भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा का संक्षिप्त वर्णन।
भगवान जगन्नाथ के इस मंत्र का जप करके आप उनकी कृपा दृष्टि प्राप्त करें।
नीलांचल निवासाय नित्याय परमात्मने।
बलभद्र सुभद्राभ्याम् जगन्नाथाय ते नम:।।
जगन्नाथ पुरी के 800 वर्ष पुराने मुख्य मंदिर, जगन्नाथ मंदिर में योगेश्वर श्रीकृष्ण जगन्नाथ जी के रूप में विराजते हैं। हिंदू धर्म में चार धामों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। इन्हीं चारों धामों में से एक जगन्नाथ पुरी नामक धाम है। जगन्नाथ पुरी के जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा पूरी दुनिया में जगन्नाथ रथ यात्रा के नाम से प्रसिद्ध है। जगन्नाथ जी का यह मंदिर उड़ीसा राज्य के पुरी में स्थित है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ (विष्णु) की मूर्ति और अगल बगल बड़े भाई बलभद्र जी (बलराम) और बहन सुभद्रा जी की मूर्ति स्थापित की गई है।
जगन्नाथ पूरी रथ यात्रा की कहानी |
जगन्नाथ पूरी में भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्ण का बहुत विशाल और बहुत पुराना मंदिर है।
रथयात्रा पर्व का पुरी के चौबीस पर्वों में सर्वाधिक महत्व है। यह हर वर्ष और बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। हम आपको बता दें कि रथ को खींचने के लिए कुशल मज़दूरों भी रखे जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन रथों को खींचने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। इसी कारण इन रथों को हजारों श्रद्धालुगण खीचना चाहते है। और रथों को खींचने में सहायता करते हैं।
यह ‘महा उत्सव’ भावुकतापूर्ण गीतों के सुंदर गायन से मनाया जाता है।
पुरी का जगन्नाथ मंदिर के 9 या 10 दिवसीय महोत्सव की तैयारी का श्रीगणेश कुछ धार्मिक अनुष्ठानों के साथ अक्षय तृतीया को श्रीकृष्ण, बलराम और सुभद्रा के रथों के निर्माण से हो जाता है। यह वह समय होता है जब जगन्नाथ जी को करीब से देखा जा सकता है। इस यात्रा में भक्त एवं भगवान के बीच यहां कोई दूरी नहीं रखी जाती। रथ यात्रा का महोत्सव 9वें या10वें दिन शुक्ल पक्ष की ग्यारस के दिन समाप्त हो जाता है।
जगन्नाथ पूरी के रथों का निर्माण अक्षय तृतीया के दिन से शुरू हो जाता है। इन्हें हर साल नए तरीके से बनाया जाता है, इन्हें बनाने में बहुत से लोग लगते है। फिर इन्हें बहुत ही सुंदर ढंग से सजाया भी जाता है।
रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलती है। जगन्नाथ पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी तीनों अलग-अलग रथ में सवार होकर पुरी की यात्रा करते हैं। पुरी की यात्रा के उपरांत उन्हें पुरी से गुंडीचा मंदिर ले जाया जाता है। अर्थात यह यात्रा मुख्य मंदिर से शुरू होकर 2 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर पर समाप्त होती है। उसी दिन रथ यात्रा गुंडीचा मंदिर पहुँच जाती है। अगले दिन तीनों प्रतिमाओं को मंदिर में स्थापित किया जाता है। इस दौरान पुरी में मेला भरता है। तरह तरह के आयोजन होते है।
यहां भगवान जगन्नाथ सात दिन तक विश्राम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल दशमी को जगन्नाथ जी की वापसी यात्रा शुरू होती है। इसे बाहुड़ा यात्रा कहते हैं। शाम से पूर्व ही रथ जगन्नाथ मंदिर तक पहुंच जाते हैं। जहां एक दिन प्रतिमाएं भक्तों के दर्शन के लिए रथ में ही रखी रहती हैं। अगले दिन एकादशी के दिन इनको मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के गर्भगृह में पुन: स्थापित कर दिया जाता है।
इस प्रकार साल में एक बार केवल रथ यात्रा के लिए ही प्रतिमाओं को उनकी जगह से उठाया जाता है।
रथ यात्रा का आयोजन विदेशों में भी होता है। विदेशों में इस्कॉन मंदिर के द्वारा रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है। करीब 100 से भी ज्यादा विदेशी शहरों में इसका आयोजन होता है, जिसमें से मुख्य डबलिन, लन्दन, मेलबर्न, पेरिस, न्यूयॉर्क, सिंगापूर, टोरेन्टो, मलेशिया, कलिफ़ोर्निया है।
इसके अलावा हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी रथ यात्रा का बहुत बड़ा आयोजन होता है, जो एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है।
हिंदी पंचांग के अनुसार जगन्नाथ पूरी की रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकलती है। इस बार यह तिथि आज 12 जुलाई 2021 दिन रविवार को है।
आज जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा 2021 के सभी कार्यक्रमों का पूरा शेड्यूल
जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा के लिए मंदिरका दरवाजा सुबह 4:30 बजे खोला जाएगा और फिर मंगल आरती होगी। उसके बाद का कार्यक्रम निम्न प्रकार से होगा।
* मैलामा- सुबह 5 बजे
* तड़प लगी- सुबह 5 बजे
* रोशो होमा -5 पूर्वाह्न
* अबकास-5.30 पूर्वाह्न
* सूर्य पूजा -5.40 पूर्वाह्न
* द्वारपाल पूजा - सुबह 6 बजे
* बेसा सेसा -6 पूर्वाह्न
* गोपाल भोगो, धूपा -6.30 पूर्वाह्न से 7 बजे
* पहाडी प्रारंभ- सुबह 8.30 बजेप
* हांडी अंत- 11.30.am
* चेरापहाड़ा- दोपहर 12.45-2 बजे
* रथ यात्रा दोपहर 3 बजे शुरू होगी।
दसवें दिन इस यात्रा का समापन हो जाता है।
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