पोतरा कुंड मथुरा
[पोतरा कुंड मथुरा की शानदार वीडियो]पोतरा कुंड मथुरा
पोतरा कुंड मथुरा का एक शानदार दर्शनीय स्थल है। पोतरा कुंड अपनी स्थापत्य कला की खूबसूरती के साथ ही मथुरा के इस स्थान के पौराणिक महत्व की भी गवाही दे रही है।
इस कुंड में प्रवेश करने के लिए चारों दिशाओं में चार खूबसूरत दरवाजे है। इसमें जल तक पहुंचने के लिए अर्थात नीचे उतरने के लिए बड़ी-बड़ी सीढि़यां हैं। कुंड के चारों ओर बैठने के लिए दरवाजे वाली कोठरियां भी बनाई गई हैं।
किसी समय यात्री व पर्यटक इनमें बैठकर इसकी शानदार खूबसूरती के नजारे लेते थे। यमुना कार्ययोजना लागू होने के दौरान इस कुंड का जीर्णोद्धार कराया गया। इसके साथ ही उसकी बेरीकेडिंग भी करा दी गयी अर्थात इसी बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया। अब इसे केवल बाहर से ही निहारा जा सकता है।
आप भी सोचते होंगे कि अधिकतर कुंडों के नाम किसी ने किसी तीर्थ पर आधारित हैं जबकि इस कुंड का नाम पोतरा कुंड कुछ अजीब सा लगता है। पोतरा एक अंग वस्त्र है जो नवजात शिशुओं की लंगोटी की तरह कार्य करता है।
कहा जाता है कि इस कुंड में भगवान श्री कृष्ण के जन्म लेने के उपरांत उनके पोतरे धोए गए थे इसलिए कुण्ड का नाम पोतरा कुंड हो गया।
जैसा कि हमने बताया कि इसकी चारों दिशाओं में चार दरवाजे बने हुए हैं। उनमें से एक दरवाजा कृष्ण जन्मभूमि के ओर जाता है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कृष्ण जन्म भूमि में कृष्ण का जन्म लेने के उपरांत इसी मार्ग से देवकी मैया भगवान कृष्ण के पोतरे धोने के लिए यहां आई होंगी।
इस स्थान की मान्यता और देखने के लिए आने वाले भक्तों को ध्यान में रखते हुए विशेष पर्वो पर खासकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर इस कुंड पर संगीतमय फौवारे के साथ विशेष लाइटिंग की जाती है। जो देखते ही बनती है। इसका संगीतमय फौवारे और रंग बिरंगी प्रकाश की छवियां मन को मोह लेती हैं।
पोतरा कुंड के संगीतमय फौवारे के साथ विशेष लाइटिंग आप भी देखिए और इसके संगीत और लाइटिंग का आनंद प्राप्त कीजिए।
जैसा कि हमने बताया कि यहां की मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होने के बाद उनकी मां देवकी ने अपने लाला के वस्त्र-उपवस्त्र इसी कुंड में धोए थे। इसलिए आज भी इस विशाल कुंड को पवित्र माना जाता है। कहा जाता है कि इस कुंड की गहराई का किसी को अंदाजा नहीं है। इस कुंड में पानी अंदरूनी स्रोत से आता रहता है। इसके लिए कुंड में जगह-जगह स्रोत बनाए गए हैं। इस कुंड की गहराई का किसी को अंदाजा नहीं है।
ऐसा कहा जाता है कि बहुत पहले यह कुंड कच्चा हुआ करता था। जिसे बाद में 1839 में मराठा माधव राज सिंधिया ने इसे पक्का कराया था, और इसके अंदर पानी पहुंचने की व्यवस्था, यमुना से की गई थी।
Potra Kund, Mathura
It is believed that this pond (originally a mud pond, later renovated by the Maratha general Madhav Sindhia in 1839 AD) was the site where Lord Krishna's clothes were washed.
Post a Comment
Post a Comment