श्रीमद्भागवत गीता वैदिक शास्त्रों के अंतर्गत आता है। वैदिक शास्त्र दो प्रकार के हैं (१) श्रुति और (२) स्मृति।
श्रुति – सुनने योग्य अर्थात वे ग्रंथ जिनमें भगवान की बातों को सीधा सीधा कहा गया है श्रुति कहलाते हैं, जैसे वेद, उपनिषद, संहिताऐं आदि।
स्मृति – श्रुति ग्रंथों आदि को समझाने के लिए विभिन्न प्रकार के उदाहरणों, कहानियों, तथ्यों, इतिहास आदि के द्वारा समझाने का प्रयास करने वाले ग्रंथों को स्मृति ग्रंथ कहते हैं, जैसे इतिहास, पुराण आदि ।
श्रीमद्भगवद्गीता दोनों ही प्रकार के ग्रंथों में गिनी जाती है क्योंकि यह भगवान की वाणी है इसलिए इसे श्रुति कहा जाता है तथा यह श्रीमद्भागवत पुराण केे भीष्म पर्व में इसका वर्णन मिलता है इसलिए इसे स्मृति कहा जाता है।
श्रीमद्भागवत गीता शब्द का विच्छेद निम्न प्रकार से किया जा सकता है।
श्री+मद्+भागवद्+गीता
श्री (राधिका जी) + मद् (द्वारा मग्न होकर) + भागवद् (भगवान का) + गीता (गीत)।
अर्थात 5000 साल पहले भगवान श्री कृष्ण द्वारा गाया गया दिव्य गीत ही श्रीमद्भागवद् गीता है। यह संस्कृत में गाया गया था।
इसमें कुल 4 पात्र हैं तथा 700 श्लोक हैं । किस पात्र ने कितने श्लोक बोले हैं। यह हम नीचे बता रहे हैं।
कुल श्लोक संख्या 700
कृष्ण उवाच = 574
अर्जुन उवाच = 84
संजय उवाच = 41
धृतराष्ट्र उवाच = 1
कुल श्लोक संख्या = 700
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