श्री द्वारकाधीश मंदिर
भगवान श्रीकृष्ण को अक्सर ‘द्वारकाधीश’ अर्थात ‘द्वारका के राजा’ के नाम से जाना जाता है। और इनके रहने की इस स्थान को ‘द्वारकाधीश मंदिर’ या 'जगत मंदिर' के नाम से पुकारा जाता था।
गुजरात के 'द्वारकाधीश मंदिर' उपरांत द्वारकाधीश जी का यह दूसरा बड़ा मंदिर है क्योंकि यहां पर स्वयं भगवान द्वारकेश विराजते हैं इसलिए इसका नाम उन्हीं के नाम पर 'राजाधिराज द्वारकाधीश मंदिर' पड़ा है। यह मंदिर मथुरा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में है।
यदि आप अभी तक मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में द्वारकाधीश जी के दर्शन के लिए नही गये हैं तो हम आपको बता दें कि यह द्वारकेश जी का मंदिर, द्वारिका के बाद दूसरा महत्वपूर्ण मंदिर है। जिसे उन्हीं के नाम पर द्वारिकाधीश मंदिर के नाम से जाना जाता है चूंकि यहां राजाओं के राजा विराजते हैं इसलिए इसका पूरा नाम राजाधिराज द्वारकाधीश मंदिर है।
हम आपसे कहेंगे कि आप जल्दी से जल्दी यहां आने का प्लान बनाएं और इस मंदिर में राजाधिराज द्वारकाधीश जी महाराज के दर्शन करें। यह मन्दिर अपने धार्मिक व सांस्कृतिक वैभव कला एवं सौन्दर्य का एक अनुपम उदाहरण है।
हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि मथुरा की यह यात्रा आपके जीवन को अद्भुद आत्मिक सुख और शांतिमय आभा के साथ भगवान् श्रीकृष्ण की भक्ति में खो जाने के लिए मजबूर देगीं।
जैसे ही हम द्वारिकाधीशजी के इस भव्य मंदिर के अंदर जाने के लिए कुछ खड़ी सीढ़ियों पर चढ़ते तो सबसे पहले हमें मंदिर के नक्काशीदार स्तंभों की पाँच पंक्तियाँ दिखाई देती हैं।
मंदिर के पूरे आँगन को तीन अलग-अलग भागों में विभाजित करती हैं; जिसमे दायीं लाइन महिलाओं के लिए है और पुरुषों के लिए बायीं लाइन है, जबकि मध्य लाइन वीआईपी पास वालों के लिए है। यहाँ दान के लिय एक विशाल दान पेटी भी राखी है।
द्वारकाधीश मंदिर अपनी विस्तृत वास्तुकला और चित्रों के लिए देश भर में प्रसिद्ध है, जो भगवान के जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है। मंदिर के अन्दर की सुन्दर नक्काशी, कला और चित्रकारी को बहुत ही सुंदर और शिल्प का एक बेहतरीन नमूना माना जा सकता है। अपनी वास्तुकला और चित्रों के लिए प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक और मनमोहनीय है। मंदिर का परिसर काफी बड़ा है जिसमे मंदिर की मुख्य इमारत को आकर्षक राजस्थानी शैली में निर्मित किया गया है और इस इमारत में एक भव्य प्रवेश द्वार है। मंदिर के यार्ड में सुन्दर चित्रित छत है जो तीन नक्काशीदार स्तंभों पर खड़ी हुई है। इन स्तंभों और छत में की गयी नक्काशी और चित्रों के माध्यम से कृष्ण के जीवन की कहानी को दर्शाया गया है।
हम आपको बताना चाहेंगे कि राजाधिराज द्वारकाधीश मंदिर का इतिहास लगभग 200 साल पुराना है। द्वारकाधीश जगत मंदिर का निर्माण 1814 में भगवान श्रीकृष्णा के भक्त और ग्वालियर राज के कोषाध्यक्ष सेठ गोकुलदास पारीख द्वारा शुरू किया गया। निर्माण काल में ही इनका देहांत हो गया तो उनके देहांत के बाद उनके पुत्र लक्ष्मीचन्द्र ने मंदिर का निर्माण पूरा कराया था।
द्वारकाधीश मंदिर को वर्ष 1930 में पूजन के लिए पुष्टिमार्ग के आचार्य गिरधरलाल जी को सौप दिया गया था और तभी से इस मंदिर में पुष्टिमार्गीय विधि के अनुसार पूजा-पाठ होता आ रहा है। इस प्रकार आजकल इस मंदिर का बंदोबस्त वल्लभाचार्य सम्प्रदाय देखता है।
मुख्य भाग में भगवान् कृष्ण और उनकी प्रिय राधा की मूर्तियाँ हैं। इस मंदिर में दूसरे देवी देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं।
द्वारकाधीश मन्दिर के पट एक दिन में आठ बार खुलते हैं । इन्हें झांकी कहा जाता है। मन्दिर आनेवाले श्रद्धालु इन्ही झांकियों के समय के अनुसार मन्दिर पहुंचकर ठाकुर जी के दर्शन कर स्वयं को धन्य करते हैं।
यह मंदिर विश्राम घाट के नज़दीक है जो शहर के किनारे बसा प्रमुख घाट है। इस मंदिर रोज़ाना हज़ारों की संख्या में पर्यटक आते हैं । यहां की होली और जन्माष्टमी के समय में यहाँ भीड़ बढ़ जाती है। यह अपने झूला उत्सव के लिए भी मशहूर है। जो हर श्रावण महीने के अंत में आयोजित होता है। जो भारत की प्राचीन परंपरा से जुड़ा हुआ है और इससे बरसात की शुरुआत का आगाज़ भी होता है।
कैसे पहुंचें:
बाय एयर
मथुरा से 46 किलोमीटर दूर खेरिअा एयर पोर्ट आगरा उत्तर प्रदेश मथुरा से 136 किलोमीटर दूर इंदिरा गाँधी अंतराष्ट्रीय एयरपोर्ट नई दिल्ली
ट्रेन द्वारा
मथुरा से बड़े शहरो के लिए लगातार ट्रेने है रेलवे स्टेशन : मथुरा जंक्शन, मथुरा कैंट
सड़क के द्वारा
मथुरा बड़े शहरो से बस द्वारा जुड़ा हुआ है बस स्टेशन : मथुरा
Mathura Dwarkadhish Temple : उत्तर प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के तहत जारी गाइड लाइन में छूट देने के साथ ही भारत के विख्यात द्वारकाधीश मन्दिर में दर्शन का समय बदल दिया और कल 23 अगस्त से श्रद्धाल आठो झांकियों के दर्शन कर सकेंगे।
मन्दिर के जन संपर्क एवं विधि अधिकारी राकेश तिवारी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने दिन का लॅाकडाउन पूरी तरह समाप्त करने के कारण मन्दिर के गोस्वामी ब्रजेश कुमार की अनुमति से दर्शन के पुराने समय को फिर से चालू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि झांकियों का समय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बढ़ाया गया है लेकिन मन्दिर में प्रवेश में कोरोना नियम उसी प्रकार लागू होंगे तथा बिना मास्क पहने श्रद्धालु को मन्दिर में प्रवेश नहीं मिलेगा तथा प्रत्येक श्रद्धालु को सामाजिक दूरी बनाए रखना आवश्यक होगा।
जहाँ हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन द्वारकाधीश के दर्शन के लिए आते हैं। द्वारकाधीश मंदिर मानसून की शुरुआत मनाये जाने वाले अद्भुद झूले उत्सव के लिए भी जाना-जाता है, जिस दौरान हजारों की संख्या में श्र्धालुयों और पर्यटकों की भीड़ देखी जाती है।
“द्वारकाधीश का मंदिर” अपनी प्रसिद्ध वास्तुकला और भक्तिमय वातावरण के साथ साथ मंदिर में मनाये जाने वाले कुछ उत्सवो के लिए भी काफी प्रसिद्ध है जिन्हें बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
जन्माष्टमी
जन्माष्टमी या भगवान कृष्ण जन्मोत्सव, द्वारकाधीश मंदिर और पूरे शहर में बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव के दौरान द्वारकाधीश मंदिर और मथुरा नगरी को बिलकुल दुल्हन की तरह सजाया जाता है। जबकि मंदिर में भगवान् श्री कृष्णा जी की मूर्ति को जल, दूध और दही से नहलाया जाता है उनका श्रृंगार किया जाता है और अंत में उनके पालने में विराजमान किया जाता है। इस पवित्र उत्सव के दौरान कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमे देश के विभिन्न कोनो से हजारों श्रद्धालु शामिल होते है।
हिंडोला उत्सव
द्वारकाधीश जगत मंदिर मथुरा का दूसरा प्रसिद्ध उत्सव हिंडोला उत्सव है, जो श्रावण (अगस्त-सितंबर) मास के दौरान मनाया जाता है। इसे “झुला उत्सव” के नाम से भी जाना जाता है।
इस उत्सव में राधा रानी और कृष्णा जी की मूर्ति को सोने चांदी से लेकर, फूल पत्ती, जरी, रंग बिरंगे वस़्त्रों से लेकर फलों से मिलकर बने हिंडोला या झूले में रखा जाता है और उन्हें झुलाया जाता है।
आरतियों का समय
- मंगला : प्रात: 6.30 – प्रातः 7.00 बजे तक
- श्रृंगार : प्रात: 7.40- 7.55 बजे तक
- ग्वाल : सुबह 8:25 – 8:45 बजे तक
- राजभोग : सुबह 10.00 बजे – सुबह 10.30 बजे तक
- उत्तानपाद : शाम 00 – 4.20 बजे तक
- भोग : शाम 4.45 – 05 बजे तक
- आरती : शाम 5.20 बजे – शाम 5.40 बजे तक
- सयान : शाम 6.30 – शाम 7.00 बजे तक
शीतकाल
- मंगला : प्रात: 6.30 – 7:00 बजे तक
- श्रृंगार : प्रात: 7:40 – 7:55 बजे तक
- ग्वाल : सुबह 8.25 – 45 बजे तक
- राजभोग : सुबह 10:00 बजे – सुबह 10:30 बजे तक
- उत्तरपन्न : दोपहर 3:30 बजे – 3:50 बजे तक
- भोग : शाम 4:20 बजे – शाम 4:40 बजे तक
- आरती : शाम 6:00 बजे
द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन का समय
द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन का समय
गर्मियों में
- सुबह 6.30 बजे से 10.30 बजे तक
- शाम 4.00 बजे से 7.00 बजे तक खुलता है
सर्दियों में
- सुबह 6.30 बजे से 10.30 बजे तक
- शाम 4.00 बजे से 6.00 बजे तक रहता है
द्वारकाधीश जगत मंदिर का प्रवेश शुल्क
मंदिर में प्रवेश और द्वारकाधीश के दर्शन के लिए कोई भी शुल्क नही है। यहाँ आप बिना किसी शुल्क का भुगतान किये द्वारकाधीश जगत मंदिर में घूम और दर्शन कर सकते है।
यदि आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ मथुरा के प्रमुख धार्मिक स्थल, द्वारकाधीश जगत मंदिर घूमने जाने का प्लान बना रहे है तो क्या आप जानते है? मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर के अलावा भी लोकप्रिय धार्मिक और पर्यटक स्थल मौजूद है जिन्हें आप अपनी द्वारकाधीश मंदिर की यात्रा में घूमने जा सकते है –
द्वारकाधीश मंदिर घूमने जाने का सबसे अच्छा समय –
मथुरा के प्रमुख मंदिर और पर्यटक स्थलों की यात्रा भी करने वाले है। तो उसके लिए अगस्त से मार्च का समय सबसे बेस्ट टाइम होता हैं, क्योंकि इस समय मथुरा का मौसम बहुत खुशनुमा होता है। मौसम बहुत खुशनुमा होने के साथ साथ इन महीनो में जन्माष्टमी, हिंडोला उत्सव और होली जैसे प्रसिद्ध त्यौहार भी होते है जिन्हें मथुरा नगरी बड़े धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
मथुरा में रुकने के लिए जगहें
उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्यटक और तीर्थ स्थल होने के कारण मथुरा में सभी बजट की होटल्स, लोज और धर्मशाला उपलब्ध है, जिनमे कोई भी पर्यटक अपनी मथुरा की यात्रा में रुक सकता है। इसीलिए यदि आप मथुरा की यात्रा पर जाने से पहले मथुरा में रुकने के लिए जगहें सर्च कर रहे हैं। तो आप बेफिक्र होकर मथुरा की यात्रा पर चले जाएँ क्योंकि यहाँ आपको सभी टाइप की होटल्स और लोज मिल जाएगी जिनको आप आपनी चॉइस के अनुसार सिलेक्ट कर सकते है।
द्वारकाधीश मंदिर मथुरा कैसे जाएँ
अगर आप हिंदू भगवान कृष्ण के जन्मस्थान मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर की यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं और द्वारकाधीश मंदिर मथुरा पहुँचने का आसान तरीका जानना चाहते है,
तो हम आपको बता दें कि मथुरा भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है, जहां आप परिवहन के विभिन्न साधनों से पहुंच सकते हैं और मथुरा पहुचने के बाद आप आसानी से द्वारकाधीश मंदिर पहुच जायेंगे।
फ्लाइट से मथुरा कैसे पहुँचे
आगरा, मथुरा का सबसे नजदीकी घरेलू हवाई अड्डा है, जो मथुरा से लगभग 58 किलोमीटर दूर है। जबकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली में है। यह एयरपोर्ट मथुरा से लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
आप दोनों एयरपोर्ट में से किसी पर भी पहुंचकर बस या टेक्सी बुक करके मथुरा आ सकते है।
रेल (ट्रेन) से मथुरा कैसे पहुँचे
मथुरा एक रेलवे जंक्शन है। जो मध्य और पश्चिम रेलवे का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है, और देश के प्रमुख शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। मथुरा की यात्रा के लिए आप सभी प्रमुख शहरों से ट्रेन पकड़ सकते हैं।
सड़क मार्ग मथुरा कैसे पहुँचे
मथुरा सड़क मार्ग द्वारा विभिन्न शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इसीलिए सड़क मार्ग से मथुरा की यात्रा करना बेहद सुविधाजनक और आसान है।
मथुरा के लिए आसपास के सभी प्रमुख शहरों से नियमित रूप से बसें भी संचालित की जाती है जिनसे कोई भी आसानी से मथुरा आ सकता है। यदि आपके पास अपना निजी वाहन है तो आप आराम से मथुरा की यात्रा कर सकते हैं।
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