क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि संसार में यदि रंग न होते तो सब कुछ कितना नीरस लगता लेकिन क्या आप जानते हैं कि रंग अपने आप में एक साइंस हैं जो लाइट यानी प्रकाश का हिस्सा हैं। रंगों से जुड़ी कई रोचक बातें हैं लेकिन सबके रोचक बात तो यही है कि रंगों का कोई अस्तित्व नहीं है। ये हमारे दिमाग द्वारा बनाए जाते हैं।
हम रंगों को बिल्कुल उसी तरह पहचानते हैं, जैसे हमें स्वाद का पता चलता है। जब हम खाते हैं तो हमारी जीभ पर मौजूद 'टेस्ट बड्स' यानी स्वाद ग्रंथियां हमें मीठे, नमकीन, तीखे और खट्टे की पहचान कराती हैं।
इसी तरह जब हम कोई दृश्य देखते हैं तो हमारी आंखों में मौजूद 'विजुअल नर्ब्स' (देखने में मदद करने वाली नसें) रंगों को पहचानती हैं।
‘रंगों' का संसार
सूर्य से जो रोशनी आती है, उसे देखा होगा तुमने उसका कोई रंग नहीं दिखता । वास्तव में यह रंगीन किरणों से बनी होती है लेकिन इन रंगों को कुछ खास समय पर ही देखना संभव है। जैसे बारिश के वक्त जब इंद्रधनुष बनता है तो हम उसमें 7 रंग देखते हैं- और ये सात रंग है बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल।
'फ्रीक्वेंसी' तथा 'वेवलेंथ' का अर्थ
सूर्य की यह रोशनी पूरे अंतरिक्ष यानी स्पेस में तरंगों की तरह घूमती है। इन तरंगों की एक 'फ्रीक्वेंसी' और एक 'वेवलेंथ' होती है। एक सैकेंड में इन तरंगों द्वारा जितनी बार ऊंचाई और गहराई नापी जाती है, उसे ही 'फ्रीक्वेंसी कहते हैं। एक ऊंचाई से दूसरी ऊंचाई या एक गहराई से दूसरी गहराई के बीच की दूरी को 'वेवलेंथ' कहते हैं।
रंगीन प्रकाश की किरणों के विभिन्न 'वेवलेंथ' होते हैं, जो श्रृंखला समूह बनाते हैं, जिसे लाइट स्पैक्ट्रम कहते हैं। बैंगनी और लाल रंग स्पैक्ट्रम के दो सिरे हैं।
कोई भी प्रकाश, जिसकी वेवलेंथ बैंगनी से कम और लाल से ज्यादा है तो वैसी रोशनी हम नहीं देख सकते हैं।
कहां से आया 'कलर' शब्द
रंग को अंग्रेजी में' कलर' कहते हैं। यह शब्द लैटिन शब्द 'कोलोस' से आया है जिसका मतलब हैं 'कवर' या 'कवरिंग'।
सबसे लोकप्रिय रंग
* ढेर सारे रंगों में से कुछ चुनिंदा रंग हैं जो अधिकतर लोगों को पसंद आते हैं। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार दुनिया का सबसे लोकप्रिय रंग है नीला संसार भर के करीब 40 प्रतिशत लोगों ने नीले रंग को अपना पंसदीदा रंग बताया है।
* वहीं 14 प्रतिशत लोग बैंगनी को अपना पसंदीदा रंग बताते हैं। रिसर्च में इस बात का पता लगाया गया है कि लाल और हरा रंग भी सबसे ज्यादा पंसद किए जाते हैं लेकिन इनका स्थान दूसरे और तीसरे नंबर पर आता है। सफेद, संतरी और पीला रंग सबसे कम पंसद किए जाने वाले रंगों में से है।
नवजात बच्चे सबसे पहले लाल रंग की तरफ आकर्षित होते है क्योंकि लाल रंग की 'वेवलेंथ' सबसे लम्बी होती है और यही कारण है कि बच्चे की आंख तक ये रंग आसानी से पहुंचते हैं।
*गुलाबी यानी पिंक कलर को मनमोहक रंग बोल सकते हैं। यह गुस्से को कम करता है इसलिए कई देशों में जेल और मैंटल हैल्थकेयर संस्थानों में दीवारों को गुलाबी रंग से रंगा जाता है, ताकि कैदियों व रोगियों पर काबू पाया जा सके। *
शोधकर्ताओं का कहना है कि पीला और नारंगी रंग सबसे ज्यादा भूख बढ़ाने वाले हैं इसीलिए रसोईघर की सजावट में इस रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
इन तथ्यों के आधार पर ही बड़े फास्ट फूड रेस्तरां ने अपने यहां 'कलर स्कीम' को अपनाया है।
जानवर कैसे करते हैं रंगों की पहचान
विभिन्न जानवरों के पास अलग-अलग तरह का कलर विजन' होता है। कुछ के पास काफी कमजोर और कुछ के पास बहुत ही अच्छा। कुछ चिड़ियों और मक्खियों के पास तो 'सुपर कलर विजन होता है और वे ऐसे रंग भी देख सकती हैं जो हम मनुष्यों का देख पाना मुश्किल होता है। *
कुत्ते, बिल्लियां, चूहे और खरगोश के पास रंग देखने की क्षमता काफी कमजोर होती है। वे ज्यादातर भूरे और कुछ नीले तथा पीले रंग देख पाते हैं।
* हमारे अलावा बंदरों, चिड़ियों की विभिन्न प्रजातियां, मछली, गिलहरी भी रंगों को पहचानती हैं। कुछ मामले ऐसे होते हैं जब ये हम मनुष्यों की तरह नहीं देख पाते, पर इस मामले में ये कुत्ते और बिल्लियों से काफी बेहतर हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अच्छे 'कलर विजन' की मदद से जानवर खाना-पानी आसानी से खोज लेते हैं।
* मक्खियां और तितलियां वे रंग भी देख लेती हैं, जो हम नहीं देख सकते। इनके 'कलर विजन' की ताक त "अल्ट्रावॉयलेट'
बैल या सांड लाल रंग नहीं देख सकते
आपने लोगों को यह कहते हुए तो सुना ही होगा कि लाल रंग देख कर बैल और सांड भड़क जाते हैं लेकिन वास्तव में सांड कलर ब्लाइंड' होते हैं। यानी वे रंगों को देख ही नहीं सकते। ये लाल रंग के कपड़े को देख कर नहीं भड़कते, बल्कि उसे हिलाने की हरकत को देख कर भड़कते हैं।
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