राम मंदिर के विशेषताएं
★ राम मंदिर में मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालरूप (श्रीरामलला सरकार का विग्रह), तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार होगा.
★ मंदिर में 5 मंडप होंगे. नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप
★ खंभों व दीवारों में देवी देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियां उकेरी जा रही हैं.
★ मंदिर में प्रवेश पूर्व दिशा से, 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंहद्वार से होगा
★ दिव्यांगजन एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था रहेगी.
★ मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा रहेगा। चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट होगी.
★ परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण होगा. उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर रहेगा.
★ मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान रहेगा.
★ मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित होंगे.
★ दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है एवं तथा वहां जटायु प्रतिमा की स्थापना की गई है.
★ मंदिर में लोहे का प्रयोग नहीं होगा. धरती के ऊपर बिलकुल भी कंक्रीट नहीं है.
★ मंदिर के नीचे 14 मीटर मोटी रोलर कॉम्पेक्टेड कंक्रीट (RCC) बिछाई गई है. इसे कृत्रिम चट्टान का रूप दिया गया है.
★ मंदिर को धरती की नमी से बचाने के लिए 21 फीट ऊंची प्लिंथ ग्रेनाइट से बनाई गई है.
★ मंदिर परिसर में स्वतंत्र रूप से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, अग्निशमन के लिए जल व्यवस्था तथा स्वतंत्र पॉवर स्टेशन का निर्माण किया गया है, ताकि बाहरी संसाधनों पर न्यूनतम निर्भरता रहे.
★ 25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया जा रहा है, जहां दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा रहेगी.
★ मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा भी रहेगी.
★ मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया जा रहा है. पर्यावरण-जल संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदा हरित रहेगा.
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा : 18 जनवरी की शाम रामलला घूमेंगे अयोध्या नगरी
अयोध्या राम मंदिर (ram mandir news) में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी तेज है। कमान काशी के विद्वान आचार्यों ने संभाल ली है। रामलला के नवीन विग्रह का परिभ्रमण 18 जनवरी को सायं होगा।
अयोध्या राम मंदिर (ram mandir news) में रामलला के पापण प्रतिष्ठा अनुष्ठान की तैयारियों की कमान काशी के विद्वान ऐप पर पढ़ें संभाल ली है। बीती शाम अयोध्या पहुंचे इन विद्वानों ने बुधवार की सुबह कारसेवकपुरम में श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय के साथ भेंट कर आवश्यक चर्चा की। इसके उपरांत तीर्थ क्षेत्र महासचिव ने सभी आचार्यों को रामकोट स्थित आवासीय कार्यालय में भिजवाया। इसके पूर्व आचार्यों ने रामलला का भी दर्शन पूजन किया। इस मौके पर प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान के प्रतिष्ठाचार्य पं. लक्ष्मीकांत दीक्षित के सुपुत्र अरुण दीक्षित ने बताया कि रामलला के नवीन विग्रह का परिभ्रमण 18 जनवरी को सायं होगा।
उन्होंने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान 16 जनवरी को कलश यात्रा व पंचांग पूजन के साथ होगा। 17 जनवरी को यजमान की ओर प्रायश्चित पूजन के साथ अन्य अनुष्ठानिक क्रियाएं होंगी। 18 जनवरी को श्रीरामजन्म भूमि में रामलला के प्रवेश के उपरांत 108 कलशों से उनका अभिषेक कर पूजन होगा जबकि 19 जनवरी से जलाधिवास अन्नाधिवास फलाधिवास व पुष्पाधिवास के हाथ हवन-पूजन भी चलता रहेगा। वहीं 22 जनवरी को मृगशिरा नक्षत्र में निर्धारित 84 सेकेंड के मुहूर्त में अपराह्न 12.29 बजे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान का नेत्रोन्मिलन कर उन्हें दर्पण दर्शन कराएंगे और फिर उनकी महाआरती उतारेंगे। उन्होंने बताया कि इस अनुष्ठान में देश भर के करीब डेढ़ सौ वैदिक आचायों की ओर से चतुर्वेदों के साथ विविध दिव्य ग्रंथों का भी पारायण करेंगे।
मंदिर आंदोलन के नायक अशोक सिंघल के भतीजे सलिल ऐप पर पढ़ें होंगे यजमान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान में मुख्य यजमान की भूमिका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की होगी लेकिन उनके साथ सम्पूर्ण अनुष्ठ की पूर्णता के लिए यजमान के रूप में सलिल सिंघल भी सपत्नीक शामिल होंगे। सलिल विहिप सुप्रीमो रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल के भतीजे है। पांच अगस्त 2020 को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन के समय भी यजमान की भूमिका सलिल सिंघल ने ही निभाई थी। विहिप सूत्रों के अनुसार सलिल सिंघल का स्वास्थ्य इन दिनों अनुकूल नहीं है इसलिए विशेष परिस्थिति के लिए अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक महेश भागचन्दका व विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. रवीन्द्र नारायण सिंह को भी यजमानों की सूची में शामिल किया गया है।
अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के अगुवा रहे नेता अब कहां हैं?

अयोध्या में राम मंदिर की 'प्राण-प्रतिष्ठा' समारोह में राजनीति से लेकर सिने जगत, कारोबार से जुड़ी बड़ी-बड़ी हस्तियों को न्योता दिया गया है.
इनमें भारतीय जनता पार्टी के वे चेहरे भी हैं, जिन्होंने 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व किया था.
कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि आंदोलन के अगुवा रहे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे वरिष्ठ बीजेपी नेताओं से राम मंदिर के उद्घाटन में शामिल न होने का अनुरोध किया गया है.
इसके पीछे उनकी सेहत और उम्र का हवाला दिया गया था. बाद में विश्व हिंदू परिषद के नेता आलोक कुमार ने आडवाणी के पास जाकर उन्हें न्योता दिया. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक जोशी को निमंत्रण दिया गया.
इसके पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मीडिया से कहा था कि लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को न्योता तो दिया गया है, लेकिन उनके समारोह में शामिल होने की संभावना कम है.
उन्होंने कहा, "आडवाणी जी का होना अनिवार्य है लेकिन हम ये भी कहेंगे उनसे कि वह न आएं. डॉक्टर जोशी से मेरी सीधी बात हुई है. मैं यही कहता रहा कि आप मत आइए, और वह ज़िद करते रहे कि वो आएंगे. मैं बार-बार कहता रहा कि आपकी आयु अधिक है, सर्दी है और आपने घुटने भी बदलवाए हैं."

लाल कृष्ण आडवाणी को न्योता देते बीएचपी के नेता
मीडिया में जब चंपत राय के बयान की चर्चा हुई, उसके बाद विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार के आडवाणी से मुलाक़ात करने की तस्वीरें सामने आईं.
समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया, " विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार और विश्व हिंदू परिषद के दूसरे सदस्यों ने पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में 22 जनवरी को आने का न्योता दिया."
वीएचपी ने बताया, "पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को भी समारोह में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया गया."
इन दोनों के अलावा उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा, कल्याण सिंह और अशोक सिंघल जैसे हिंदूवादी नेताओं ने भी राम मंदिर आंदोलन की अगुवाई की.
भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 में जिन मुद्दों पर सत्ता में आए, उनमें राम मंदिर निर्माण भी अहम था. अब राम मंदिर आंदोलन 22 जनवरी को अपने अंजाम तक पहुंचेगा.
इस दिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में पहुंचेंगे तो सभी की नज़र उनपर होगी. लेकिन वे चेहरे कहां हैं, जो इस आंदोलन के अहम किरदार थे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एलके आडवाणी के जन्मदिन के मौके पर उनके साथ
कैसा है आडवाणी और जोशी का स्वास्थ्य?
लालकृष्ण आडवाणी अब 96 साल के हैं और मुरली मनोहर जोशी अगले महीने 90 साल के हो जाएंगे.
नब्बे के दशक में विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों को 'मुक्त करने का' अभियान चलाया और इसके अंतर्गत लाल कृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा की. हालांकि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने समस्तीपुर ज़िले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.
आडवाणी के ख़िलाफ़ मस्जिद गिराने की साज़िश का आपराधिक मुक़दमा भी चला.
इसी साल आठ नवंबर को आडवाणी के जन्मदिन पर बधाई देने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे बीजेपी के शीर्ष नेता उनके घर पहुंचे थे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आडवाणी के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, "पूर्व उप प्रधानमंत्री और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष एलके आडवाणी जी से मिलने उनके आवास पर गया और उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं."
मुरली मनोहर जोशी आडवाणी के बाद भारतीय जनता पार्टी के दूसरे बड़े नेता हैं जो राम मंदिर आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिसा लेते रहे.
छह दिसंबर 1992 को घटना के समय वो विवादित परिसर के नज़दीक मौजूद थे. गुंबद गिरने पर उमा भारती उनसे गले मिली थीं. वह वाराणसी, इलाहाबाद और कानपुर से सांसद रह चुके हैं.
ये दोनों ही नेता फिलहाल बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में हैं. लेकिन ये दोनों ही सार्वजनिक जीवन में अब ख़ास सक्रिय नहीं दिखते.

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उमा भारती
तीन दशक पहले राम मंदिर आंदोलन की अगुवा में उमा भारती भी शामिल थीं. इस आंदोलन से उमा भारती को देशभर में राजनीतिक पहचान मिली.
बाबरी विध्वंस के दस दिन बाद मामले की जांच के लिए बनाए गए लिब्राहन आयोग ने उनकी भूमिका दोषपूर्ण पाई. उमा भारती पर भीड़ को भड़काने का आरोप लगा जिससे उन्होंने इनकार किया था.
वह केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहीं. उमा भारती 2003 से 2004 के बीच मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रहीं.
हालांकि वह 2019 के संसदीय चुनावों से अलग रहीं. इसके बाद से पार्टी में उन्हें किनारे किए जाने की अटकलें चलती रहीं.
हाल ही में हुए मध्य प्रदेश चुनाव के लिए बीजेपी ने जब अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी की, तो उसमें उमा भारती का नाम नहीं था.
उमा भारती ने मध्य प्रदेश चुनाव से ठीक पहले अपने लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा ज़ाहिर की थी.

साध्वी ऋतंभरा
साध्वी ऋतंभरा एक समय हिंदुत्व की फायरब्रांड नेता थीं.
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में उनके ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश के आरोप तय किए गए थे.
अयोध्या आंदोलन के दौरान उनके उग्र भाषणों के ऑडियो कैसेट पूरे देश में सुनाई दे रहे थे जिसमें वे विरोधियों को 'बाबर की औलाद' कहकर ललकारती थीं.
वृंदावन में साध्वी ऋतंभरा का वात्सल्यग्राम नाम का आश्रम है.
साध्वी ऋतंभरा उन लोगों में से हैं जिन्हें सबसे पहले 22 जनवरी का निमंत्रण मिला.

एलके आडवाणी, कल्याण सिंह और विनय कटियार (दाएं से बाएं)
कल्याण सिंह
छह दिसंबर 1992 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह थे. उन पर आरोप था कि उनकी पुलिस और प्रशासन ने जान-बूझकर कारसेवकों को नहीं रोका.
बाद में कल्याण सिंह ने बीजेपी से अलग होकर राष्ट्रीय क्रांति पार्टी बनाई लेकिन वह फिर बीजेपी में लौट आए.
कल्याण सिंह का नाम उन 13 लोगों में शामिल था जिन पर मस्जिद गिराने का साज़िश का आरोप लगा था.
अगस्त 2021 में कल्याण सिंह का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.
अशोक सिंघल
रामजन्मभूमि आंदोलन को जन्म देने वालों में अशोक सिंघल का नाम भी गिना जाता है.
मंदिर निर्माण आंदोलन चलाने के लिए जनसमर्थन जुटाने में अशोक सिंघल की अहम भूमिका रही. कई लोगों की नज़रों में वह राम मंदिर आंदोलन के 'चीफ़ आर्किटेक्ट' थे.
वह 2011 तक वीएचपी के अध्यक्ष रहे और फिर स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था. 17 नवंबर 2015 को उनका निधन हो गया.
विनय कटियार और प्रवीण तोगड़िया
राम मंदिर आंदोलन के लिए 1984 में 'बजरंग दल' का गठन किया गया था और पहले अध्यक्ष के तौर पर उसकी कमान आरएसएस ने विनय कटियार को सौंपी थी.
कटियार का राजनीतिक क़द बढ़ता गया और वह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव भी बने. कटियार फ़ैज़ाबाद (अयोध्या) लोकसभा सीट से तीन बार सांसद चुने गए. वह राज्यसभा सांसद भी रहे. हालांकि, साल 2018 में कार्यकाल ख़त्म होने पर उन्हें दोबारा टिकट नहीं मिला.
वहीं, विश्व हिंदू परिषद के दूसरे नेता प्रवीण तोगड़िया राम मंदिर आंदोलन के वक्त काफी सक्रिय रहे थे. लेकिन उन्होंने वीएचपी से अलग होकर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद नाम का संगठन बनाया. राम मंदिर बनने से पहले वह कई बार पीएम मोदी की आलोचना भी करते रहे.

अशोक सिंघल (दाएं) और प्रवीण तोगड़िया (फ़ाइल फ़ोटो)
चंपत राय ने और क्या-क्या बताया?
चंपत राय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा को समारोह का न्योता देने के लिए एक तीन सदस्यों वाली टीम बनाई गई है.
उन्होंने कहा, "छह दर्शन परंपराओं के शंकराचार्य और 150 साधु-संत इसमें भाग लेंगे. इनके अलावा करीब 4000 संत और 2,200 अन्य मेहमानों को भी समारोह के लिए न्योता दिया गया है."
चंपत राय ने बताया कि काशी विश्वनाथ, वैष्णो देवी जैसे बड़े मंदिरों और धार्मिक तथा संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों को भी न्योता भेजा गया है.
राय ने कहा कि धर्म गुरु दलाई लामा, केरल की माता अमृतानंदमई, योग गुरु रामदेव, सिनेमा जगत के सितारे जैसे रजनीकांत, अमिताभ बच्चन, माधुरी दीक्षित, अरुण गोविल, फ़िल्म निर्देशक मधुर भंडारकर और जाने-माने कारोबारी जैसे मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, प्रसिद्ध पेंटर वसुदेव कामत, इसरो के डायरेक्टर नीलेश देसाई सहित कई बड़ी हस्तियों को भी फंक्शन में बुलाया गया है.
उन्होंने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद 24 जनवरी से अगले 48 दिनों तक 'मंडल पूजा' होगी. श्रद्धालुओं के लिए मंदिर 23 जनवरी से खुल जाएगा.
राय ने बताया कि मेहमानों के रुकने के लिए अयोध्या में तीन से अधिक जगहों पर पूरे प्रबंध किए गए हैं. इसके अतिरिक्त अलग-अलग मठों, मंदिरों और आम लोगों के परिवारों ने भी 600 कमरे तैयार रखे हुए हैं.
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