भयंकर त्रासदी के गवाह हिरोसीमा और नागासाकी

हिरोशिमा - नागासाकी

हिरोशिमा 6 अगस्त 1945 की सुबह अमेरिकी वायु सेना ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम "लिटिल बॉय" गिराया था। तीन दिनों बाद 9 अगस्त 1945 अमरीका ने नागासाकी शहर पर "फ़ैट मैन" परमाणु बम गिराया। हिरोशिमा जापानी सेना को रसद की आपूर्ति करने वाले कई केंद्रों में से एक था।

राष्ट्रपति ने कहा कि 10 दिन पहले पॉट्सडैम घोषणा जारी की गई थी जिसमें जापान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा गया था, यह उसके लिए भारी विनाश से बचने का आख़िरी मौक़ा था। राष्ट्रपति ने कहा था, "अगर अब वो हमारी शर्तों को नहीं मानते है तो उन्हें आसमान से विनाश की ऐसी बारिश का सामना करना पड़ेगा जैसी कि पहले कभी नहीं हुई। इसके बाद समुद्र और ज़मीन के रास्ते ऐसे हमले होंगे जैसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखे, लेकिन यह हमले उसी युद्ध क्षमता का परिचायक होंगे जिससे वो अच्छी तरह से परिचित हैं।"


01. वैज्ञानिको ने द्रव्य में संचित ऊर्जा का पता लगाया। उन्होने द्रव्य के सूक्ष्म कण में छिपि ताकत को बाहर निकालने का प्रयास किया। उन्होने इसके लिए प्रयोगशाला में कितने ही प्रयोग किये। अंततः वे इसे बाहर निकाले में सफल हो गये। उन्होने श्रृंखला भिक्रिया को खोज लिया था। रेडियो एक्टिव तत्व यूरेनियम-235 इस अभिक्रिया में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख पदार्थ था। जो क्षण भर में धमाकों की श्रृंखला की एक कड़ी प्रस्तुत करती है जिससे ऊश्मा व प्रकाश रूपी अपार ऊर्जा मुक्त होती है। इसी आधार पर परमाणु बम तैयार कर लिया गया। इसका परिक्षण भी बंजर भूमि पर कर लिया था। इस प्रयोग की खबर वाशिंगटन व लंदन को भेज दी गई थी। आज तो वैज्ञानिको ने हाइड्रोजन बम जैसे अणु बम बना लिये हैं जो परमाणु बम से ज्यादा ऊष्मा व प्रकाश रूपी अपार ऊर्जा मुक्त करते है तथा उससे कई गुना खतरनाक है।

यह वह समय था जब तीसरा विश्वयुद्ध छिडा हुआ था। देश आपस में लड़ रहे थे। यूरोप की लडाई वैज्ञानिक थी जिसमें वह राकेटों व हवाई जहाजों का प्रयोग कर रहा था। इस युद्ध से पश्चिम के कई देश परेशान थे। वे इससे मुक्ति चाहते थे। इस युद्ध में अनगिनत लोग बंदी बना लिए गये थे। इस युद्ध के रोकने का मतलब था उन अनगिन लोगों का अंत जो पहले से ही बंदी अवस्था में भूख व प्यास की यातना सह रहे थे। इस समय राजनेताओं को सैनिको से साहनुभूति थी।

2. पश्चिम के देशों में विवाद चलता रहा कि जापान पर परमाणु बम गिराया जाये या नहीं। फैसला तीन व्यक्तियों के हाथ था। रापति ट्रूमैन, प्रधान मंत्री एटली तथा मास्टर च्यांग काईशेंक। फ्रेकलिन रूजबेल्ट चौथी बार राष्ट्रपति बनें तथा चर्चिल अविष्वसनीय ढंग से हार गये। अमेंरिका के राष्ट्रपति रूजबेल्ट तथा प्रधानमंत्री एटली व मास्टर च्यांग काईशेक ने जापान पर परमाणु बम के प्रयोग की अनुमति दे दी। अमरीकी राष्ट्रपति हैरी. एस. ट्रूमैन ने अटलांतिक महासागर में "आगस्ता" जहाज़ी बेड़े से घोषणा करते हुए कहा है कि 20 हज़ार टन टीनटी क्षमता तथा सबसे बड़े बम से दो हज़ार गुना अधिक शक्तिशाली बम इस्तेमाल में लाए। इस प्रकार एक शहर के पूर्ण विनाश का कार्य प्रारम्भ हो गया।

03. इस बार एक नहीं पूरे ढाई लाख लोगों का शहर निशाने पर था। जहाँ केदियों को यातनाएं दी जाती थीं । अनुमानतः इस शहर में पाँच हजार लोगों शरीफ तथा सामान्य जीवन विता रहें थे। वे अपने दैनिक कार्यो से खुश थे। वे नहीं जानते थे कि उनका जीवन समाप्त होने वाला है। वह शहर एक चमकीले धमाके से पूर्णतया ध्वस्त हो गया। 

04. मौसम व ठिकाने की खोज के लिए सात सुपर वायुयान प्रयोग किये गये। इनके दो हवाई जहाजों में उपकरण व निरिक्षक थे। B-29 में बम रखा गया था। इसमें यदि कोई गडबडी होती तो इसके लिए इबोनिया नामक विमान तैयार था। मैरीन द्वीप के टी-नीन द्वीप से यू0 एस0 वायु सेना के कर्नल टिब्बस ने 06 अगस्त 1945 को सुवह पौने तीन बजे उडान भरी। वे पांच घंटे की उडान के बाद जापान के ऊपर 31,000 फीट की ऊँचाई पर थे। यह बम स्थानीय समयानुसार 8.15 बजे "इनोला गे" कहे जाने वाले एक अमरीकी विमान बी-29 सुपरफोर्ट्रेस से गिराया गया। 

05. हिरोसिमा एक और दिन की तैयारी में था। सूर्य आकाश में साफ मौसम का इशारा कर रहा था। खतरे का शायरन बजा। लोग सर्तक हुए पर यह क्या विमान बिना बम बरसाए ही चले गये। एक भी धमाके की आवाज नहीं हुई। सब कुछ ठीक है का सायरन बजा। लोग अपनी सुरक्षा स्थिती को छोड दैनिक कार्यो में जुट गये। उन्हे यह पता नहीं था कि मौत का राक्षस धीरे-धीरे उनकी ओर बढ रहा है । वे इस बात से चकित थे। परंतु अपने कार्यो में व्यस्त थे। वम चालू करके छोड दिया गया था। बम गिराने वाले काला चष्मा लगाए दूर भागने का प्रयास कर रहे थे। उनके साथ निरिक्षण दल भी था।

06. बम को 31,000 फीट से गिरा दिया गया। उसे 2,000 फीट की ऊचाई पर फटना था। जिससे उसकी ताकत का अधिकतम उपयोग हो सके। बम गिरने के के 42 सेकेंड के बाद तक कुछ भी नहीं हुआ। वह 32 फीट प्रति सेकेंड की गति से नीचे गिरता रहा।

07. अचानक सुर्य छिप गया। सूरज किसी ग्रहण से नहीं बल्कि बम के अंधा करने वाली चमक से छिपा था । कोई धमाका , कोई आवाज या कोई झटका नही था। लोग कुछ भी न समझ सके। जो जीवीत रहे विषेष प्रकार की धुंध से धिरे हुए थे। यह धुंध पिघले पत्थरों, कंकरीट, ईंट, मिट्टी पौधे तथा पशु पक्षी व मानव ऊतकों की थी। घंटो तक शहर धातक बैगनी भूरे रंग की मशरूम रूपी बादलो से ढका रहा। इस बम ने ( भाग तुरंत ही नश्ट कर दिया। इसकी 3/5 भाग आबादी घायल या नश्ट हो गयी। यह बम आशा से ज्यादा शक्ति शाली निकला। इससे 600 गज दूर तक की टाइले पिघल गयीं। यह बम 729 जहाजें से किये गये हमले से अधिक धातक था।

08. बम गिरने बाद की मुख्य घटनाए कभी न भुलाई जा सकतीं थीं।
a) समुद्र का पानी का स्तर ऊपर उठने लगा। एक औरत चीखी। लोग डूबने लगे। उन्हे बचाओ। लेकिन लोग इतने कमजोर थे कि उठ भी न सके। वे किस्तियों पर भी नहीं चढ सकते थे। लडकियों की त्वचा जल कर गिर गई थी। उनका मांस जल चुका था। वे बुरी तरह से कराह रहीं थीं। उनका मांस गंध दे रहा था।
b) अस्पताल की हालत बहुत ही दयनीय थी। वहाँ बिजली नहीं थी। अस्पताल में 10,000 से अधिक लोग पीडित थे। यह एक मात्र अस्पताल था। डाक्टरों को जिस रोशनी में काम करना पडा वह दस नर्सो द्वारा पकडी गई मोमबत्तियों का था। बम पीडित लाग खाना खाने में असमर्थ थे क्योंकि वार्ड तथा अस्पताल के चारों ओर भ्यंकर दुर्गंध फैली हुई थी।
c) हर्से (फ्रेक केलिन्सोरेज) के अनुसार दर्द व पाप की स्थ्ति का वर्णन नही किया जा सकता था। उसने एक झाडी से पानी की पुकार सुनी। वहाँ उसने एक वर्दी देखी वह झाडी चीर कर वहाँ पहुचा उसने बीस व्यक्ति भ्यावह हालत में पडे देखे। उनके चेहरे पूरी तरह जल गये थे। उनकी आँखों के गड्डे खाली थे। उनकी आँखे मोम की तरह पिघल गई थीं। जो तरल का रूप में गालो पर बह रहीं थीं।

09. इसके तीन दिन बाद 09 अगस्त 1945 नागासाकी पर इसी प्रकार का कहर वरपा। इस बार प्रयुक्त बम पहले बम से भी शक्ति शाली था। इन बमों से लगभग 1,60,000 लोग मारे गये थे। हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम को अमेरीका पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डेलानो रूज़वेल्ट के सन्दर्भ में "लिटिल ब्वाय" और नागासाकी के बम को विन्सटन चर्चिल के सन्दर्भ में "फ़ैट मैन" कहा गया।

10. जो कुछ बच गये या इसके दायरे से दूर थे। वे विभिन्न रोगो के शिकार हो गये। हानिकारक विकीर्ण से लोग प्रजनन शक्ति खो बैठे। गर्भवती महिलाओं के गर्भ गिर गये। रक्त में ष्वेत रक्त कणों की मात्रा में अप्रत्यासित कमी आ गई। लोग अनेक रोगों से ग्रसित होने लगे। मामूली जख्म भी ठीक होने का नाम ही नहीं लेता था। उसे ठीक होने में महीनों लग जाते थे। बुखार, दस्त मरोड कभी भी हो जाते थे। ताप 106 डिग्री फारेनहाईट तक बढ जाता था। मसूढों से रक्त बहने लगता था। लाल रक्त कणिकाओ की मात्रा भी कम हो गई। ल्यूकोसाइटस एक स्थान पर एकत्रित होकर केंसर के जन्म देंने लगीं। डाक्टर नई-नई बीमारियो से परेशान थे।

11. हिरोसिमा पर 06 अगस्त 1945 को यूरेनियम आधारित बम गिराया गया था। जिसका नाम फैटमैन था। इसके तीसरे दिन को प्लूटोनियम आधारित बम गिराया गया था। जिसका नाम लिटिल व्वाय था। यह आकार में फैट मैन से छोटा मगर शक्ति में उससे अधिक शक्तिशाली था।

12. इस नरसंहार ने जापानियों की कमर तोड दी। वे आत्म समर्पण को मजबूर हो गये। वह स्थान जहाँ बम गिराया गया था। आज स्मारक स्थल है।



प्रस्तुति 

ऊँ जितेन्द्र सिंह तोमर

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