Happy father's day :*
हैप्पी फादर्स डे
पिता को समर्पित एक कविता
आज 18 जून 2023 को प्रातः काल बेला में
बिटिया आई और कान में गुनगुनाई
हैप्पी फादर्स डे माय डियर पापा
और उसके द्वारा लिखी गई एक सुंदर कविता
रिश्ता तो मां से था मेरा
पिता तुम कहां से आ गए
इक अटूट बन्धन में बांध
एक अपनापन सा जगा गए
कोख में एहसास तो होता था
कोई एक फरिश्ता बाहर है
न जाने कौन सा उसके साथ
मेरा रिश्ता एक उजागर है।
रिश्ता तो मां से था मेरा
पिता तुम कहां से आ गए
इक अटूट बन्धन में बांध
एक अपनापन सा जगा गए
बचपन में काँधे पर बैठा
ऊँचाई का भान कराया
नन्हे हाथ पकङ हाथों में
पहला पग आगे बढ़वाया।
तुम गुरु बने और मित्र बने,
ना कोई तुम्हारे जैसा है |
स्नेह, प्रेम और आशीषों से
पथ मेरा सुसज्जित रहता है।
रिश्ता तो मां से था मेरा
पिता तुम कहां से आ गए
इक अटूट बन्धन में बांध
एक अपनापन सा जगा गए
पिता ! तुम तो छत हो मेरी
अचानक से मत हट जाना
मैं हूं नन्ही बिटिया तुम्हारी
यह कभी मत तुम भूल जाना।
तुम्हारे घर पर न होने पर
चहुँ - ओर तुम्हें ढूँढ़ती ऐसे
जल बिन मछली तड़प रही हो
बूंदभर जल की आस मैं जैसे
रिश्ता तो मां से था मेरा
पिता तुम कहां से आ गए
इक अटूट बन्धन में बांध
एक अपनापन सा जगा गए
मां धन्य हो तुम और धन्य में
जो ऐसा फरिश्ता ला कर दिया
हर पल जिसने छाया बनकर
साथ हमारा तुम्हारा है दिया।
घर के दुख सह सह कर
जिसका दिल बना पत्थर जैसा
आंखों में आंसू रोके हुए
उस पत्थर दिल को भी देखा है।
रिश्ता तो मां से था मेरा
पिता तुम कहां से आ गए
इक अटूट बन्धन में बांध
एक अपनापन सा जगा गए
तुम शंकर के आराधक हो,
मस्ती में मस्त उनके जैसे |
वो परमपिता और जगत पिता है
और तुम हो पिता उनके जैसे।
हे जगत पिता मेरी सुन लेना
लंबी उम्र इनको दे देना
हर कठिनाई से लड़ने की शक्ति
मेरे प्रभु इनमें भर देना
लेखिका
कामाख्या
23/6/17/62023
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