1.2 लीप ईयर या लीप वर्ष

लीप ईयर या लीप वर्ष 

हम जानते हैं की सामान्य वर्ष में 365 दिन होते हैं और चौथे वर्ष में 366 दिन । इसी 366 दिन वाले वर्ष को हम लीप वर्ष या लीप ईयर कहते हैं अर्थात वह वर्ष जिसमें 366 दिन होते हैं, लीप ईयर या लीप वर्ष कहलाता है।

अब आप जानना चाहेंगे कि यह जो 1 दिन है, यह कहां एडजस्ट होगा। तो हम आपको बता दें की फरवरी वर्ष का सबसे छोटा महीना होता है । इस आम या सामान्य वर्ष का फरवरी माह 28 दिन का होता है । यह जो अतिरिक्त दिन है इसी फरवरी माह में जोड़ दिया जाता है इस प्रकार लीप वर्ष में यह 29 दिन का हो जाता है । इस दिन को लीप डे या लीप दिन कहते हैं।

ऐसा क्यों होता है?
यह धरती के सूर्य की परिक्रमा करने से जुड़ा हुआ है। पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने में 365.242 दिन लगते हैं जो लगभग 365 दिन 6 घंटे के बराबर है। इस प्रकार हम पाते हैं कि एक कैलेंडर वर्ष से चौथाई दिन अधिक। यह 14 दिन प्रत्येक चौथे साल में 1 दिन बन जाता है जिसे हम बूढ़े कहते हैं अगर हम इस अतिरिक्त दिन को हर चौथे साल में नहीं जुड़ेंगे तो हर साल कैलेंडर में 6 घंटे हट जाएंगे और फिर 100 साल में कैलेंडर से 24 दिन गायब हो जाएंगे। हम जानते हैं कि पृथ्वी के परिभ्रमण से ही रेत में बनती है तो हम पाएंगे कि प्रत्येक 100 साल में लगभग ऋतु में 1 महीने (लगभग 24 दिन) पिछड़ जाएंगी।

कैसे पता किया जाता है कोई वर्ष लीप वर्ष है या नहीं?
यह जानने के लिए की वर्ष लीप वर्ष है या नहीं हम उसे 4 से भाग देते हैं । यदि वह 4 से विभाजित हो जाता है, तो वह वर्ष लीप वर्ष होगा। यह एक जनसाधारण नियम है।

जैसे वर्ष 2012 को 4 से भाग किया जा सकता है इसी प्रकार 2016, 2020 भी चार से भाज्य है। आत: ये सभी लीप वर्ष होंगे । इसी प्रकार 4 साल बाद आने वाला 2024 भी लीप वर्ष होगा।

यहां हमें एक और बात ध्यान रखनी होगी कि यदि कोई वर्ष 100 से विभाजित हो जाए तो वो लीप वर्ष नहीं है। जैसे 2100 चार और सौ दोनों से विभाजित हो जाता है। अतः वर्ष 2100 लीप वर्ष नहीं होगा। इसी प्रकार 2200 और 2300 भी लीप वर्ष नहीं होंगे।
इसके विपरीत यदि कोई साल 400 से पूरी तरह से विभाजित हो जाये तो वह भी लीप वर्ष होगा। जैसे 2000 तथा 2400 दोनों चार और 100 के साथ-साथ 400 से भी विभाजित हो जाता है । अतः वर्ष 2000 और 2400 दोनों ही लीप वर्ष होंगे।

हर शताब्दी साल लीप वर्ष क्यों नहीं होता?
हर शताब्दी साल लीप वर्ष नहीं होता क्योकि वास्तव में पृथ्वी सूर्य की प्रक्रिमा 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनट और 45 सेकंड में पूरी करता है। हर चार सालो में एक दिन जोड़कर हम सौ साल के काल में काफी ज्यादा जोड़ देते है। वास्तव में तब हम यह नहीं सोचते कि हर चार साल में एक दिन जोड़ा जाता है तब हम एक छोटे से अंतर से अधिक संशोधन कर लेते है, जो 400 साल में जाकर पूरे 1 दिन में परिवर्तित होता है। इसी कमी को दूर करने के लिए प्रत्येक 100 साल या शताब्दी लीप वर्ष नहीं होती जबकि 400 साल में 1 दिन अतिरिक्त होने के कारण वह लीप वर्ष हो जाता है। इस बात को हम ऊपर आपको समझा चुके हैं।

लीप ईयर में फरवरी में 29 दिन

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