कब लगता है सूर्य ग्रहण
कब लगेगा पहला सूर्य ग्रहण- साल का पहला सूर्य ग्रहण भारतीय समय के अनुसार 30 अप्रैल की मध्यरात्रि यानि रात 12 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर सुबह 4 बजकर 7 मिनट तक रहेगा. ये आंशिक सूर्य ग्रहण होगा। यानी चंद्रमा सूर्य के प्रकाश के केवल एक अंश को ही बाधित करेगा। ये पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं होगा।
आंशिक सूर्य ग्रहण ?
साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण आंशिक ग्रहण होगा। आइए जानते हैं क्या होता है आंशिक सूर्य ग्रहण। जब भी कभी सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा नहीं होते तब ऐसी स्थिति में चंद्रमा सूर्य के कुछ ही हिस्सें को ढंक पाता है। इसे ही आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं।
क्या कहता है नासा- नासा के अनुसार, 30 अप्रैल के ग्रहण के दौरान, सूर्य के बिम्ब का 64 प्रतिशत हिस्सा चंद्रमा से अवरुद्ध हो जाएगा। चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक पूर्ण सीधी रेखा में नहीं होंगे की वजह से आंशिक ग्रहण होगा। चन्द्रमा अपनी छाया का केवल बाहरी भाग ही सूर्य पर डालेगा, इसे उपछाया भी कहा जाता है।
आंशिक सूर्य ग्रहण क्या है- नासा के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और पृथ्वी पर छाया डालता है। इस अवस्था में चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह से या आंशिक रूप से ढक लेता है। आंशिक ग्रहण के दौरान, चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता है। इसकी वजह से सूर्य अर्धचंद्राकार आकार में नजर आता है।
कहां-कहां दिखाई देगा आंशिक सूर्य ग्रहण- साल का पहला सूर्य ग्रहण अंटार्कटिका के अतिरिक्त अटलांटिक क्षेत्र, प्रशांत महासागर और दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी पश्चिमी भागों में दिखाई देगा। ये सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा इसलिए भारत में इस ग्रहण का धार्मिक प्रभाव और सूतक मान्य नहीं होगा।
क्या होता है सूतक काल ( Sutak Kaal)
ग्रहण के दौरान और ग्रहण के पहले कुछ घंटों का समय सूतक काल कहलाता है। धार्मिक नजरिए से सूतक काल का बहुत ही अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य या पूजा-पाठ वर्जित होता है। सूर्य ग्रहण होने पर ग्रहण लगने से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है वहीं चंद्र ग्रहण में ग्रहण शुरू होने से 5 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इस कारण से इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। जिन स्थानों पर सूर्य ग्रहण होगा वहां पर सूतक काल प्रभावी माना जाएगा।
सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या का संयोग
आज साल 2022 का पहला सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या का खास संयोग बनना चाहिए था लेकिन भारत में दृष्टि गोचर न होने का कारण भारत में इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।
सूर्य ग्रहण और शनि अमावस्या की तरह का संयोग वर्षों में बनता है। लोग शनि अमावस्या पर शनि दोषों से मुक्ति के लिए गंगा स्नान, दान और पितरों का तर्पण किया जाता है।
सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भी ग्रहण लगता है इसका बुरा प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है ऐसे में ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं विशेष ध्यान रखना चाहिए।
★ गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि ग्रहण के दुष्प्रभाव से भोजन दूषित हो जाता है, इसलिए पहले से रखे पके हुए भोजन पर तुलसी का पत्ता या गंगाजल डाल दें।
★ गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण के दौरान सूई, चाकू, कैंची जैसी नोकदारी वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। कहा जाता है कि इनका उपयोग करने से गर्भ में पल रहे बच्चे पर दुष्प्रभाव हो सकता है।
★ जब सूर्य ग्रहण प्रारंभ हो और ग्रहण के समापन तक गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, क्योंकि इसका नकारात्मक प्रभाव पल रहे बच्चे पर पड़ता है।
★ गर्भवती महिलाओं को सूर्य ग्रहण को भी नहीं देखना चाहिए। इससे उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
★ सूर्य ग्रहण के समय में गर्भवती महिलाओं को अपने इष्टदेव का स्मरण करना चाहिए।
वहीं इस तरह के संयोग से कुछ राशि के जातकों को विशेष लाभ के मिलने की संकेत हैं। जिनमें मेष, कर्क और वृश्चिक राशि शामिल है।
शनि अमावस्या का महत्व
शास्त्रों में अमावस्या तिथि को पितरों को समर्पित माना गया है। पितरों से जुड़े किसी भी काम को करने के लिए ये तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। साथ ही इस दिन पूजा-पाठ, स्नान, दान आदि का भी विशेष महत्व बताया गया है। यह अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदायी हो जाती है। इस दिन शनि उपासना से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। साथ ही धन और नौकरी संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं।
अमावस्या का स्नान-दान मुहूर्त
30 अप्रैल, शनिवार को प्रात: काल से ही प्रीति योग है, जो सायं 03:20 तक रहेगा। उसके बाद आयुष्मान योग आरंभ होगा। अश्विनी नक्षत्र रात्रि 08:13 तक है। ये योग और नक्षत्र मांगलिक कार्यों के लिए शुभ माने जाते हैं, इसलिए शनि अमावस्या के दिन सुबह से स्नान और दान किया जा सकता है।
- शनि अमावस्या के दिन कर्मफलदाता शनि देव की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
- सुबह स्नान और दान के बाद किसी शनि मंदिर में जाकर शनि देव की पूजा करें।
- शनिदेव को काला या नीला वस्त्र, नीले फूल, काला तिल, सरसों का तेल आदि अर्पित करें।
- जिन पर साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव है, उनको छाया दान करना चाहिए।
- शनि अमावस्या के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को छाता, जूते-चप्पल, उड़द की दाल, काला तिल, सरसों का तेल, शनि चालीसा आदि का दान करें।
- गरीबों को भोजन कराने और असहाय लोगों की मदद करने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं।
- इस दिन शनि देव के मंत्रों का जाप करके भी उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है।
- सरसों का तेल, लकड़ी, जूते-चप्पल आदि भूल से भी इस दिन खरीदकर नहीं लाएं,वरना आपको शनिदेव की कुदृष्टि का सामना करना पड़ सकता है।
- इस दिन शनिदेव मंदिर में शनि के दर्शन करने जाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि भूल से भी उनकी आंखों को न देखें।
- शनि अमावस्या के दिन ध्यान रखें कि घर में लोहे से बनी कोई वस्तु ना लेकर आए। लोहे की चीजें खरीदने से आपकी शारीरिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं।
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