंदूर और धूप अवश्य अर्पित करनी चाहिए। इसके साथ मां चंद्रघंटा को चमेली का पुष्प या लाल फूल भी अर्पित करना चाहिए। भोग के दौरान देवी चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाई अर्पित करें।
मां चंद्रघंटा की कथा
बहुत समय पहले जब असुरों का आतंक बढ़ गया था, तब दैत्यों का राजा महिषासुर ने देवताओं के राजा इंद्र से उनका सिंहासन व स्वर्ग छीन लिया। वह अन्य अन्य देवताओं के भोग भाग भी स्वयं ही ग्रहण करने लगा। सभी देव अपनी परेशानी लेकर त्रिदेवों के पास गए।
देवताओं की बात सुनकर तीनों देव बहुत क्रोधित हुए तो ब्रह्मा, विष्णु और महेश के शरीर से एक तेज उत्पन्न होने लगा तब अन्यान्य देवताओं ने भी उसी तेज में अपने तेज को भी समाहित करा दिया। इस समग्र तेज ने तब एक देवी का रूप लिया।
इस देवी को भगवान शिव ने त्रिशूल, भगवान विष्णु ने चक्र, सूर्य देव ने तेज और तलवार, और बाकी देवताओं ने भी अपने-अपने अस्त्र और शस्त्र दिए। इस देवी का नाम चंद्रघंटा रखा गया।
इस प्रकार दैत्यों को सबक सिखाने के लिए मां दुर्गा ने अपने चंद्रघंटा नामक तीसरे स्वरूप में अवतार लिया और महिषासुर का संहार कर दिया था।
या देवी सर्वभूतेषु माँ चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते महयं चन्द्रघण्टेति विश्रुता।।
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम्।
सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥
मणिपुर स्थितां तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खंग, गदा, त्रिशूल,चापशर,पदम कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर हार केयूर,किंकिणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वंदना बिबाधारा कांत कपोलां तुगं कुचाम्।
कमनीयां लावाण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥
स्तोत्र
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिध्दिदात्री चंद्रघटा प्रणमाभ्यम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टं मन्त्र स्वरूपणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघंटे प्रणमाभ्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छानयी ऐश्वर्यदायनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चंद्रघंटप्रणमाभ्यहम्॥
कवच
रहस्यं श्रुणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघन्टास्य कवचं सर्वसिध्दिदायकम्॥
बिना न्यासं बिना विनियोगं बिना शापोध्दा बिना होमं।
स्नानं शौचादि नास्ति श्रध्दामात्रेण सिध्दिदाम॥
कुशिष्याम कुटिलाय वंचकाय निन्दकाय च न दातव्यं न दातव्यं न दातव्यं कदाचितम्॥
माँ चंद्रघंटा बीज मंत्र:-
ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
माँ चंद्रघंटा के बीज मंत्र की एक माला अर्थात 108 बार जाप करे। माँ के बीज मंत्रो का जाप करने से आपकी समस्त पारिवारिक समस्या का निस्तारण जल्द से जल्द होगा।
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